Organ Transplant में तीसरे नंबर पर भारत, फिर भी जरूरतमंद मरीजों को क्यों नहीं मिल पाते अंग? जानें क्या है बड़ी वजह
भारत में लाखों मरीज ऐसे हैं, जिन्हें ऑर्गन ट्रांसप्लांट की जरूरत होती है, लेकिन दान किए गए अंगों की कमी की वजह से कई लोगों तक समय पर ऑर्गन नहीं पहुंच पाते हैं। लेकिन, ऐसा क्यों होता है आइए डॉ. सौरभ सिंघल और डॉ. विनीत बंगा से जानते हैं-
Organ Transplant in India: भारत दुनिया में सबसे ज्यादा ऑर्गन ट्रांसप्लांट करने वाले देशों में तीसरे स्थान पर है। देश में हर साल हजारों लोगों का किडनी, लिवर, हार्ट और फेफड़े जैसे अंगों का ट्रांसप्लांट किया जाता है। हालांकि, यह संख्या जरूरत के मुकाबले बहुत कम है। भारत में लाखों मरीज ऐसे हैं, जिन्हें ऑर्गन ट्रांसप्लांट की जरूरत होती है, लेकिन दान किए गए अंगों की कमी की वजह से कई लोगों तक समय पर ऑर्गन नहीं पहुंच पाते हैं। इसकी वजह से उन्हें सालों तक अपने जीवन के साथ संघर्ष करना पड़ता है। इतना ही नहीं, कई बार समय पर ट्रांसप्लांट न मिलने की वजह से उनकी जान तक चली जाती है। अब एक नई स्टडी ने पहली बार भारत में ऑर्गन ट्रांसप्लांट की जरूरत और उपलब्ध ट्रांसप्लांट के बीच मौजूद इस बड़े अंतर का अनुमान लगाया है।
The Lancet Regional Health–Southeast Asia के अनुसार, भारत में पिछले कुछ वर्षों से ऑर्गन ट्रांसप्लांट की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है। आंकड़ों की मानें तो 2013 में देश में कुल 4,990 ऑर्गन ट्रांसप्लांट हुए थे। वहीं साल 2024 में कुल ऑर्गन ट्रांसप्लांट बढ़कर 18,911 हो गए। इनमें 2024 में 13,476 किडनी, 4,901 लिवर, 253 हार्ट, 228 लंग्स, 44 पैंक्रियाज और 9 स्मॉल बाउल ट्रांसप्लांट शामिल थे। इसके बावजूद देश में ऑर्गन फेलियर के मरीजों की संख्या और उपलब्ध अंगों के बीच बड़ा अंतर बना हुआ है।
भारत में 2023 और 2024 में कितने Organ Transplant हुए?
| ऑर्गन | 2023 में हुए ट्रांसप्लांट | 2024 में हुए ट्रांसप्लांट |
| किडनी | 13426 | 13476 |
| लिवर | 4491 | 4901 |
| हार्ट | 221 | 253 |
| फेफड़े | 197 | 228 |
| अग्नाशय | 27 | 44 |
भारत में सबसे ज्यादा किडनी ट्रांसप्लांट किए जाते हैं। NOTTO के 2024 के आंकड़ों के मुताबिक, देश में कुल 13,476 किडनी ट्रांसप्लांट हुए। इसके बाद लिवर ट्रांसप्लांट और हार्ट ट्रांसप्लांट हुए। किडनी ट्रांसप्लांट की संख्या ज्यादा होने की एक वजह यह भी है कि किडनी के मामले में living donor transplant संभव होता है। 2024 में हुए 13,476 किडनी ट्रांसप्लांट में से 11,558 living donors और 1,918 deceased donors से हुए।
भारत में कितने मरीजों को ऑर्गन ट्रांसप्लांट की जरूरत होती है?
NOTTO के अनुसार, भारत में बड़ी संख्या में लोगों के ऑर्गन फेलियर होने के कारण ऑर्गन ट्रांसप्लांट की जरूरत बढ़ रही है। हालांकि, अंगों की जरूरत से संबंधित कोई संगठित डेटा उपलब्ध नहीं है, इसलिए ये आंकड़े केवल अनुमान पर आधारित हैं। हर साल अलग-अलग अंगों के लिए लगभग इतने लोगों को ऑर्गन ट्रांसप्लांट की जरूरत होती है-
- किडनी: 2,50,000
- लिवर: 80,000
- हार्ट: 50,000
- कॉर्निया: 1,00,000
भारत में ऑर्गन ट्रांसप्लांट का सबसे बड़ा गैप क्या है?
