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50% कम हो जाएगा कैंसर का जोखिम, डॉक्टर ने बताया सच

Reduce Cancer Risk: हम में से कई लोग ऐसे होंगे जो सिर्फ इस डर से कैंसर की जांच नहीं करवाते होंगे, कि कहीं सच में Cancer न हो और हम मर न जाएं! लेकिन अगर आप सही रहते डॉक्टर की बताई बातों पर ध्यान दें तो कैंसर होने से रोका जा सकता है।

50% कम हो जाएगा कैंसर का जोखिम, डॉक्टर ने बताया सच
VerifiedVERIFIED By: Dr. Arun Kumar Giri

Written by Vidya Sharma |Published : February 18, 2026 11:42 AM IST

Cancer Ka Risk Kaise Kam Kare: कैंसर एक ऐसी बीमारी है जो किसी भी उम्र के व्यक्ति को हो सकती है और समय पर इलाज न होने पर जानलेवा बन सकती है। लेकिन हमें कब पता चलेगा कि कैंसर की चपेट में आ गए हैं या फिर अगर नहीं भी आए हैं तो खुद को कैंसर होने से कैसे बचा सकते हैं?आकाश हेल्थकेयर के सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट और डायरेक्टर डॉक्टर अरुण कुमार गिरी बताते हैं कि

'कैंसर आज के समय में एक गंभीर बीमारी है, लेकिन अच्छी बात यह है कि कई प्रकार के कैंसर से बचाव संभव है। अगर लाइफस्टाइल में सही बदलाव किए जाएं तो कैंसर का खतरा 40–50 प्रतिशत तक कम किया जा सकता है।'

वह आगे कहते हैं कि 'कैंसर अचानक नहीं होता। यह कई वर्षों में धीरे-धीरे विकसित होता है। अगर हम जोखिम कारकों को कम कर दें और समय-समय पर जांच कराते रहें, तो बड़ी हद तक इसे रोका जा सकता है।' यह कारक कौन से हैं और आप कौन सी सावधानियां बरतकर खुद को व अपने परिवार वालों को कैंसर होने से बचा सकते हैं? आज हम आपको इसी विषय पर विस्तार से बताने वाले हैं।

पहले जानें कैंसर किन कारणों से होता है?

कैंसर तब होता है जब शरीर की कोशिकाएं अनियंत्रित रूप से बढ़ने लगती हैं। कैंसर होने के कई प्रमुख कारण हैं जैसे- तंबाकू और धूम्रपान, शराब का अधिक सेवन, असंतुलित और जंक फूड से भरपूर आहार, मोटापा और शारीरिक निष्क्रियता, प्रदूषण और हानिकारक रसायनों के संपर्क में आना, कुछ वायरस जैसे एचपीवी और हेपेटाइटिस बी, परिवार में कैंसर का इतिहास आदि। डॉक्टर बताते हैं, 'हर कैंसर का कारण एक जैसा नहीं होता, लेकिन जीवनशैली से जुड़े कारक सबसे बड़े कारणों में से हैं।'

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क्या हम कैंसर होने से रोक सकते हैं?

एक्सपर्ट के अनुसार कैंसर को पूरी तरह रोक पाना हमेशा संभव नहीं, लेकिन जोखिम काफी हद तक कम किया जा सकता है। इसके लिए ये कदम जरूरी हैं- 

तंबाकू मुक्त जीवन

अगर आप कैंसर के जोखिम से बचना चाहते हैं और स्मोक करते हैं तो तुरंत ही सिगरेट, बीड़ी, गुटखा और पान मसाला आदि खाना छोड़ दें। यह सभी मुंह, गले और फेफड़ों के कैंसर का मुख्य कारण बनते हैं। डॉक्टर ने बताया कि तंबाकू छोड़ने से कुछ ही वर्षों में जोखिम काफी कम हो जाता है।

हेल्दी डाइट

आपका सही खानपान ही आपको स्वस्थ शरीर देता है। इसलिए आप अपनी डाइट पर फोकस करें और हरी सब्जियां, फल, साबुत अनाज और फाइबर युक्त भोजन लें। प्रोसेस्ड मीट और अत्यधिक तला-भुना भोजन कम करें, यह स्टमक इंफेक्शन तो बढ़ाते हैं और गैस से जुड़ी तमाम समस्याओं का कारण भी बनते हैं। खासकर आज के दौर में अधिक मात्रा में मिलने वाले 'पैकेट बंद' फूड्स तो कैंसर की बड़ी वजह बन रहे हैं।

शारीरिक गतिविधि

आलस ही हमारे स्वस्थ शरीर का सबसे बड़ा दुश्मन है। इसलिए रोज कम से कम 30 मिनट की तेज चाल से चलना या हल्का व्यायाम कैंसर समेत कई बीमारियों का खतरा घटाता है। वॉक करने की आदत को अपने डेली रूटीन का हिस्सा बनाएं। ऐसा इसलिए क्योंकि मोटापा कैंसर का एक बड़ा साइलेंट कारण है। शरीर के एक्टिव रहने से मेटाबॉलिज्म सही रहता है और इंसुलिन लेवल कंट्रोल में रहता है।

