क्या आपको दिवाली बीतने का दुख हो रहा है? आपको है यह मानसिक बीमारी

क्या आपके दिमाग में अभी भी दिवाली का खुमार है? जानिए आपको क्या करना चाहिए!

WrittenBy

Written By: Editorial Team | Published : October 26, 2017 6:37 PM IST

दिवाली का फेस्टिवल खत्म हो गया है। पांच दिन तक चले इस फेस्टिवल को लेकर लोग काफी उत्साहित थे। एक हफ्ते पहले जिस तरह की खुशी और उत्साह का माहौल था अब वो नहीं है। अब सब कुछ पहले की तरह नॉर्मल हो गया है और लोगों ने पहले की तरह काम पर जाना शुरू कर दिया है। जाहिर है इससे कई लोग दुखी होते हैं। इस स्थिति को पोस्ट-फेस्टिवल डिप्रेशन यानी त्यौहार के बाद होने वाला तनाव कहा जाता है।

पोस्ट-फेस्टिवल डिप्रेशन क्या है?

नागपुर के साइकेट्रिस्ट अविनाश जोशी के अनुसार, जब कोई बड़ा फेस्टिवल जैसे दिवाली या क्रिसमस बीत जाता है, तो अचानक अजीब बात हो जाती है। लोग उस फेस्टिवल के बारे में सोचने लग जाते हैं कि उन्होंने उस दौरान खूब एन्जॉय किया और अब उन्हें पहले की तरह वास्तविकता का सामना करना पड़ेगा। जब वो नॉर्मल कामकाज करने लगते हैं, तो उन्हें वो खुशी के पल याद आते हैं।

दिवाली में लोग खुश रहते हैं, अच्छा खाते-पीते हैं और खूब एन्जॉय करते हैं। इससे उनकी उनके मनोदशा में सुधार होता है। जैसा कि प्रकृति का नियम है, जो कुछ आता है, वो जाता भी है। फेस्टिवल खत्म होने के बाद उन्हें समझ नहीं आता है कि वो क्या करें। उन्हें लगता है खुशी का समय खत्म हो गया है। यह वैसा ही होता है जैसे लोग संडे की शाम को इसलिए परेशान होने लगते हैं कि अगले दिन से उन्हें काम के लिए जाना पड़ सकता है।

पोस्ट-फेस्टिवल डिप्रेशनकिन लोगों को होता है?

डॉक्टर के अनुसार, शांत और रचनात्मक मानसिकता वाले लोग शायद ही इस स्थिति का शिकार होते हैं। ऐसे लोग किसी भी ऐसी घटना से उत्साहित या परेशान नहीं होते हैं। वास्तव में यह स्थिति सोजने-समझने की क्षमता से जुड़ी हुई है। जो लोग साइक्लोथैमिया (Cyclothymia) से पीड़ित होते हैं, उन्हें फेस्टिवल के बाद उदासी होती है। यह एक प्रकार का मनोदशा संबंधी विकार है जिसमें व्यक्ति तनाव महसूस करता है। इससे उसे निर्णय लेने में परेशानी, एकाग्रता की समस्याएं, खराब स्मृति, कम आत्मसम्मान, निराशा और चिड़चिड़ापन महसूस होता है।

इस दूसरा स्टेज हाइपोमैनिक है जिसमें ऐसे लोग खुश, आशावादी, उत्तेजित, आक्रामक और अतिसंवेदनशील होते हैं।

इससे बचने के लिए क्या करना चाहिए?

  • ऐसे लोगों को मेडिकेशन और कॉन्जिटिव बेहवियर के रूप में साइकियाट्रिक इंटरवेंशन की जरूरत हो सकती है। इसके अलावा आपको इन बातों का ध्यान रखना चाहिए।
  • ध्यान केंद्रित करने के तकनीकों के जरिये अपने दिमाग पर बेहतर नियंत्रण रखने की कोशिश करें।
  • आत्म-जागरूक होने और धैर्य को विकसित करने का प्रयास करें।
  • बाहरी घटनाएं आपको परिभाषित नहीं करती हैं। खुशी आपके भीतर होती है।
  • आपका दिमाग आपका उपकरण है। इसलिए आपको अपने दिमाग पर कंट्रोल होना चाहिए।

Read this in English

अनुवादक – Usman Khan

चित्र स्रोत - Shutterstock

Add The Health Site as a Preferred Source Add The Health Site as a Preferred Source