
मुकेश शर्मा
मुकेश शर्मा दिल्ली यूनिर्विसिटी से जर्नलिज्म डिग्री होल्डर हैं और पिछले 8 साल से Health Journalism से जुड़े हुए ... Read More
Written By: Mukesh Sharma | Published : May 31, 2026 3:11 PM IST
diarrhea cases reduced in india (Image Credit: chatgpt)
स्वास्थ्य की नजर से अगर देखा जाए तो भारत बहुत तेजी से तरक्की कर रहा है और इसमें कोई शक नहीं है कि भारत आने वाले समय में मेडिकल हब बन सकता है। हाल ही में नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-6 (NFHS-6) सर्वे के डाटा से एक अच्छी खबर पता चली। जिसमें पाया गया कि देश में गंभीर दस्त के मामलों और उससे होने वाली मौत के मामले काफी कम हुए हैं। यह खबर इसलिए महत्वपूर्ण है कि भारत में पांच साल से कम उम्र के बच्चों की मौत का बड़ा कारण डायरिया यानी दस्त की समस्या होती थी और अब आंकड़े बता रहे हैं कि भारत अब इस समस्या को कंट्रोल करने लगा है। भारत ने देशभर में बेहद टीकाकरण अभियान, स्वास्थ्य संस्थानों में बढ़ती स्वास्थ्य सुविधाएं और घर-घर तक सुरक्षित पेयजल की पहुंच इन आंकड़ों के बदलने का सबसे बड़ा कारण है। सबसे बड़ी बात कि यह उपलब्धि न केवल बच्चों के बेहतर होते स्वास्थ्य का संकेत देती है, बल्कि भारत के सार्वजनिक स्वास्थ्य तंत्र की मजबूती को भी दर्शाती है। तो आइए विस्तार से जानते हैं, इस बारे में।
स्वास्थ्य मंत्रालय ने नए आंकड़ों के अनुसार, बच्चों में गंभीर दस्त की घटनाएं एनएफएचएस-5 में 0.7 प्रतिशत से घटकर एनएफएचएस-6 में 0.5 प्रतिशत हो गई हैं। वहीं, 12-23 माह के बच्चों में रोटावायरस वैक्सीन की तीनों खुराक का कवरेज 36.4 प्रतिशत से बढ़कर 85.4 प्रतिशत हो गया। एनएफएचएस-6 के आंकड़ों से साफ हो गया है कि पांच साल से कम उम्र के बच्चों में गंभीर डायरिया के मामलें पहले की तुलना में स्पष्ट रूप से कम हो गए हैं। खास बात यह है कि इससे भविष्य में बाल मृत्यु दर कम करने में मदद मिलेगी।
reduced diarrhea cases in india (Image Credit: chatgpt)
समय पर सही टीकाकरण न होना भी दस्त का कारण बन सकता है। बड़ी संख्या में दस्त के मामले कम करने के पीछे रोटावायरस वैक्सीन समेत अन्य जरूरी टीकों के व्यापक कवरेज की सबसे बड़ी भूमिका रही है। स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, इन्हीं कदमों ने बच्चों को संक्रमण से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। सरकार के मिशन इंद्रधनुष जैसे कार्यक्रमों ने भी टीकाकरण की पहुंच को बढ़ाने में मदद की है।
स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, डायरिया के मामलों में कमी लाने में जल जीवन मिशन और स्वच्छ भारत अभियान जैसी योजनाओं का एक बड़ा योगदान रहा है। मिशन के तहत ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में साफ पानी और बेहतर स्वच्छता सुविधाएं उपलब्ध हुई हैं। इससे जल जनित बीमारियों में कमी आई है। मंत्रालय द्वारा पेश किए गए आंकडों के अनुसार, पांच साल से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु दर में 38 प्रतिशत की कमी देखी गई है। यह आंकड़ा 2014 में प्रति 1,000 जीवित जन्मों पर 45 से घटकर 2024 में प्रति 1,000 जीवित जन्मों पर 28 हो गया है।
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वहीं, स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं ने ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन (ओआरएस) और जिंक सप्लीमेंट के उपयोग, स्तनपान, साबुन से हाथ धोने, पोषण जागरूकता और बीमारी के शुरुआती लक्षणों पर ही इलाज कराने की आदत को भी बढ़ावा दिया है, जिससे डायरिया के मामलों में यह कमी संभव हो पाई है। ओआरएस (ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन) और जिंक के उपयोग को लेकर लगातार बढ़ी जागरूकता ने डायरिया के उपचार को आसान बना दिया है। वहीं, स्वास्थ्य कर्मियों की सक्रिय भूमिका ने भी बच्चों तक समय पर इलाज मुहैया कराया है।
reduced cases of diarrhea india nfhs 6 data (Image Credit: chatgpt)
जानकारी की मानें तो डायरिया से होने वाली मौतों में कमी भारत के लिए बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य सफलता है। हालांकि, अभी भी दूर दराज और पिछड़े इलाकों में यह एक बड़ी स्वास्थ्य समस्या है, जिससे निपटना जरूरी है। स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, सरकार और स्वास्थ्य संस्थाओं के निरंतर प्रयासों से आने वाले वर्षों में बाल मृत्यु दर और भी कम होने की उम्मीद है। हालांकि यह छोटी लेकिन बड़ी उपलब्धि दर्शाती है कि सही नीतियों, बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं और जनभागीदारी के माध्यम से देश बच्चों के स्वस्थ भविष्य की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
डिसक्लेमर: इस लेख का उद्देश्य नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-6 के डेटा के अनुसार कुछ नई जानकारी देना है और इस लेख में दी गई किसी भी जानकारी का दावा thehealthsite.com नहीं करता है। इस लेख में दी गई किसी भी जानकारी का इस्तेमाल किसी भी बीमारी के इलाज के रूप में नहीं किया जाना चाहिए। इसके लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें।