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भारत के किस राज्य में कैंसर के सबसे ज्यादा मामले सामने आते हैं? जानें क्या कहती है रिपोर्ट

रिसर्च बताती हैं कि भारत के उत्तर प्रदेश में कैंसर के सबसे ज्यादा मरीज हैं जबकि कैंसर का खतरा भारत के पूर्वोतर राज्यों में सबसे ज्यादा है। इस लेख में हम जानेंगे कि आखिर किस कारण से इन राज्यों में कैंसर का खतरा ज्यादा है।

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Written By: Mukesh Sharma | Updated : July 30, 2026 5:36 PM IST

कैंसर सिर्फ भारत के लिए ही नहीं बल्कि दुनिया की लिए ही एक बेहद खतरनाक बीमारी है और मेडिकल रिसर्चर लगातार इसके लिए अलग-अलग प्रभावी ट्रीटमेंट ऑप्शन्स की खोज कर रहे हैं। हालांकि, मेडिकल साइंस अभी भी पीछे नहीं है और कैंसर के इलाज के कई अलग-अलग तरीके खोजे जा चुके हैं, जिनमें कीमोथेरेपी, इम्यूनोथेरेपी, रेडिएशन थेरेपी और सर्जिकल रिमूवल जैसे कई अलग-अलग तरीके हैं जो कैंसर के इलाज में काफी प्रभावी साबित हुए हैं। हालांकि, दुनिया की बात छोड़ते हैं और भारत में आते हैं और जानते हैं कि भारत के किस हिस्से में कैंसर के सबसे ज्यादा मामले पाए जाते हैं और उसके पीछे का कारण क्या है? सरकारी रिपोर्ट उत्तर प्रदेश में भारत के सबसे ज्यादा कैंसर के मामले हैं और उसके पीछे का कारण यह नहीं है कि उत्तर प्रदेश की आबादी भी ज्यादा है बल्कि और भी कई कारण हैं जिनके बारे में हम इस लेख में जानेंगे और साथ ही में अन्य राज्यों का हाल भी जानेंगे।

उत्तर प्रदेश में कैंसर के सबसे ज्यादा मामले क्यों

हालांकि, इस फैक्ट को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है और जो कहीं न कहीं कैंसर के मामले भी ज्यादा होने का कारण बन सकता है। लेकिन इसके साथ-साथ कुछ अन्य फैक्टर भी हैं, जैसे उत्तर प्रदेश भारत के उन राज्यों में से एक हैं, जहां पर लोग तंबाकू के उत्पादों का बहुत ज्यादा इस्तेमाल करते हैं। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन की IARC एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार तंबाकू के प्रोडक्ट कैंसर का सबसे बड़ा कारण हैं।

अन्य राज्य जहां कैंसर के मामले ज्यादा हैं

उत्तर प्रदेश के बाद देश में सबसे ज्यादा कैंसर वाले मामले आमतौर पर आंकड़ों महाराष्ट्र (127512), पश्चिम बंगाल (118910), बिहार (115123) और तमिलनाडू (98386) में सबसे ज्यादा कैंसर के मामले पाए जाते हैं। data.gov.in के अनुसार इन राज्यों में भी कैंसर का सबसे प्रमुख कारण यही पाया गया कि इन क्षेत्रों में सबसे ज्यादा कैंसर के मामले पाने के पीछे का प्रमुख कारण खराब जीवनशैली, प्रोसेस्ट फूड से जुड़ा खानपान और बढ़ती जनसंख्या का अनुपात भी है।

जनसंख्या के अनुपात में कैंसर के सबसे ज्यादा मामले

जहां जनसंख्या अधिक होगी, वहां कैंसर के दर्ज मामले भी तुलनात्मक रूप से ज्यादा ही होंगे जो कि एक सीधा आंकड़ा है। लेकिन अगर किसी राज्य की जनसंख्या तुलनात्मक रूप से कम है, लेकिन मामले ज्यादा हैं तो असली दिक्कत उन राज्यों में शुरु होती है। अगर जनसंख्या के आधार पर कैंसर के मामलों की तुलना की जाए तो Jama Network की रिपोर्ट के अनुसार भारत के मिजोरम राज्य में रहने वाले लोगों में कैंसर का रिस्क सबसे ज्यादा देखा गया है। रिपोर्ट में यह भी पाया गया कि मिजोरम की राजधानी एजौल में सबसे ज्यादा कैंसर के मामले पाए जाते हैं। मिजोरम के अलावा मेघालय, सिक्किम और असम भी कैंसर के हाई रिस्क क्षेत्रों में आते हैं।

नॉर्थ-ईस्ट राज्यों में कैंसर का खतरा ज्यादा क्यों?

इंडियन जर्नल ऑफ मेडिकल रिसर्च के अनुसार मिजोरम व भारत के अन्य नॉर्थ ईस्ट राज्यों में कैंसर के मामले ज्यादा पाए जाने का सबसे बड़ा कारण तंबाकू के उत्पादों का उपयोग करना है। मिजोरम की बात करें तो वहां पर पुरुषों में होने वाले कुल कैंसर के मामलों में 49.3% मामले तंबाकू के सेवन के कारण होते हैं और महिलाओं में यह आंकड़ा 22.8% है। इसके अलावा IJMR की रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि नॉर्थ ईस्ट राज्यों में वातावरण से जुड़े कुछ फैक्टर भी हैं, जो कहीं न कहीं कैंसर के रिस्क को बढ़ाते हैं।

इसका एक उदाहरण यह भी है कि नॉर्थ ईस्ट में बसे राज्यों का अधिकांश भाग पहाड़ी है, जहां पर खाना पकाने और सर्दी से बचने के लिए लकड़ी व चारकोल जलाया जाता है, जिससे निकलने वाला धुआं भी कैंसर का रिस्क बढ़ाता है। रिपोर्ट में यह बताया गया कि नॉर्थ ईस्ट राज्यों में कैंसर के मामले ज्यादा होने का कोई एक सटीक कारण नहीं है, बल्कि कई अलग-अलग संभावित कारण हैं, जिस कारण से वहां के लोगों में कैंसर का खतरा दूसरे राज्यों से ज्यादा हो सकता है।

डिसक्लेमर: कैंसर एक बेहद गंभीर बीमारी है, जो जेनेटिक कंडीशन्स, वातावरण और अन्य कई कारकों से जुड़ी हो सकती है और किसी को भी हो सकती है। इससे जुड़ी ज्यादा जानकारी के लिए अपने नजदीकी डॉक्टर से संपर्क करें। इस लेख में दी गई किसी भी जानकारी का इस्तेमाल किसी भी बीमारी के इलाज के लिए नहीं है और और इसका उद्देशय केवल शैक्षणिक एवं सूचनात्मक है। Thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।