इलियाना डिक्रूज को लगता है कि उन्‍हें हैं नींद में चलने की बीमारी, क्‍या सच में है ऐसा ?

बॉलीवुड अभिनेत्री ने शनिवार को एक ट्वीट में कहा कि उन्‍हें अब यह यकीन आने लगा है कि उन्‍हें नींद में चलने की बीमारी है, वरना उनके पैरों पर यह घाव कैसे होते हैं।

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Written By: Yogita Yadav | Published : September 14, 2019 7:03 PM IST

बॉलीवुड अभिनेत्री इलियाना डिक्रूज (Ileana D'Cruz) ने शनिवार को एक ऐसा ट्वीट किया (Sleep walking) जिसके बाद उनके फैंस उनकी चिंता करने लगे। अभिनेत्री ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर लिखा कि उन्‍हें लगता है कि उन्‍हें नींद में चलने की बीमारी (Sleep walking) हो गई है। वाकई ऐसा है। वरना सुबह उठकर उनके पैरों पर यह घाव कैसे होते हैं। हालांकि उन्‍होंने इसके लिए तीन विकल्‍प भी दिए। पर उनके इस ट्वीट के बाद से उनके फैन्‍स उनके लिए चिंतित होने लगे हैं।

फैन्‍स दे रहे हैं सुझाव  

इलियाना के फैन्‍स उन्‍हें सोशल मीडिया पर तरह तरह के सुझाव दे रहे हैं। कुछ तो इस पर इलियाना से सवाल-जवाब भी कर रहे हैं, जबकि कुछ फैन्‍स को यह भूतों की करतूत भी लगती है। पर क्‍या आप जानते हैं कि नींद में चलना वाकई एक बीमारी होती है। आइए जानते हैं इसके लक्षण और उपचार।

क्‍या है नींद में चलने की बीमारी

स्लीपवाकिंग यानी नींद में चलना एक  खतरनाक बीमारी है। हालांकि इससे ग्रसित ज्‍यादातर लोग हिंसक नहीं होते पर कई बार इससे उन्‍हें गंभीर खतरे उठाने पड़ सकते हैं। इसे मनोवैज्ञानिक बीमारियों की श्रेणी में रखा जाता है। इसमें व्‍यक्ति सोते समय भी बिस्‍तर से उठकर उसी तरह चलने लगता है जैसे लोग सामान्‍य अवस्‍था में चलते हैं। क्‍योंकि व्‍यक्ति सो रहा होता है तो उसे जागने के बाद यह ध्‍यान ही नहीं होता कि उसने रात में यानी सोते समय क्‍या किया।

मस्तिष्‍क विकार भी है

इसे सोमनाबुलिज्म की समस्‍या भी कहा जाता है। भारत में छोटे बच्‍चों में यह बीमारी ज्‍यादा पाई जाती है। जबकि मानसिक रूप से परेशान, तनावग्रस्‍त और पुअर मेंटल हेल्‍थ वाले वयस्‍कों में भी कई बार यह समस्‍या देखने में आती है। यह तंत्रिका-तंत्र से संबंधित विकार के कारण होता है। कुछ वयस्‍क पुरुषों में यह बिस्‍तर पर पेशाब करने से भी जुड़ जाती है।

sleep walking, sleep walking disease, sleep walking symptoms, sleep walking treatment, Ileana D'Cruz sleep walking disease. अमूमन यह हल्‍की नींद की अवस्‍था में समस्‍या होती है। कुछ बच्‍चे बिस्‍तर पर उठकर बैठ जाते हैं, जबकि कुछ सीधे चलना शुरू कर देते हैं। वयस्‍क लोग अपने काम निपटाने लगते हैं। कुछ लोग दरवाजे का लॉक खोलने, कपड़े बदलने और खाना खाने जैसे काम भी करने लगते हैं। ©Shutterstock

स्‍लीपवॉकिंग के लक्षण

अमूमन यह हल्‍की नींद की अवस्‍था में समस्‍या होती है। कुछ बच्‍चे बिस्‍तर पर उठकर बैठ जाते हैं, जबकि कुछ सीधे चलना शुरू कर देते हैं। वयस्‍क लोग अपने काम निपटाने लगते हैं। कुछ लोग दरवाजे का लॉक खोलने, कपड़े बदलने और खाना खाने जैसे काम भी करने लगते हैं। यह स्‍लोवेव स्‍लीप के समय होता है। जब व्‍यक्ति गहरी नींद में नहीं होता। इसकी अवधि पंद्रह मिनट भी हो सकती है। पर कई बार लो दो घंटे से भी ज्‍यादा देर तक इस अवस्‍था में रह सकते हैं।

स्‍लीपवॉकिंग का उपचार

ऐसी समस्‍या होने पर जरा भी लापरवाही नहीं करनी चाहिए। शुरूआत में स्‍लीप हाइजीन पर ध्‍यान देकर हम इस समस्‍या पर काबू कर सकते हैं। पर मामला ज्‍यादा गंभीर हो जाने पर डॉक्‍टर से उपचार के लिए संपर्क करना चाहिए। वरना मरीज की सुरक्षा के लिए खतरे हो सकते हैं।

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