मानसून में घर की सीलन और फंगस सेहत पर डाल सकती है बुरा असर, इन रोगों का रहता है खतरा

सीलन और फंगस से भरी दीवारें जहां दिखने में बेकार और भद्दी लगती है उतनी ही सेहत के लिए भी नुकसानदायक होती है। मानसून के मौसम में कई तरह के संक्रमण होने का खतरा रहता है। ऐसे में जरा सी लापरवाही या नजरअंदाजगी किसी गंभीर बीमारी का कारण बन सकती है। इन्हीं में से एक है दीवारों की सीलन और फंगस। इन दिनों कोरोनावायरस के खतरे के चलते भी खुद को सेहतमंद रखना और घर को संक्रमणमुक्त रखना बेहद जरूरी हो गया है। आज हम आपको घर की सीलन और फंगस के कारण, खतरे और बचाव के तरीके बता रहे हैं।

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Written By: Rashmi Upadhyay | Updated : July 29, 2020 3:01 PM IST

मई-जून की तपती गर्मी के बाद जब मानसून की बारिश होती है तो वह मन को तो भाती ही है साथ ही मौसम की आबो हवा को भी बदल देती है। इस मौसम में रिमझिम बारिश के साथ चलने वाली ठंडी हवा वाकई मन को मोह लेती है। लेकिन मौसम का मजा तब किरकिरा हो जाता है जब घरों की दीवारें सीलन और फंगस से भर जाती हैं। सीलन और फंगस से भरी दीवारें जहां दिखने में बेकार और भद्दी लगती है उतनी ही सेहत के लिए भी नुकसानदायक होती है। मानसून के मौसम में कई तरह के संक्रमण होने का खतरा रहता है। ऐसे में जरा सी लापरवाही या नजरअंदाजगी किसी गंभीर बीमारी का कारण बन सकती है। इन्हीं में से एक है दीवारों की सीलन और फंगस। इन दिनों कोरोनावायरस के खतरे के चलते भी खुद को सेहतमंद रखना और घर को संक्रमणमुक्त रखना बेहद जरूरी हो गया है। आज हम आपको घर की सीलन और फंगस के कारण, खतरे और बचाव के तरीके बता रहे हैं।

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क्यों होती है सीलन और फंगस

बरसात का मौसम बहुत सेंसटिव होता है। इस समय जरा सी लापरवाही कई गंभीर परिणामों को भुगतने के लिए मजबूर कर सकती है। इस मौसम में कीटाणु और सूक्ष्मजीव की संख्या भी तेजी से बढ़नी और फैलती है। असल में सीलन और फंगस का कारण साफ सफाई की कमी, पानी के पानी का दीवार से सटा होना, थर्मल इंसुलेशन न होना और घर में वेंटिलेशन की कमी आदि सीलन और नमी पैदा करती हैं। इन सब चीजों के चलते दीवारों में सीलन और सफेद रंग का फंगस हो जाता है।

सेहत पर क्या नुकसान डालते हैं सीलन और फंगस

जब घर की दीवारे सीलन और फंगस से भर जाए तो समझ लें कि आपको अपने स्वास्थ्य के प्रति सावधान होने की जरूरत है। क्योंकि सीलन और फंगस के कारण अल्टरनारिया, एस्परजिलस, पेनिसिलियम और क्लोडोस्पोलियम जैसी फंगल प्रजातियां पनपने लगती हैं। इनसे अस्थमा, राइनाइटिस, खांसी, जुकाम, गले में दर्द, सिर में दर्द, थकान और जोड़ों में दर्द, एलर्जी और डर्मिटाइटिस का खतरा बढ़ जाता है।

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बचाव के तरीके

1. घर के जिस भी हिस्से में सीलन और फंगस की समस्या होती है वहां कीटनाशक छिड़काव और फ्यूमिगेशन करवाएं। इससे आपको संक्रमण पैदा करने वाले कीट और मच्छरों से भी छुटकारा मिलेगा।

2. जिस कमरे में सीलन या फंगस होता है वहां सोने से बचें।

3. अस्थमा या एलर्जी के मरीजों को सीलन वाली जगह से दूर रखें। क्योंकि इन्हें संक्रमण का खतरा रहता है।

4. किचन में सिंक के आसपास, वॉशबेसिन और बाथरूम में जहां पानी रुकता है उस जगह को सूखा रखने की कोशिश करें।

5. सप्ताह में किसी 1 दिन किचन की किसी अच्छे कीटनाशक से सफाई करें।

6. अगर घर में कोई ऐसी जगह है जहां प्राकृतिक रूप से धूप आ सकती है तो उसे जगह को खुला छोड़ें।

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