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हो सकता है कि यह लेख पढ़ते समय आप कुर्सी पर बैठे हों और, अगर आप भी उन लोगों में से हैं जिनका अधिकांश समय अपने टीवी या कंप्यूटर स्क्रीन के सामने बीतता हैं, तो यह लेख केवल आपके लिए है। जी हां, एक गतिहीन जीवन शैली न केवल आपके शरीर की मुद्रा या पोस्चर को प्रभावित करता है बल्कि जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों का खतरा भी आपके लिए काफी बढ़ा देता है। कल्याण के फोर्टिस अस्पताल में आर्थोपेडिक और आर्थोस्कोपी सर्जन, डॉ. स्वप्निल झांबरे, कुछ टिप्स बताते हैं कि कैसे बहुत समय तक सोफे या कुर्सी में धंसे रहने से आपकी हड्डियां और आपका स्वास्थ्य प्रभावित हो सकता है।
दिन-प्रतिदिन के मामूली काम जैसे कि लिफ्ट के बजाय सीढ़ियों से जाने के बारे में हम कभी नहीं सोचते। हम आमतौर पर एक कुर्सी पर 6 घंटे से अधिक समय तक बैठे रहते हैं, और ऐसा करके, हम मांसपेशियों को कमजोर बनाने और हड्डियों के विकास में गड़बड़ी बढ़ाते हैं, जिससे जोड़ों और हड्डियों की बीमारियां बढ़ जाती हैं। इतना ही नहीं, निष्क्रिय रहनेवाले व्यक्ति के वयस्क जीवन में उसकी मांसपेशियों का वजन 20%-40% कम हो जाता है। इसके अलावा, गतिहीन जीवनशैली जीने से वृद्धावस्था की प्रक्रिया प्रभावित होती है, यही कारण है कि सक्रिय रहनेवाले लोग लगातार बैठे रहनेवाले लोगों की तुलना में ज़्यादा जवान दिखते हैं।
एक गतिहीन जीवन हड्डियों को कैसे प्रभावित करता है?
अधिकांश शिकायतें अक्सर थोड़ी अधिक उम्र के वयस्कों को आती हैं, जो गठिया या जोड़ों से जुड़ी किसी अन्य बीमारी से पीड़ित हैं, और इसकी वजह से उन्हें अपने रोज़मर्रा के जीवन में छोटे-मोटे कार्य करने में भी परेशानी होने लगती है। भोजन बनाना, सब्ज़ी-राशन खरीदना, दवाएं लेने और पैसे का प्रबंध करना तथा बुनियादी कार्य जैसे कमरे में घूमना, स्नान करना और ड्रेसिंग कठिन हो जाती है। इसके अलावा, ऐसे वयस्क जो अपनी अधिकतम शारीरिक क्षमता में अपनी मांसपेशियों का उपयोग नहीं करते हैं, आगे चलकर उनकी मांसपेशियों को काम करने में बहुत दिक्कत आ सकती है। एक गतिहीन जीवन जीनेवाले वयस्कों के जोड़ों (घुटने-कोहनी) में अक्सर सूजन की समस्या होती है। कुछ अधिक उम्र के वयस्कों में गठिया और ऑस्टियोपोरोसिस ( osteoporosis) की शुरुआत के साथ, चलने-फिरने जैसे कामों के लिए भी दूसरों की मदद निर्भर करना पड़ता है।
डॉ. स्वप्निल झांबरे के अनुसार, "निष्क्रिय और गतिहीन जीवन एक व्यक्ति के समग्र स्वास्थ्य में बाधा डाल सकता है। ख़राब जीवन शैली वाले युवा वयस्क 40 वर्ष के बाद एक मुश्किलभरा जीवन जीते हैं। ख़राब जीवन शैली का एक और प्रभाव जोड़ों को नुकसान के रुप में देखा जा सकता है। हालांकि गठिया या अर्थराइटिस (arthritis) बुढ़ापे से जुड़ी समस्या माना जाता है, लेकिन इन दिनों बहुत से कम उम्र वयस्कों में यह समस्या देखी जा रही है और पीड़ितों की संख्या में वृद्धि हो रही है। एक व्यक्ति की बैठने की स्थिति जोड़ों को हानि पहुंचाने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है जो अंततः जोड़ों में गड़बड़ी के रुप में देखी जाती है। मांसपेशियों की मज़बूती इन लोगों में कम ही देखी जाती है।"
उचित शारीरिक गतिविधियों के बिना, हड्डियां कमजोर हो जाती हैं और इस प्रकार आसानी से फ्रैक्चर हो सकता है। तो वहीं लगातार शारीरिक गतिविधि हड्डियों को मजबूत बनाने और ऑस्टियोपोरोसिस और जोड़ों की अन्य बीमारियों को रोकने में मदद करती है।
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अनुवादक-Sadhana Tiwari
चित्रस्रोत-Shutterstock