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Written By: Editorial Team | Published : November 17, 2017 6:22 PM IST
हम में से ज्यादातर लोग हेल्दी खाना खाते हैं, जिम जाते हैं, हर दिन एक्सरसाइज करते हैं लेकिन जब ब्लड टेस्ट करने जाते हैं तो टेस्ट के रिपोर्ट में या तो प्रीडायबिटीक (ब्लडग्लूकोज़ के लेबल एकदम बॉडर लाइन पर) मिलता है या डायबिटीज है ये मिलता है। तब सवाल ये उठता है कि गलती कहां हो रही है? क्यों भारत में डायबिटीक मरीजों की संख्या दिन-ब-दिन बढ़ रही है? क्या ये आनुवांशिक कारणों से हो रहा है? डॉ. प्रदीप गाडगे, डायबिटोलॉजिस्ट,श्रेया डायबिटीज सेंटर, मुम्बई ने इस संदर्भ में प्रकाश डाला है।
क्यों भारत में डायबिटीज की संख्या आज भी बढ़ रहा है?
डॉ. प्रदीप गाडगे के अनुसार जेनेटिक्स समान होता है। कोई भी बीमारी तीन स्तर से गुजरती है- एजेन्ट, होस्ट और परिवेश होता है। सालों के बाद भी एजेन्ट और होस्ट दोनों समान होते हैं। एक चीज जो बदलता वह है परिवेश। लेकिन दिन भर बैठकर काम करने वाले जीवनशैली के कारण स्ट्रेस, डिप्रेशन, कम नींद और पैकेज्ड फूड ज्यादा खाने के कारण और लोगो से कम मिलने के कारण ये बीमारी का खतरा ज्यादा होता है।
अगर आपको रोज एक्सरसाइज करने की आदत है और अपने सेहत को लेकर बहुत सचेत रहते हैं तो भी अगर डायबिटीज हो जाता है। तब सवाल उठता है कि ऐसा क्यों हुआ? उदाहरण के तौर पर आप एक घंटे तक रोजाना एक्सरसाइज करते हैं लेकिन जितनी नींद की ज़रूरत है उतना नहीं सो पाते और दिन भर सोशल मीडिया पर समय बिताते हैं तो एक्सरसाइज का कोई फायदा नहीं मिल पाता है। उसी तरह अगर आपका मेटाबॉलिज्म सही है लेकिन आप हमेशा स्ट्रेस में रहते हैं, जंक फूड ज्यादा खाते हैं तो मेटाबॉलिज्म हाई होने पर भी नेगेटिव इफेक्ट से बच नहीं पायेंगे। असल में हेल्दी लाइफस्टाइल शब्द का अर्थ बहुत बड़ा होता है उसके अंदर पर्याप्त नींद, सही डायट, एक्सरसाइज, हमेशा खुश रहना आदि सब कुछ आता है। इसलिए एक्टिव लाइफस्टाइल हेल्दी लाइफस्टाइल का अंग होने के बावजूद डायबिटीज को रोकने के लिए पर्याप्त नहीं होता है।
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अनुवादक: Mousumi Dutta
चित्र स्रोत: Shutterstock
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