भारत में अंग प्रत्यारोपण (Organ Transplant) की संख्या लगातार बढ़ रही है। आज भारत दुनिया में अंग प्रत्यारोपण के मामले में तीसरे स्थान पर है। लेकिन, फिर भी हजारों जरूरतमंद मरीजों को समय पर अंग नहीं मिल पाता है और वे अपने जीवन के लिए संघर्ष करते रहते हैं। एक नई स्टडी के अनुसार, देश में साल 2024 में लगभग 18 हजार ट्रांसप्लांट हुए थे, जबकि देश की सालाना जरूरत लाखों में है। इसकी सबसे बड़ी वजह है- अंगों की उपलब्धता और मांग के बीच का बहुत बड़ा अंतर होना। यानी देश में अंगों की जरूरत बहुत लोगों को है, लेकिन इसकी उपलब्धता काफी कम है। आइए, जानते हैं कि इस पर डॉक्टरों की राय क्या है?
क्या कहते हैं डॉ. सौरभ सिंघल?
आकाश हेल्थकेयर के सीनियर कंसल्टेंट-डायरेक्टर- Centre for Liver-GI Diseases and Transplantation (CLDT) डॉ. सौरभ सिंघल आगे बताते हैं कि भारत में किडनी, लिवर, हार्ट और फेफड़ों के ट्रांसप्लांट की जरूरत वाले मरीजों की संख्या काफी ज्यादा है। लेकिन, जरूरत के मुकाबले अंगदान अभी भी बहुत कम हो रहे हैं। इसकी बड़ी वजह अंगदान को लेकर जागरूकता की कमी और इससे जुड़ी कई तरह की भ्रांतियां हैं। कई लोग अंगदान को लेकर जागरूक नहीं हैं और वे इसमें हिस्सा नहीं ले पाते हैं। अक्सर किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद, उसके अंग कई लोगों को नया जीवन दे सकते हैं। लेकिन, ज्यादातर लोगों को इसकी सही जानकारी नहीं है और कई लोग समय पर निर्णय नहीं ले पाते हैं। इस अंतर को कम करने के लिए deceased organ donation बढ़ाने की जरूरत है, इसके लिए लोगों में अंगदान के प्रति जागरूकता बढ़ाना बहुत जरूरी है।
क्या कहते हैं डॉ. विनीत बंगा?
फॉर्टिस हॉस्पिटल, फरीदाबाद के डायरेक्टर-न्यूरोलॉजी डॉ. विनीत बंगा बताते हैं कि हर साल हजारों लोग अपनी जान सिर्फ इसलिए गंवा देते हैं, क्योंकि उन्हें अंग नहीं मिल पाते हैं। दरअसल, देश में जरूरत के हिसाब से अंगों की उपलब्ध्ता कम है। खासकर, मृत लोगों से मिलने वाले अंगों की भारी कमी है। भारत में ज्यादातर ट्रांसप्लांट अभी जीवित लोगों से मिले अंगों की मदद से ही किए जाते हैं। लेकिन, हृदय, फेफड़े और अग्न्याशय जैसे अंगों के लिए ऐसे डोनर की जरूरत होती है, जिनकी ब्रेन डेथ हो चुकी हो और उनके अंग दान किए जा सके।
इसके अलावा, देश के कुछ हिस्सों में अस्पतालों में सुविधाओं और ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेटर की कमी बड़ी समस्या है। इससे जरूरतमंद मरीज को समय पर अंग मिलना मुश्किल हो जाता है। भारत में ट्रांसप्लांट सर्जरी के क्षेत्र में काफी प्रगति हुई है, लेकिन अंगों की मांग और उपलब्धता के बीच बड़ा होने की वजह से सभी लोगों को अंग नहीं मिल पाते हैं।
2040 तक बढ़ सकती है ऑर्गन ट्रांसप्लांट की जरूरत!
स्टडी में अनुमान लगाया गया है कि आने वाले वर्षों में ऑर्गन ट्रांसप्लांट की जरूरत बढ़ सकती है। अनुमान है कि साल 2040 तक भारत में सालाना करीब 4.63 लाख ऑर्गन ट्रांसप्लांट की जरूरत हो सकती है। इसका मतलब है कि ऑर्गन डोनेशन और ट्रांसप्लांट सिस्टम को तेजी से मजबूत करना बहुत जरूरी है। वरना जरूरत और उपलब्धता के बीच में एक बड़ा अंतर हो सकता है।
Disclaimer: भारत में अंग प्रत्यारोपण कई लोग करवाते हैं, लेकिन कई लोगों को अंग नहीं मिल पाते हैं और इसकी वजह से वे अपने जीवन में संघर्ष करते रहते हैं। इसलिए लोगों में ऑर्गन डोनेशन के प्रति जागरूकता बढ़ाना बहुत जरूरी है। इसके लिए सरकार, स्वास्थ्य संस्थानों और आम लोगों को मिलकर काम करना होगा। एक जागरूक समाज ही अंगदान की कमी को दूर कर सकता है और हजारों मरीजों को समय पर जीवनदान मिल सकता है।