कलर ब्लाइंडनेस होने पर बच्चे लाल और हरे रंग में फर्क नहीं कर पाते, जानिए पूरे लक्षण और इलाज
Color Blindness in Children: कलर ब्लाइंडनेस बच्चों को भी होता है। इन तरीकों से आप पता लगा सकते हैं कि बच्चे को कलर ब्लाइंडनेस है या नहीं। आइए जानते हैं लक्षण और कारण (Color Blindness Symptoms and Prevention in hindi)
रंग हमारी जिंदगी को नई दिशा देने के साथ ही हमें ऊर्जा और आनंद से भी भरते हैं। क्या होगा जब आप रंगों को पहचान नहीं पाओगे? क्या आपने कभी ऐसी स्थिति का सामना किया है जब आपको अपनी आंखें तो सही लग रही है लेकिन आप रंगों को सही तरह से पहचान नहीं पा रहे हैं या रंगों के बीच अंतर करने में दिक्कत आ रही है? अगर हां, तो इसे कलर ब्लाइंडनेस कहते हैं। क्या होता है कलर ब्लाइंडनेस? (What is Color Blindness in hindi) ये एक ऐसी स्थिति होती है जब किसी इंसान को रंगों के बीच अंतर करने में दिक्कत आती है। ऐसा हर रंग के साथ नहीं होता है। बल्कि कुछ खास रंगों के बीच ही अंतर करने में परेशानी होती है। जिस व्यक्ति को कलर ब्लाइंडनेस (वर्णांधता) होता है उसके सामने अगर लाल, पीले, हरे और नीले रंग एक साथ रख दिए जाए तो रोगी को समझ नहीं आता कि यहां पर कौन-कौन से रंग हैं। छोटे बच्चों में अक्सर 5 साल की उम्र के बाद कलर ब्लाइंडनेस के लक्षण (Color Blindness symptoms in Children) दिखते हैं। पेरेंट्स को लगता है कि बच्चे जानबूझकर रंगों की बीच अंतर नहीं कर पा रहे हैं, जबकि ऐसा नहीं होता है। आज हम आपको कलर ब्लाइंडनेस के लक्षण, कारण और बच्चों में कलर ब्लाइंडनेस को कैसे चेक करें इसका तरीका बता रहे हैं। अगर इलाज की बात करें तो कलर ब्लाइंडनेस का कोई इलाज नहीं है। हालांकि कुछ ऐसी थेरेपी या कॉन्टैक्ट लेन्स आदि हैं जिनका इस्तेमाल डॉक्टर करते हैं।
बच्चों में कलर ब्लाइंडनेस के लक्षण (Color Blindness symptoms in Children in hindi)
- रंगों को पहचान न पाना या रंगों से संबंधित कोई एक्टिविटी हो रही है तो वहां जाने से मना करना
- ब्राइट कलर (लाल, गुलाबी, भूरा, संतरी, गहरा नीला और जामुनी आदि) देखने पर आंखों में धुंधलापन महसूस होना या दर्द होना
- किसी पेंटिंग में कलर करते वक्त गलत रंग भरना, जैसे बादलों में नीले की जगह पीला रंग भरना या पेड़ को हरा करने के बजाय लाल
- कर देना
- किसी कलर्ड शीट को पढ़ते वक्त दिक्कत महसूस करना
- हरे या लाल बैकग्राउंड पर रखी चीजों को देखने पर आंखों में जलन होना या सिर में दर्द होना
- क्रेयॉन या पैंसिल कलर में लाल और हरे रंग को बताने में बच्चे को परेशानी होना
बच्चों को क्यों होती है कलर ब्लाइंडनेस (Causes of Colour Blindness in Children in hindi)
- कोन सेल्स (cone cells) की कमी। क्या होती है कोन सेल्स? हमारी आंखों में मौजूद कोन सेल्स अलग-अलग रंगों जैसे लाल, नीले और हरे रंग को पहचानती है और इनके बीच का अंतर करती है। ये सेल्स अलग-अलग रंगों के बीच अंतर कर पाने में सक्षम होते हैं और फिर सही रंग क्या है इसका संदेश दिमाग तक जाता है। एम सामान्य बच्चे की आंखों में 3 कोन सेल्स होती हैं। लेकिन अगर किसी बच्चे को कलर ब्लाइंडनेस हो गया है तो उसकी आंखों में सिर्फ दो कोन सेल्स ही रह जाती हैं।
- ये रोग माता-पिता या जीन के द्वारा बच्चे को हो सकता है।
- अगर छोटी उम्र में बच्चे की आई सर्जरी हुई है तो भी कलर ब्लाइंडनेस की संभावना रहती है।
बच्चों में कलर ब्लाइंडनेस को कैसे चेक करें? (How to Test Colour Blindness in Children in hindi)
- एक शीट में कोई पेंटिंग बनाएं और उसके काफी सारे रंग भर दें। फिर खेल-खेल में बच्चों से रंगों के नाम पूछें।
- किसी पेपर पर 4-5 बॉक्स बना दें और फिर बच्चों को बोलें कि आज आप उनके साथ एक मजेदार गेम खेलने वाले हैं। फिर बच्चों को रंग का नाम बताएं और उसे भरने को कहें। इससे आपको पता चलेगा कि बच्चा लाल रंग कहने पर नीला रंग तो नहीं उठा रहा है।
- बच्चों के सामने 7-8 कलर पेंसिल रखें और फिर उनसे उनके रंग बताने का कहें।