
मुकेश शर्मा
मुकेश शर्मा दिल्ली यूनिर्विसिटी से जर्नलिज्म डिग्री होल्डर हैं और पिछले 8 साल से Health Journalism से जुड़े हुए ... Read More
Written By: Mukesh Sharma | Published : December 16, 2025 2:37 PM IST
Risk of Sinus Cancer in Hindi: आजकल की जनरेशन को क्या हो गया है? थोड़ा सा स्ट्रेस हुआ और चल दिए सुट्टा मारने! ऑफिस में काम का थोड़ा सा भी प्रेशर हुआ तो सुट्टा ब्रेक लेने चल देते हैं। ऐसा भी नहीं कि लोगों को इसके नुकसान का पता नहिीं है, बच्चे-बच्चे को पता है कि धूम्रपान यानी स्मोकिंग कैंसर के सबसे बड़े कारणों में से एक है। सिगरेट, बीड़ी, हुक्का, वेप या फिर धूम्रपान करने का कोई अन्य तरीका, इनमें से कोई भी सेफ नहीं है और कैंसर का कारण बन सकता है। इन चीजों का इस्तेमाल करने से कोई एक कैंसर नहीं बल्कि कई अलग-अलग कैंसर हो सकते हैं, जिनमें फेफड़ों का कैंसर, गले का कैंसर, मुंह या जीभ का कैंसर आदि शामिल है। साथ ही अगर आप स्मोकिंग करते समय एख गलती करते हैं, तो साइनस कैंसर होने का खतरा भी काफी ज्यादा बढ़ सकता है। यहां तक कि कुछ रिसर्च रिपोर्ट्स तो यह मानती हैं कि कुछ मामलों में स्मोकिंग करने से गले या मुंह के कैंसर से ज्यादा साइनस कैंसर होने का खतरा बढ़ जाता है। इस लेख में हम आपको इसी बारे में कुछ महत्वपूर्ण जानकारी देने वाले हैं।
आपने अक्सर साइनस नाम की बीमारी के बारे में सुना होगा, लेकिन वास्तव में साइनस शरीर का एक भाग है और इस भाग में होने वाली बीमारी को साइनसाइटिस कहा जाता है। साइनसाइटिस को लोग अक्सर आम बोलचाल की भाषा में साइनस ही बोल लेते हैं। साइनस एक थैलीनुमा संरचना है, जो माथे व गालों के पीछे होती है। साइनस हमारे श्वसन मार्गों से जुड़ी होती है।
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साइनस कई अलग-अलग काम करती है, लेकिन इसका प्रमुख काम बलगम बनाना होता है, जो रोगाणुओं को रोकने में मदद करता है। सर्दी-जुकाम के दौरान बनने वाला म्यूकस यानी बगलम साइनस द्वारा ही बनाया जाता है। इसके अलावा सांस के साथ अंदर ली गई हवा को गर्म व नम करने का काम भी साइनस का ही होता है।
स्मोकिंग करते समय धुएं के सबसे ज्यादा संपर्क में आने वाले अंग आमतौर पर फेफड़े, मुंह व गला है और कुछ हद तक इसके धुएं का असर साइनस तक जाता है। लेकिन कुछ लोगों की आदत सिगरेट पीकर धुएं को नाक से निकालने की होती है और इसमें धुआं साइनस में से होते हुए निकलता है। जैसा कि ऊपर बताया गया है कि साइनस थैलीनुमा संरचना है और उसमें म्यूकस भी होता है, ऐसे में कुछ धुआं साइनस में रह जाता है।
साइनस के अंदर धुआं रहना उसके लिए भी कैंसर के खतरे को काफी ज्यादा बढ़ा सकता है। साइनस में म्यूकस होने के कारण कुछ धुआं वहीं फंस जाता है और इस कारण से साइनस कैंसर होने का खतरा भी बढ़ जाता है। खासतौर पर जो लोग स्मोकिंग करते समय धुआं नाक से बाहर निकालते हैं, उनमें साइनस कैंसर होने का खतरा अपेक्षाकृत ज्यादा होता है।
हालांकि, रिसर्च के अनुसार साइनस कैंसर शरीर के कई प्रकार के कैंसर की तुलना में इसके मामले कम देखे गए हैं। इसे रेयर कैंसर यानी दुर्लभ कैंसर की श्रेणी में रखा गया है। लेकिन इस बात का ध्या रखना होगा कि जो लोग स्मोकिंग नहीं करते हैं, उनके लिए यह एक रेयर कैंसर है जबकि जो लोग स्मोकिंग करते हैं उनमें इसका खतरा बना रह सकता है।
स्मोकिंग करने वाले अगर कैंसर के खतरे को कम करना चाहते हैं, तो सबसे पहले उन्हें स्मोकिंग को पूरी तरह से छोड़ना होगा। क्योंकि दिनभर में एक सिगरेट पीना भी कैंसर का खतरे को बढ़ाता है और इसलिए इसे पूरी तरह से छोड़ना ही कैंसर के खतरे को कम करने में मदद कर सकता है। इसके अलावा जो लोग स्मोकिंग नहीं करते हैं, उन्हें प्रदूषण, हानिकार गैस व केमिकल आदि के संपर्क में आने से बचना चाहिए।
स्मोकिंग छोड़ने के लिए एक्सपर्ट्स की सलाह भी ली जा सकती है, अगर आप स्मोकिंग छोड़ना चाहते हैं तो अपने नजदीकी डॉक्टर से संपर्क करें। डॉक्टर आपको कुछ खास थेरेपी व जीवनशैली में बदलाव की सलाह दे सकते हैं जिन्हें अपनाकर आपको स्मोकिंग छोड़ने में काफी मदद मिल सकती है।
अस्वीकरण: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।