
साधना तिवारी
साधना तिवारी 15 वर्षों से मीडिया क्षेत्र में हैं। लगभग 9 वर्षों से अधिक समय से ZEE ग्रुप के साथ जुड़ी हुई ... Read More
Written By: Sadhna Tiwari | Updated : September 20, 2024 11:42 PM IST
Insomnia Causing Health Conditions: आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में कई तरह की ऐसी बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है जो पहले नहीं होती थीं। डायबिटीज, हार्ट डिजिजेज और हाई बीपी (High BP) जैसी बीमारियां जहां पहले गिने-चुने लोगों को ही होती थीं वहीं, अब ये बीमारियां कम उम्र के लोगों और युवाओं में भी देखी जा रही हैं। वहीं, तनाव और डिप्रेशन जैसी समस्याएं भी बहुत कॉमन हो गयी हैं। तनाव में जी रहे व्यक्ति की शारीरिक और मेंटल हेल्थ दोनों ही बुरी तरह से प्रभावित होती है। स्ट्रेस की वजह से लोगों को रातों में ठीक तरह से नींद भी नहीं आती, फिर चाहे वे कितना भी थके हुए क्यों ना हों।
नींद न आना आज लगभग हर तीसरे व्यक्ति की समस्या (Sleep related problems) बन गया है। वहीं, क्या आप जानते हैं कि रात में ठीक तरह से सो ना पाना या अनिद्रा की समस्या केवल तनाव (Stress induced insominia) के कारण ही नहीं होती। बल्कि, अन्य बीमारियों के कारण भी व्यक्ति को नींद न आने की परेशानी हो सकती है। अनिद्रा (Insomnia) या रातभर जागने की समस्या कई गम्भीर बीमारियों का लक्षण (symptoms of severe health conditions) भी हो सकती है। यहां पढ़ें ऐसी ही कुछ बीमारियों के बारे में जिनकी वजह से आप अनिद्रा का शिकार हो सकते हैं।
पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम महिलाओं में पीरियड्स से जुड़ी एक आम समस्या है। हार्मोन्स के स्तर में उतार-चढ़ाव के कारण महिलाओं में माहवारी से जुड़ी समस्याएं बढ़ जाती हैं। प्रजनन की उम्र वाली महिलाएं (20-45 साल के बीच की उम्र की महिलाएं) पीसीओएस से बुरी तरह प्रभावित हैं। पीसीओएस की वजह से महिलाओं को गर्भधारण में समस्या आ सकती हैं। पीसीओएस का एक प्रमुख लक्षण अनिद्रा की समस्या या रात में नींद न आना भी हो सकता है। इस बीमारियों में महिलाओं का स्लीप पैटर्न बुरी तरह से प्रभावित होता है और वे रात में ठीक तरीके से सो नहीं पातीं।
जिन लोगों को मेंटल हेल्थ से जुड़ी समस्याएं बार-बार होती हैं और जो डिप्रेशन के शिकार हैं उनको भी रात में नींद नहीं आती।
ऐसे लोगों जिनका डाइजेस्टिव सिस्टम ठीक तरीके से काम नहीं करता या जिनकी गट हेल्थ खराब हो, उन लोगों को भी अनिद्रा की परेशानी हो सकती है।
इसी तरह अस्थमा के मरीजों में रात में कुछ लक्षण बढ़ जाते हैं। इन लक्षणों की वजह से उनके लिए सो पाना मुश्किल हो सकता है।
मेनोपॉज के आसपास महिलाओं को नींद से जुड़ी समस्याएं होने लगती हैं। ऐसे में महिलाओं को नींद नहीं आती और वे देर रात तक जागती रहती हैं।
सोने से पहले बिस्तर पर लेटकर मोबाइल और टीवी ना देखें।
रात में भारी खाना ना खाएं और बहुत गम्भीर टॉपिक्स पर चर्चा करने के लिए अपने बिस्तर पर ना बैठें।
अपने सोने का कमरा शांत और ठंडा रखें।
रात में बहुत अधिक पानी पीने से बचें या लिक्विड्स का सेवन ना करें।
सोने से पहले हेवी एक्सरसाइज ना करें।
रात में सोते समय अपने पालतू जानवर को अपने बिस्तर पर ना सुलाएं।
सूर्यास्त के बाद चाय-कॉफी, अल्कोहल और सिगरेट का सेवन ना करें।