अनिद्रा (Insomnia)

अनिद्रा सबसे ज्यादा प्रभावित करने वाला नींद संबंधी विकार (Sleep Disorder) है, जिसमें व्यक्ति को नींद न आना या बार-बार उठने जैसी समस्याएं होने लगती हैं। लंबे समय तक अनिद्रा से ग्रस्त रहने से स्वास्थ्य संबंधी अन्य समस्याएं हो सकती हैं, जिनमें प्रमुख रूप से हाई ब्लड प्रेशर (High blood pressure), डायबिटीज (Diabetes) और वजन बढ़ना (Gaining weight) आदि शामिल हैं। अनिद्रा से ग्रस्त व्यक्ति की नींद पूरी नही हो पाती है, जिस कारण से वह दिन के समय भी शारीरिक रूप से सक्रिय नहीं रह पाता है और ऐसे में कार्यों में ध्यान न लगा पाना, याददाश्त संबंधी समस्याएं व सड़क दुर्घटनाएं आदि होने का खतरा बढ़ जाता है। अनिद्रा एक ऐसा नींद संबंधी विकार है, जो हर व्यक्ति के में अलग-अलग कारकों की वजह से हो सकता है उदाहरण के लिए मानसिक व भावनात्मक समस्याएं या फिर कोई अन्य शारीरिक समस्या आदि। इसके अलावा किसी व्यक्ति की उम्र, लिंग और सामाजिक व आर्थिक स्थितियां भी अनिद्रा का एक प्रमुख जोखिम कारक हो सकती हैं। भारत में किए गए एक अध्ययन के अनुसार लगभग 33 प्रतिशत ऐसे वयस्क हैं, जो अनिद्रा से पीड़ित हैं। अनिद्रा से होने वाली जटिलताओं से बचने के लिए इसकी समय पर देखभाल व इलाज जरूरी है। इस स्थिति का इलाज आमतौर पर इस रोग के कारण, प्रकार और गंभीरता आदि पर निर्भर करता है।

अनिद्रा के प्रकार

अनिद्रा के प्रमुख रूप से तीन प्रकार हैं -


  • ट्रांसिएंट इंसोम्निया - यह विकार किसी व्यक्ति को सिर्फ एक महीना या उससे भी कम समय तक रहता है।

  • शॉर्ट टर्म इंसोम्निया - इसको एक्यूट इनसोमनिया भी कहा जाता है। यह आमतौर पर एक से छह महीने तक रहता है।

  • क्रोनिक इंसोम्निया - अगर अनिद्रा की समस्या छह महीने से भी अधिक समय तक रहती है, तो इसे क्रोनिक यानी दीर्घकालिक अनिद्रा विकार कहा जाता है।


हालांकि, अनिद्रा विकार को अन्य कारकों के आधार पर निम्न के रूप में भी वर्गीकृत किया जा सकता है -

  • प्राइमरी इंसोम्निया - अगर विकार के कारण का पता नहीं चल पा रहा है, तो इसे प्राइमरी इंसोम्निया कहा जाता है।

  • सेकेंडरी इंसोम्निया - यदि किसी व्यक्ति को पहले से हुई किसी बीमारी के कारण अनिद्रा की समस्या हुई है, तो इस अनिद्रा विकार को सेकेंडरी इंसोम्निया कहा जाता है।

अनिद्रा के लक्षण

रात के समय नींद न आना और बार-बार नींद से जागना अनिद्रा के प्रमुख लक्षण होते हैं। हालांकि, हर व्यक्ति व इस विकार के अंदरूनी कारणों के अनुसार कुछ लक्षण अलग-अलग हो सकते हैं। इसके अलावा अनिद्रा से ग्रसित व्यक्ति को निम्न लक्षण भी महसूस हो सकते हैं -


  • रात को कई बार नींद से जागना

  • जागने के बाद फिर से नींद आने में दिक्कत होना

  • दिनभर थकान महसूस होना और उबासी आना

  • स्कूल या ऑफिस के कार्यों में ध्यान न लगा पाना

  • याददाश्त संबंधी समस्याएं होना और अक्सर चीजें भूल जाना

  • डिप्रेशन व अन्य मानसिक समस्याएं महसूस होना

  • नींद पूरी न होने के कारण चिड़चिड़ा व क्रोधित व्यवहार होना


यदि आप रात के समय सामान्य रूप से सो नहीं पाते हैं और इस कारण से आपको दिन में थकावट महसूस होती है, तो आप भी अनिद्रा से ग्रसित हो सकते हैं। उपर दिए गए लक्षणों में से कोई भी महसूस होने पर आपको एक बार डॉक्टर से संपर्क अवश्य कर लेना चाहिए। अनिद्रा एक ऐसा विकार है, जो कई स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है इसलिए डॉक्टर से बात करना जरूरी होता है।

अनिद्रा के कारण

अनिद्रा के कई अलग-अलग कारण हो सकते हैं, जो हर व्यक्ति के स्वास्थ्य, उम्र लिंग, वातावरण और उसकी जीवनशैली पर निर्भर करते हैं। अनिद्रा के प्रमुख कारणों व जोखिम कारकों में निम्न को शामिल किया जा सकता है -


  • तनाव - शारीरिक व मानसिक तनाव दोनों ही आपकी नींद के दुश्मन बन सकते हैं। पारिवारिक व आर्थिक समस्याओं संबंधी कई ऐसे कारक हैं, जो व्यक्ति के मानसिक तनाव को बढ़ा सकती है और उसका सीधा असर आपकी नींद पर भी पड़ता है।