शराब की मात्रा सीमित करें

शराब पीने से लिवर तो खराब होता ही है, साथ ही स्तन और अन्य कैंसर का खतरा भी बढ़ता है। लेकिन कई लोग सोचते हैं कि सिर्फ थोड़ी सी शराब सेहत के लिए ठीक ही रहती है, लेकिन कैंसर के मामले में ऐसा नहीं है। खासकर यह महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर के खतरे को भी बढ़ाता है। इसलिए कोशिश करें कि या तो आप पूरी तरह से ड्रिंक करना बंद कर दें या फिर बहुत ही कम मात्रा में पिएं।

नियमित स्क्रीनिंग और टीकाकरण

कैंसर बढ़ने से रोकना है तो पहले ही इसे पकड़ना बहुत जरूरी होता है। इसलिए महिलाओं को सर्वाइकल कैंसर की जांच और एचपीवी टीका लगवाना चाहिए। हेपेटाइटिस बी का टीका भी लिवर कैंसर से बचाव में मदद करता है। जैसे बचपन में पोलियो का टीका लगाया जाता था, वैसे ही अब कैंसर के भी टीके मौजूद हैं, जिन्हें आप लगवा सकते हैं।

वहीं स्क्रीनिंग की बात करेें तो 40 की उम्र के बाद साल में एक बार फुल बॉडी चेकअप या डॉक्टर की सलाह पर मैमोग्राफी और पैप स्मीयर टेस्ट जरूर करवाना चाहिए। यह इसलिए क्योंकि अगर बीमारी पहले स्टेज पर होगी और पकड़ में आ जाएगी तो इसका इलाज करना संभव हो पाएगा।

नींद और तनाव नियंत्रण

पर्याप्त नींद और तनाव कम रखना भी शरीर की प्रतिरोधक क्षमता मजबूत करता है। दूसरे शब्दों में कहें तो जब हम सोते हैं, तो हमारा शरीर 'सर्विसिंग' मोड पर होता है। लेकिन अगर आप कम सोते हैं या बहुत ज्यादा तनाव लेते हैं, तो शरीर की मरम्मत का काम रुक जाता है। तनाव से हमारे सेल्स जल्दी बूढ़े और डैमेज होने लगते हैं। योग या गहरी सांस लेने वाली एक्सरसाइज इसमें जादू की तरह काम करती हैं।

डॉक्टर का कहना है, 'अगर कोई व्यक्ति धूम्रपान छोड़ दे, वजन नियंत्रित रखें और नियमित जांच कराए, तो कई प्रकार के कैंसर का खतरा लगभग आधा हो सकता है।'

क्या कैंसर छूने से फैलता है?

नहीं। कैंसर किसी को छूने, साथ बैठने, खाना खाने या खून देने से नहीं फैलता। यह संक्रामक बीमारी नहीं है। डॉक्टर स्पष्ट करते हैं, 'कैंसर से पीड़ित व्यक्ति से सामान्य संपर्क पूरी तरह सुरक्षित है। समाज में फैली यह गलतफहमी मरीजों को मानसिक रूप से और अधिक परेशान करती है।' यानी कि अगर घर के किसी व्यक्ति को कैंसर है तो पीड़ित के साथ रहने, उनके साथ खाना खाने, उनके बर्तन इस्तेमाल करने या उन्हें गले लगाने से आपको कैंसर नहीं होगा।

बल्कि इस दौरान कैंसर के मरीज को अपनों के साथ और प्यार की सबसे ज्यादा जरूरत होती है। हां, कुछ गिने-चुने कैंसर ऐसे होते हैं जो किसी खास वायरस जैसे कि HPV या हेपेटाइटिस)की वजह से हो सकते हैं और यह वायरस एक से दूसरे में जा सकते हैं। लेकिन इस बात का ध्यान रखें कि कैंसर खुद कभी नहीं फैलता है।

कौन-सी गलतियां कैंसर की संभावनाओं को बढ़ाती हैं?

तंबाकू का लगातार सेवन- आपका अधिक मात्रा में तंबाकू खाना या रोज खाना कैंसर होने के चांस को बढ़ाता है।

मोटापा और व्यायाम की कमी- अगर आप व्यायाम नहीं करते हैं यह मोटापे का कारण बनता है। मोटापा शरीर में कई बीमारियां लाता है, यहां तक कि कैंसर भी।

जांच में देरी करना- अक्सर ब्रेस्ट पर लम्प दिखने या अन्य कैंसर के लक्षण दिखने पर हम डर जाते हैं और कैंसर की जांच को टाल देते हैं। यह छोटी सी गलती शरीर में बने कैंसर को बढ़ाती है। ऐसी गलती बिल्कुल न करें। डरे नहीं, जांच कराएं, पॉजिटिव आने पर सही इलाज लें।

शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज करना- कुछ लोग डर की वजह से अपने लक्षणों को अनदेखा कर देते हैं। उन्हें डर होता है कि अगर कैंसर हुआ तो वह मर जाएंगे। लेकिन अब कैंसर का इलाज संभव है और समय रहते इसे ठीक भी किया जा सकता है।

बिना डॉक्टर की सलाह के दवाइयों का इस्तेमाल- कई बार मरीज कैंसर के लक्षणों को जानते हुए भी अनदेखा और किसी अन्य बीमारी का सिम्पटम समझ लेते हैं। ऐसे में वह बिना डॉक्टर की सलाह के आम दवाइयां लेना शुरु कर देते हैं, जो आगे चलकर समस्या पैदा कर सकती है।

बार-बार प्रोसेस्ड और जला हुआ खाना खाना- आपका बार-बार और रोजाना बंद डिब्बे वाला और जंक फूड खाना पेट के कैंसर को पैदा कर सकता है, स्टमक इंफेक्शन बना सकता है और गैस्ट्रोएंटेराइटिस पैदा कर सकते हैं। एक्सपर्ट के अनुसार, छोटी-छोटी लापरवाहियां लंबे समय में गंभीर परिणाम दे सकती हैं।

घर पर कैंसर की जांच कैसे करें?

कुछ कैंसर के शुरुआती संकेत घर पर भी पहचाने जा सकते हैं। हम आपको 3 कैंसर के प्रकार के बारे में बताने वाले हैं, जिन्हें आप घर पर ही ट्रैक कर सकते हैं। हालांकि, बता दें कि यह डॉक्टर की जांच का विकल्प नहीं है।

  1. स्तन कैंसर:

महिलाओं में स्तन कैंसर के मामले सबसे अधिक देखे जाते हैं, फिर चाहे वह जिस भी उम्र की हों। इसलिए महिलाओं को सलाह दी जाती है कि वह हर महीने स्वयं स्तन परीक्षण(Self Breast Exam) करें। वहीं अगर इस दौरान कोई गांठ, त्वचा में बदलाव या असामान्य स्राव दिखे तो तुरंत डॉक्टर के पास जाएं। बेहतर होगा कि आप हर महीने अपने पीरियड्स खत्म होने के 3-5 दिन बाद खुद जांच करें। ब्रेस्ट कैंसर से जुड़ी बातें ग्राफिक में दी गई हैं।

सेल्फ ब्रेस्ट एग्जाम करते समय किन बातों का ध्यान दें?

  • कहीं कोई सख्त गांठ (lump) महसूस होना
  • स्किन में कहीं खिंचाव या खुरदरापन
  • निप्पल अंदर की तरफ धंसना या उनमें से बिना वजह डिस्चार्ज होना
  1. मुंह का कैंसर:

आईने के सामने मुंह, जीभ और मसूड़ों को देखें। कोई सफेद या लाल दाग, घाव जो दो हफ्ते में न भरे, या दर्द हो तो जांच कराएं। तंबाकू सेवन करने वालों को विशेष सावधानी रखनी चाहिए।

ध्यान देने योग्य बातें- 

  • मुंह के अंदर कोई सफेद या गहरे लाल रंग का धब्बा होना, जो रगड़ने से भी न हटे।
  • लंबे समय से मुंह में हो रहा छाला या घाव
  • मुंह खोलने में दिक्कत होना
  • बिना किसी वजह के दांतों का ढीला हो जाना।
  1. स्किन कैंसर का पता कैसे करें?

अगर आपको त्वचा पर कोई नया तिल, शेप या कलर में बदलाव, या ऐसा घाव जो ठीक न हो रहा हो, तो इसे हल्के में न लें। डॉक्टर कहते हैं कि 'घर पर जांच केवल शुरुआती संकेत पकड़ने में मदद करती है। सही निदान और इलाज के लिए विशेषज्ञ से मिलना जरूरी है।' इसे चेक करने का सबसे आसान तरीका है ABCDE रूल। आइए आपको इसके बारे में विस्तार से बताते हैं 

  1. A (Asymmetry)- क्या तिल का आधा हिस्सा दूसरे आधे जैसा नहीं दिख रहा?
  2. B (Border)- क्या उसके किनारे टेढ़े-मेढ़े या धुंधले हैं?
  3. C (Color)- क्या एक ही तिल में कई रंग (काला, भूरा, लाल) नजर आ रहे हैं?
  4. D (Diameter)- क्या उसका साइज पेंसिल के पीछे वाली रबर (6mm) से बड़ा हो रहा है?
  5. E (Evolving)- क्या वह वक्त के साथ बढ़ रहा है, उसमें खुजली हो रही है या खून निकल रहा है?

आखिर में एक्सपर्ट ने यही सलाह दी कि 'जागरूकता, स्वस्थ जीवनशैली और समय पर जांच ही कैंसर से बचाव की सबसे बड़ी कुंजी है। सही कदम उठाकर हम अपने और अपने परिवार के स्वास्थ्य की बेहतर सुरक्षा कर सकते हैं।'

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Disclaimer: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।