अगर आपके आसपास है किसी को डिप्रेशन, तो इस तरह करें उसकी मदद

विशेषज्ञ बताते हैं कि अगर अवसाद से ग्रसित व्‍यक्ति की मदद न की जाए तो वह आत्‍महत्‍या जैसा मुश्किल कदम भी उठा लेता है। इसलिए अगर आपको महसूस हो कि आपके आसपास भी कोई ऐसा व्‍यक्ति है, जो अवसाद से घिर गया है तो इस तरह अवसाद से बाहर आने में आप उसकी मदद कर सकते हैं।

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Written By: Editorial Team | Published : March 13, 2019 9:37 PM IST

काम के बढ़ते बोझ और अकेलेपन के बढ़ जाने के कारण आजकल लोगों में तनाव आम हो गया है। पर जब इस तनाव को हम किसी के साथ शेयर नहीं कर पाते तो यही बढ़ते बढ़ते अवसाद का रूप ले लेता है। कई बड़ी हस्तियां ऐसी हैं जिन्‍हें अवसाद ने अपना शिकार बना लिया। विशेषज्ञ बताते हैं कि अगर अवसाद से ग्रसित व्‍यक्ति की मदद न की जाए तो वह आत्‍महत्‍या जैसा मुश्किल कदम भी उठा लेता है। इसलिए अगर आपको महसूस हो कि आपके आसपास भी कोई ऐसा व्‍यक्ति है, जो अवसाद से घिर गया है तो इस तरह अवसाद से बाहर आने में आप उसकी मदद कर सकते हैं।

खुश रखें

डिप्रेशन कोई दुख अवस्था नहीं, बल्कि खुद एक दुख है। किसी फ्लू या बुखार की तरह ये कहीं से भी और कभी भी बाहर आ सकता है, और आपको जकड़ सकता है। हालांकि इस बात को सोचने का एक और तरीका है, समझ लें कि आपका दोस्त डिप्रेशन के साथ एक अपमानजनक रिश्ते में फंसा है और आप उसकी निम्न स्थितियों को समझ सकते हैं। डिप्रेशन ने आपके दोस्त के सामाजिक जीवन को अपंग कर दिया है और उसके दोस्तों से उसे दूर कर दिया है। अब वो उसके जीवन में सब कुछ अधिक तनावपूर्ण बना रहा है, वो अब खुद को शक की निगाह से देखने लगा है, और सब कुछ मुश्किल हो गया है। डिप्रेशन ने आपके दोस्त को हस हद तक पहुंचा दिया है जहां उसके लिये सब कुछ बेमानी हो गया है। आपको इस स्थिति को मझते हुए ही काम करना है।

मरीज से कोई डिमांड न करें

जब कोई इंसान डिप्रेशन से जूझ रहा होता है तो उसे किसी भी प्रकार की बंदिश और भी भड़का देती है। तो उनके सामने मांगे रखने या अल्टिमेटम देने आदि से बचें। उनके लेट-बैक एटिट्यूड से तंग आकर उन्हें धमकी देने, कि आप उनसे दूर हो जाएंगे, उन्हें वक्त दें। थोड़ा वक्त उनका अकेले और थोड़ा अपने साथ। ध्यान रहे, इतिहास गवाह है कि सच्चे प्यार से आप कुछ भी जीत सकते हैं।

पैम्पर करना न भूलें

किसी की भावनाओं को समझने के लिये आपको सच्चे मन से उसे समझना होगा। बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि इंसान की इंसानियत केवल तभी जागती है, जब वह जीवन से हारने लगता है। ज्यादातर इंसानों में दुख को जाने बिना परिपक्वता नहीं आती। अगर आपको उदासी के बारे में पता है और आपको पीड़ा का भी अहसास है, तो बस उसी स्थिति में आप एक परिपक्व इंसान बन सकते हैं। वरना न तो कभी आप यह समझ पाएंगे कि आपके साथ क्या हो रहा है, और न ही कभी आप जान पाएंगे कि आसपास के लोगों के साथ क्या घटित हो रहा है। बिना दर्द को जाने कभी आपको करुणा का अहसास नहीं होता।

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