  • नींद संबंधी अच्छी आदतें न होना - जीवनशैली में नींद संबंधी बुरी आदतें जैसे रात को देर तक जागना या फोन का इस्तेमाल करना, दिन के समय सोना, अधिक प्रकाश या शोर-शराबे वाली जगह पर सोना आदि भी आपकी नींद को प्रभावित कर सकते हैं। लंबे समय तक ऐसी स्थितियों में रहना अनिद्रा का कारण बन सकता है।

  • आहार संबंधी बुरी आदतें - रात को सोने से तुरंत पहले खाना या शाम के समय भारी आहार लेने से रात को पाचन संबंधी समस्याएं होती हैं और यह अनिद्रा का कारण बन सकता है।

  • मानसिक समस्याएं - डिप्रेशन, चिंता या बाइपोलर डिसऑर्डर जैसे कई अन्य मानसिक विकार हैं, जो आपकी नींद को प्रभावित करते हैं और अनिद्रा का कारण बन सकते हैं।

  • स्वास्थ्य समस्याएं - तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करने वाले रोग या गंभीर दर्द पैदा कनरे वाले रोग भी आपकी नींद की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकते हैं और इस कारण से भी आप अनिद्रा से ग्रसित हो सकते हैं।

  • दवाएं - कुछ विशेष प्रकार की दवाएं हैं, जो आपकी नींद के सामान्य चक्र को प्रभावित कर देते हैं। डिप्रेशन और एलर्जी आदि के लिए इस्तेमाल की जाने वाली कुछ दवाएं नींद के पैटर्न के प्रभावित कर देती हैं और इस कारण से भी आपको अनिद्रा विकार हो सकता है।


अनिद्रा के जोखिम कारक


कुछ स्थितियां हैं, जो अनिद्रा विकार होने के जोखिम कारकों को बढ़ा सकती है -

  • रात के समय कैफीन लेना (जैसे चाय या कॉफी का अधिक सेवन करना)

  • धूम्रपान या शराब का सेवन करना

  • बढ़ती उम्र

  • महिलाएं (पुरुषों की तुलना में महिलाओं को इसके जोखिम अधिक होते हैं)

अनिद्रा का निदान

अनिद्रा कोई रोग नहीं है और इसलिए कोई विशेष टेस्ट नहीं हैं जिसकी मदद से इस स्थिति का निदान किया जा सके। अगर आपको नींद संबंधी समस्या हो रही है, तो स्थिति का पता लगाने के लिए डॉक्टर आपकी नींद के पैटर्न का पता लगाते हैं और साथ ही आपकी दिनचर्या की भी जांच करते हैं। इस दौरान अगर डॉक्टर को लगता है कि आप अनिद्रा से पीड़ित हैं, तो स्थिति की पुष्टि करने के लिए कुछ जांच भी की जा सकती हैं जैसे -


  • नींद के पैटर्न का पता लगाने के लिए स्लीप स्टडी

  • अंदरूनी रोगों की जांच करने के लिए लेबोरेटरी टेस्ट जैसे ब्लड टेस् आदि

  • कुछ प्रकार के इमेजिंग स्कैन भी किए जा सकते हैं, जिनकी मदद से मस्तिष्क की हलचल का पता लगाया जा सकता है

  • सोते समय दिल की धड़कन की गति

  • नींद के दौरान आंखों की गति

  • नींद संबंधी अन्य समस्याओं का पता लगाने के लिए एक्टिग्राफी

अनिद्रा का इलाज

नींद संबंधी समस्याओं का इलाज आमतौर पर जीवनशैली में अच्छे बदलाव लाकर, सोने के लिए सही शारीरिक मुद्रा अपनाकर और अच्छी डाइट अपनाकर किया जाता है। हालांकि, अगर इनसे अनिद्रा विकार में कुछ सुधार नहीं हो पा रहा है या फिर समस्या गंभीर है, तो डॉक्टर ऐसे में मरीज को कुछ दवाएं दे सकते हैं। इनमें आमतौर पर नींद की दवाएं शामिल होती हैं, जो व्यक्ति को जल्दी नींद लाने में मदद करती हैं। इसके अलावा अगर किसी अंदरूनी स्वास्थ्य समस्या के कारण अनिद्रा हुई है, तो उस समस्या का इलाज करके इसे दूर किया जा सकता है। उदाहरण के लिए यदि डिप्रेशन या चिंता के कारण अनिद्रा की समस्या हुई है, तो डॉक्टर एंटीडिप्रेसेंट्स या एंटी-एंग्जायटी दवाएं दे सकते हैं। वहीं अगर किसी अन्य बीमारी के लिए ली जा रही दवा के साइड इफेक्ट के रूप में अनिद्रा की समस्या हो रही है, तो ऐसे में डॉक्टर उन दवाओं को वैकल्पिक दवाओं के साथ बदल देते हैं या फिर उनकी खुराक में कुछ बदलाव कर देते हैं।

इसके अलावा कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी (CBT) के अलावा कुछ अन्य उपचार विकल्प भी हैं, जिनकी मदद से अनिद्रा की समस्या का इलाज किया जा सकता है। हालांकि, अगर आपको अनिद्रा की समस्या हो रही है, तो आपको डॉक्टर की सलाह लिए बिना नींद की दवाएं या अन्य कोई भी दवा नहीं लेनी चाहिए।

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