
आशु कुमार दास
आशु कुमार दास एक अनुभवी हेल्थ कंटेंट स्पेशलिस्ट हैं। इन्हें हेल्थ कंटेंट राइटर के तौर पर काम करते हुए 6 ... Read More
Written By: Ashu Kumar Das | Published : November 25, 2025 5:08 PM IST
आजकल की लाइफस्टाइल में लोगो को कई प्रकार की समस्याएं हो रही हैं। जंक और प्रोसेस्ड फूड खाने की वजह से लोगों में मोटापा बढ़ रहा है और मोटापे की वजह से बीमारियां हो रही हैं। कुछ ऐसी ही कहानी है कोलकाता के रहने वाले दीपक (बदला हुआ नाम) की। दर्द और मोटापे की दोहरी मार झेल रहे दीपक को लंबे समय से कूल्हे की परेशानी हो रही थी। कूल्हों में लगातार दर्द रहने की वजह से दीपक का चलना, फिरना यहां तक की सोना भी मुश्किल हो चुका था। कोलकाता के कई अस्पतालों में इलाज करवाने के बाद दीपक काफी परेशानी हो चुके थे। फिर उन्होंने इसके बारे में एक दोस्त से बात की और अपना इलाज NCR के अस्पताल में शुरू करवाया। डॉक्टर ने उन्हें एक-एक कर दोनों हिप (कूल्हों) की रिप्लेसमेंट सर्जरी करवाने की सलाह दी।
दीपक का इलाज करने वाले फरीदाबाद के सेक्टर- 8 स्थित सर्वोदय अस्पताल के डायरेक्टर एंड हेड रोबोटिक नी और मिनिमली इनवेसिव हिप रिप्लेसमेंट सर्जरी डॉ. पंकज वलेचा ने बताया कि 165 किलो वजन वाले युवा की टोटल हिप रिप्लेसमेंट सर्जरी आम नहीं होती। इसमें उच्च स्तर की सर्जिकल कौशल, सूक्ष्म योजना और पूरी तरह तैयार मल्टीडिसिप्लिनरी टीम की जरूरत पड़ती है। ऐसे में उन्होंने दीपक का इलाज किया और हिप रिप्लेसमेंट सर्जरी कामयाब हो पाई। सर्जरी के बाद दीपक अपनी नॉर्मल लाइफ जी पा रहे हैं।
डॉक्टर का कहना है कि देश हीं बल्कि दुनिया में यह पहला मामला है, जब 65 किलो के भारी भरकम शरीर वाले शख्स की हिप सर्जरी की गई है। अभी तक 138 किलो वजन के सर्जरी का रिकार्ड था। इस अनोखी सर्जरी के लिए अस्पताल ने लिम्का बुक आफ रिकार्ड्स और गिनीज वर्ल्ड रिकार्ड्स में नाम दर्ज करने के लिए दावेदारी भी दिखाई है।
डॉ. पंकज वलेचा के अनुसार, वर्तमान में युवाओं में हिप से जुड़ी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। इसका मुख्य कारण खानपान और जीवनशैली का गलत होता है। इसके अलावा हिप जॉइंट के केस बढ़ने की वजह हैः
एनाबॉलिक स्टेरॉयड का उपयोग- जिम जाने वाले युवा जल्दी बॉडी बनाने की चाहत में एनाबॉलिक स्टेरॉयड का दुरुपयोग कर रहे हैं। स्टेरॉयड के उपयोग से कूल्हे की हड्डी (फीमरल हेड) में रक्त की आपूर्ति बाधित हो सकती है, जिससे हड्डी बेकार होने लगती है, जिसे एवैस्कुलर नेक्रोसिस (AVN) कहा जाता है।
प्रोटीन पाउडर- असत्यापित (Unverified) प्रोटीन पाउडर का अत्यधिक सेवन या ऐसे पाउडर जिनमें स्टेरॉयड मिलाए गए हों, कूल्हों को गंभीर नुकसान पहुंचा रहे हैं।
ब्लड सर्कुलशन का सही न होना- मेडिकल अध्ययनों से पता चलता है कि शराब का अत्यधिक और लगातार सेवन भी युवाओं में एवैस्कुलर नेक्रोसिस (AVN) का एक प्रमुख कारण है, क्योंकि यह कूल्हे की हड्डी में रक्त संचार को प्रभावित करता है।
स्टेरॉयड थेरेपी- COVID-19 के उपचार में स्टेरॉयड का उपयोग भी कुछ मामलों में हिप जॉइंट की समस्याओं का कारण बन सकता है।