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हाइपरसोमनिया एक ऐसा डिसऑर्डर है, जो ज्यादातर दिन की नींद या सोने में जरूरत से ज्यादा समय व्यतीत करने की वजह से होता है। यह एक ऐसी स्थिति होती है, जिसमें व्यक्ति को दिन के दौरान जागने में काफी परेशानी होती है। हाइपरसोमनिया वाले लोग किसी भी समय सो सकते हैं। जैसे काम पर या जब वो गाड़ी चला रहे हों। उन्हें नींद से जुड़ी अन्य समस्याएं भी हो सकती हैं। जिनमें एनर्जी की कमी और स्पष्ट रूप से कुछ भी सोचने में परेशानी शामिल है। नेशनल स्लीप फाउंडेशन के मुताबिक 40 फीसदी लोगों में समय-समय पर हाइपरसोमनिया के कुछ लक्षण होते हैं।
हाइपरसोमनिया के कई संभावित कारण हैं, वो कारण क्या हैं, चलिए जान लेते हैं:
अगर आप दिन के दौरान लगातार नींद या आलस सा महसूस करते हैं, तो आप अपने डॉक्टर से संपर्क करें। हाइपरसोमनिया का निदान करने में आपका डॉक्टर आपको आपकी सोने की आदतों के बारे में सवाल करेंगे। जैसे आप रात में कितनी नींद लेते हैं, क्या आप रात में जागते हैं, और क्या आप दिन में सोते हैं आदि। आपका डॉक्टर आपसे यह भी जानना चाहेगा कि, क्या आपको कोई इमोशनली समस्या हो रही है, या कोई ऐसी दवा ले रहे हैं, जो आपकी नींद में बाधा डाल रही हो।
इसके अलावा डॉक्टर ब्लड टेस्ट, सीटी स्कैन और पॉलीसोम्नोग्राफी नाम का स्लीप टेस्ट सहित कुछ और जरूरी टेस्टों को करवाने की सलाह दे सकता है। कुछ मामलों में एक अतिरिक्त ईईजी टेस्ट जो दिमाग की इलेक्ट्रिक गतिविधियों को मापने में मदद करता है, उसकी जरूरत भी पड़ सकती है।
हाइपरसोमनिया का इलाज करने के लिए आपका डॉक्टर आपको कई तरह की दवाओं को लिख सकता है। जिसमें उत्तेजक, एंटीडिप्रेसेंट के साथ कई नई दवाओं जैसे प्रोविजील, वाकिक, एक्सएम और जायव देने की सलाह दे सकता है।
हाइपरसोमनिया का सही इलाज और अच्छा इलाज किसी अच्छे सायकाइट्रिस्ट से करना चाहिए। इसके अलावा आपको अपनी डाइट का भी खास ध्यान रखने की जरूरत होगी। साथ ही मेडिटेशन भी जरुर करना चाहिए। एक्सपर्ट्स के मुताबिक इस तरह की समस्याओं में विल पॉवर का मजबूत होना सबसे ज्यादा जरूरी होता है।