Genome Sequencing: ब्रिटेन से भारत आनेवाले लोगों की होगी जीनोम सीक्वेंसिंग, जानें क्या है जीनोम सीक्वेंसिंग और क्यों है यह अहम

हेल्थ मिनिस्ट्री के अनुसार कोविड-19 टेस्टिंग में पॉजिटिव आने वाले सभी लोगों की जीनोम सीक्वेंसिंग (Genome Sequencing)की जाएगी। बता दें कि ब्रिटेन में कोरोना के नये स्ट्रेन का पता लगने से पहले ही लगभग 5 हजार लोगों की जिनोम सीक्वेंसिंग की जा चुकी थी। वहीं, भारत में इस प्रक्रिया के लिए अब तक 10 लैब्स बनाए जाने की बात कही जा रही है।  

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Written By: Sadhna Tiwari | Updated : December 29, 2020 10:35 PM IST

Genome Sequencing: कोरोना वायरस के नये स्ट्रेन की वजह से दुनियाभर में लोगों को एक नयी महामारी उभरने का डर महसूस हो रहा है। कोरोना वायरस के इस नये स्वरूप की शुरुआत ब्रिटेन से मानी जा रही है। इस नये कोरोना वायरस के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए ब्रिटेन ने दुनिया के कई हिस्सों तक जाने वाली अपनी फ्लाइट्स को बंद कर दिया है। वहीं, भारत में भी कोरोना के न्यू स्ट्रेन से सुरक्षा के लिए कई कड़े फैसले लिए गए हैं। ब्रिटेन से आने-जाने वाली फ्लाइट्स को कैंसल कर दिया गया है। साथ ही,  राज्य स्तर पर सरकारों और प्रशासन द्वारा अलर्ट ज़ारी किए गए हैं। संक्रमण से सुरक्षा के लिए नाइट कर्फ्यू और सोशल डिस्टेंसिंग जैसे प्रयासों को ज़ारी रखने के लिए गाइडलाइन्स दी गयी हैं।(Corona safety and precautions measures in India)

ब्रिटेन से भारत आनेवाले लोगों की होगी जीनोम सीक्वेंसिंग

वहीं, मंगलवार को भारत  में कोरोना के नए स्ट्रेन से जुड़े 6 मामले सामने आए जिसके बाद केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि ब्रिटेन से लौटने वाले सभी यात्रियों की जीनोम सिक्वेंसिंग की जाएगी। ये सभी यात्री 9 दिसंबर से 22 दिसंबर के बीच ब्रिटेन से भारत वापस आए हैं। हेल्थ मिनिस्ट्री के अनुसार कोविड-19 टेस्टिंग में पॉजिटिव आने वाले सभी लोगों की जीनोम सीक्वेंसिंग (Genome Sequencing)की जाएगी। बता दें कि ब्रिटेन में कोरोना के नये स्ट्रेन का पता लगने से पहले ही लगभग 5 हजार लोगों की जिनोम सीक्वेंसिंग की जा चुकी थी। वहीं, भारत में इस प्रक्रिया के लिए अब तक 10 लैब्स बनाए जाने की बात कही जा रही है।

क्या है जीनोम सीक्वेंसिंग ?

जीनोम सीक्वेंसिंग किसी भी प्रकार के वायरस के डीएनए (DNA) को समझने का एक तरीका है। इसकी मदद से वायरस के स्वरूप को समझने की कोशिश की जाती है। वायरस के विशाल समूहों को जीनोम कहा जाता है और वायरस से जुड़ी जानकारियां प्राप्त करने की प्रक्रिया को जीनोम सीक्वेंसिंग कहा जाता हैं। जीनोम सीक्वेंसिंग की मदद से ही कोरोना के नये स्ट्रेन के बारे में पता चल सका है। गौरतलब है कि पहले से ही भारत में जीनोम सीक्वेंसिंग (Genome Sequencing in India) से जुड़े कार्य किए जा रहे हैं। पर अब, सीक्वेंसिंग में हुए परिवर्तनों पर फोकस्ड एक विशेष स्टडी सामने आयी है।

इस स्टडी में कहा गया है कि, अब तक जीनोम में कुल 19 प्रकार के म्यूटेशन यानि बदलाव देखे जा चुके हैं। इन 19 स्ट्रेन्स में से एक को बहुत तेजडी से फैलने वाला पाया गया है। एक्सपर्ट्स के अनुसार, कोरोना जीनोम के सभी स्वरूपों की तुलना करने पर एक वेरिएंट S:N440K को अन्य सभी स्वरूपों से 2.1 प्रतिशत तेज़ी से प्रसारित होने में सक्षम पाया गया। (Genome Sequencing)

क्यों ज़रूरी है जीनोम सीक्वेंसिंग?

जीनोम के बारे में वैज्ञानिकों का दावा है कि भारत में जीनोम बहुत तेज़ गति से फैल रहा है। यह पीड़ितों को दोबारा कोविड-19 इंफेक्शन से इंफेक्टेड बना रहा है। राजधानी दिल्ली समेत देश के कई हिस्सों से जीनोम की वजह से दोबारा कोविड संक्रमण होने की पुष्टि की गयी है। वैज्ञानिकों को उम्मीद है जीनोम सीक्वेंसिंग प्रक्रिया की मदद से कोविड-19 के प्रसार को नियंत्रित कर पाने की दिशा में मदद होगी।

बता दें कि, अब तक भारत में लगभग 4 हजार 500 नमूनों की जीनोम सीक्वेंसिंग की गयी है। इस जांच के दौरान 10 स्वरूपों में 19 तरह के अनुवांशिक परिवर्तन की बात कही गयी है। वहीं, भारत के अलावा ब्रिटेन और अन्य कई देशों के एक्सपर्ट्स ने मिलकर दुनिया भर के लगभग 2 लाख 65 हजार नमूनों की सीक्वेंसिंग से प्राप्त नतीज़ों का गहन अध्ययन किया है। फिलहाल दुनिया के अलग-अलग देशों की लैब्स में जीनोम सीक्वेंसिंग (Genome Sequencing) पर काम चल रहा है।

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