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Written By: Yogita Yadav | Published : August 15, 2018 9:21 AM IST
दो दशकों की कड़ी मेहनत के बाद सवा अरब की आबादी वाले देश भारत ने पोलियो से आजादी पा ली है। कहा जा सकता है कि भारतीय बच्चे अब इस बीमारी से पूरी तरह मुक्त हैं। पिछले कुछ साल में पोलियो का एक भी मामला सामने नहीं आया है।
भारत को पोलियो मुक्त देश घोषित करने से पहले विश्व स्वास्थ्य संगठन डब्ल्यूएचओ को इस बात की पुष्टि करनी होगी कि कोई ऐसा मामला तो नहीं जिसका अब तक पता नहीं चल पाया है।
पोलियो का आखिरी मामला 2011 में देखा गया था। उस समय साल भर में केवल एक ही मामला दर्ज हुआ था। इसे देखते हुए पिछले अब डब्ल्यूएचओ ने भारत का नाम पोलियो ग्रस्त देशों की सूची से हटा दिया। हालांकि पड़ोसी देश पाकिस्तान और अफगानिस्तान अब भी बुरी तरह इसकी चपेट में हैं।
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ऐसे लड़ी गई जंग
पिछले दो दशक से देश भर में लाखों स्वयंसेवक, डॉक्टर और चिकित्सा कर्मचारी लगातार पोलियो के खिलाफ काम कर रहे हैं और उसके बाद लक्ष्य पूरा हो पाया है। घर घर जा कर इस बात की पुष्टि की जाती रही है कि तीन साल से कम उम्र वाले बच्चों को टीके की खुराक नियमित रूप से मिल रही हो। 2009 में देश में 741 मामले दर्ज किए गए थे, जबकि 2010 में ये घटकर 42 हो गए और इसके अगले साल केवल एक ही मामला सामने आया।
खतरनाक है ये बीमारी
पोलियो को टीके की मदद से रोका जा सकता है। हालांकि इस बीमारी की वजह से लकवा या फिर मौत के मामले नाईजीरिया, पाकिस्तान और अफगानिस्तान में अब भी सामने आ रहे हैं। पोलियो पांच साल से कम उम्र के बच्चों को शिकार बनाता है। दूषित पानी के जरिये पोलियो का वायरस सेंट्रल नर्वस सिस्टम यानि तंत्रिका तंत्र पर हमला करता है जिसकी वजह से लकवा या फिर मौत भी हो जाती है।
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देर से हुई शुरूआत
इस बीमारी को रोकने में भले ही भारत कामयाब हुआ हो लेकिन भारतीय शहरों में पोलियो के शिकार लोग आसानी से देखे जा सकते हैं। इन लोगों के लिए पोलियो का टीका काफी देर बाद आया।
पहली लड़ाई
1990 के दशक में भारत में पोलियो के खिलाफ युद्धस्तर पर टीका अभियान चलाया गया। इस काम में संयुक्त राष्ट्र ने भारत सरकार और सामाजिक संस्थाओं की मदद की। इसका नतीजा आज पोलियो मुक्त भारत के रूप में सामने आया है। यूनीसेफ में पोलियो ऑपरेशन की प्रमुख निकोल डॉयच इस कामयाबी को पोलियो के खिलाफ जंग में ''मील का पत्थर'' बताती हैं।
चित्रस्रोत: Shutterstock.