
मुकेश शर्मा
मुकेश शर्मा दिल्ली यूनिर्विसिटी से जर्नलिज्म डिग्री होल्डर हैं और पिछले 8 साल से Health Journalism से जुड़े हुए ... Read More
Written By: Mukesh Sharma | Published : November 28, 2025 2:46 PM IST
Vitamin to Prevent Heart Attack: आजकल बढ़ते प्रदूषण और अवस्वस्थित लाइफस्टाइल की वजह से वैसे ही लोगों में हार्ट प्रॉब्लम बढ़ती जा रही हैं। लेकिन आज हम बात कर रहे हैं पहले नहीं सेकेंड हार्ट अटैक की, क्योंकि उन्हें खुद की अतिरिक्त देखभाल की जरूरत पड़ती है और आपकी एक गलती आपको दूसरा मौका नहीं देगी। विशेषज्ञ कहते हैं एक बार हार्ट अटैक आने के बाद दोबारा अटैक आने का खतरा बढ़ जाता है, इसलिए खासतौर पर हार्ट हेल्थ का ध्यान रखना जरूरी है। इसलिए जरूरी है कि डॉक्टर के द्वारा दी गई सभी जरूरी सलाह, दवाओं, लाइफस्टाइल बदलाव और नियमित जांच के साथ-साथ कुछ पोषक तत्व भी हृदय स्वास्थ्य को सहारा देते हैं। जिनमें से एक है, विटामिन डी। यह एक ऐसा पोषक तत्व है, जिस पर शोध यह संकेत देते हैं कि यह हृदय की कुछ प्रक्रियाओं को प्रभावित करता है। इस लेख में हम जानेंगे किस प्रकार विटामिन डी दूसरी बार हार्ट अटैक आने से रोकने में मदद करता है और इसके क्या फायदे हैं।
हार्ट अटैक दोबारा आने की मुख्य वजह धमनियों में सूजन का बढ़ना होता। विटामिन डी शरीर में एंटी-इन्फ्लेमेटरी प्रभाव पैदा कर आर्टरी में होने वाली सूजन को कम करने में मदद करता है। कम सूजन का सीधा सा मतलब है धमनियों की सुरक्षा और बेहतर रक्त प्रवाह, जो दिल के स्वास्थ्य के लिए जरूरी है।
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यह तो आप जानते ही हैं कि उच्च रक्तचाप सेकंड हार्ट अटैक का सबसे बड़ा कारण बनता है। कुछ शोध बताते हैं कि विटामिन डी शरीर की रेनिन-एंजियोटेंसिन प्रणाली पर असर डालता है और रक्तचाप को संतुलित रखने में सहायता करता है, जिससे आपके दिल को स्वस्थ रहने में मदद मिलती है।
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विटामिन डी के पर्याप्त स्तर गुड और बैड कोलेस्ट्रॉल का सही संतुलन बना रहता है। यह सही संतुलित कोलेस्ट्रॉल धमनियों को कम नुकसान पहुंचाता है, जिससे सेकंड हार्ट अटैक आने की संभावना काफी हद तक घट सकती है। इसलिए हाई कोलेस्ट्रॉल होने से बचाने के लिए भी विटामिन डी काफी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
शरीर में विटामिन डी की सही मात्रा हृदय की मांसपेशियों के सिकुड़ने और उन्हें मजबूत बनाए रखने में अहम भूमिका निभाती है। वहीं यह पोस्ट-हार्ट अटैक रिकवरी और दिल को बेहतर स्वास्थ्य की ओर लेकर जाती है। अगर शरीर को पर्याप्त मात्रा में विटामिन डी मिल रहा है, तो हार्ट मसल हेल्दी रहती हैं और कई कॉम्प्लिकेशन होने का खतरा काफी कम हो जाता है।
डायबिटीज रोगियों में दूसरा हार्ट अटैक आने का खतरा भी अधिक होता है। इस स्थिति में विटामिन डी इंसुलिन संवेदनशीलता में सुधार कर ब्लड शुगर को बैलेंस करता है, जिससे दिल बेहतर ढंग से कार्य कर पाता है। डायबिटीज के पेशेंट्स जिनका ब्लड शुगर कंट्रोल नहीं हो पा रहा है, तो उनके लिए विटामिन डी काफी फायदेमंद रहता है।
इस बात का ध्यान रखना भी जरूरी है कि विटामिन डी एक सप्लीमेंट है और यह किसी बीमारी का इलाज नहीं है बल्कि इलाज करने में मदद करता है। इसका ज्यादा मात्रा में सेवन करना भी स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है। इसलिए डॉक्टर से जांच कराएं और अगर शरीर में विटामिन डी कमी है तो उसके अनुसार ही विटामिन डी सप्लीमेंट का उपयोग करें।
अस्वीकरण: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।