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क्या आपका बच्चा इस मानसून कुछ ज्यादा ही चुपचाप या चिड़चिड़ा नजर आ रहा है? मानसून जहां एक ओर ठंडी हवा और हरियाली लेकर आता है, वहीं हर किसी के लिए यह मौसम खुशी का कारण नहीं बनता। अगर आपका बच्चा ज्यादा शांत रहने लगा है, बेचैनी महसूस करता है या बिना वजह घबराया हुआ लगता है, तो यह केवल मामूली मूड स्विंग नहीं हो सकता- बल्कि नारायणा हेल्थ एसआरसीसी चिल्ड्रन हॉस्पिटल की बाल एवं किशोर मनोरोग विशेषज्ञडॉ शोरूक मोटवानी ने बताया कि यह सीजनल अफेक्टिव डिसऑर्डर जैसे लक्षण हो सकते हैं, जो आमतौर पर ठंडे देशों में सर्दियों के दौरान देखने को मिलता है।
डॉक्टर ने बताया कि बारिश के दिनों में बाहर खेलने-घूमने की आजादी कम हो जाती है और धूप भी बहुत कम मिलती है, जिससे बच्चों के मन-मिजाज पर असर पड़ सकता है। ऐसे में उनका चिड़चिड़ा या उदास महसूस करना असामान्य नहीं है। ये भावनाएं बिलकुल वास्तविक हैं और समझने योग्य भी। लेकिन चिंता की बात नहीं है- थोड़ी समझदारी, ध्यान और सहयोग से आप अपने बच्चे की मानसिक सेहत का अच्छे से ख्याल रख सकते हैं।
इस लेख में हम मानसून के मौसम में मानसिक स्वास्थ्य पर चर्चा कर रहे हैं। लगातार बादल छाए रहना और दिन भर बारिश होना सिर्फ हमारे वातावरण को ही नहीं, हमारे मूड को भी प्रभावित करता है। ऐसे में जरूरी है कि हम बच्चों और पूरे परिवार के लिए पहले से तैयार रहें।
बारिश या बादलों से ढके दिन पर मन भारी हो जाना या धूप दिखते ही मूड का बेहतर हो जाना सिर्फ संयोग नहीं है। वैज्ञानिक शोध यह बता चुके हैं कि धूप, वायुदाब और नमी जैसे प्राकृतिक कारक हमारे मूड और मानसिक स्थिति को गहराई से प्रभावित करते हैं। धूप हमारे शरीर में सेरोटोनिन नामक 'फील गुड' केमिकल को बढ़ाती है, जिससे मूड अच्छा रहता है और ध्यान केंद्रित रहता है। वहीं, जब दिन छोटे और अंधेरे होते हैं, तो मेलाटोनिन का स्तर बढ़ जाता है, जिससे थकान, सुस्ती और उदासी महसूस हो सकती है।
बरसात या तूफान से पहले अक्सर एयरप्रेशर में गिरावट आती है, जो मूड बदलने और सिरदर्द से जुड़ी होती है। तेज गरज और बिजली जैसे अचानक मौसम बदलाव कई लोगों में बेचैनी बढ़ा सकते हैं, क्योंकि इनसे इंद्रियों पर ज्यादा दबाव पड़ता है। हालांकि कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जिन्हें बारिश की रिमझिम बहुत सुकून देती है।
ज्यादा नमी यानी ह्यूमिडिटी भी चिड़चिड़ापन बढ़ा सकती है और सोचने-समझने की गति को धीमा कर सकती है। एवॉल्यूशनरी बायोलॉजी के अनुसार, हमारे दिमाग ने हजारों सालों में खुद को इस तरह ढाला है कि वह पर्यावरण से मिलने वाले संकेतों पर प्रतिक्रिया दे सके। यही वह विशेषता थी जिसने हमारे पूर्वजों को मौसम की मार से बचाए रखा।
मौसम में बदलाव का सीधा असर हमारे मन और मिज़ाज पर पड़ता है। सर्दियों या बरसात के महीनों में जब आसमान लगातार धुंधला और भारी रहता है, तब कई लोगों में उदासी के लक्षण दिखाई देने लगते हैं। इसे मौसमी अवसाद या सीज़नल डिप्रेशन कहा जाता है। धूप की कमी से मस्तिष्क में मौजूद रसायनों का संतुलन बिगड़ जाता है, जिससे मूड बार-बार बदलता है, ऊर्जा घटती है और नींद में भी बाधा आती है। कई बार व्यक्ति बिना किसी कारण के थका-थका और निराश महसूस करता है।
ऐसे समय में दिन की रोशनी में कुछ समय बिताना, संतुलित आहार लेना और नियमित रूप से शारीरिक रूप से सक्रिय रहना काफी मददगार साबित हो सकता है। यह समझना जरूरी है कि धूप की कमी और मानसिक उदासी के बीच एक सीधा संबंध होता है। जब इस संबंध को पहचाना जाए, तो मानसून से जुड़ी मनोदशा को समझना और संभालना दोनों आसान हो जाता है।
मौसम में बदलाव का सीधा असर हमारे मन और मिजाज पर पड़ता है। सर्दियों या बरसात के महीनों में जब आसमान लगातार धुंधला और भारी रहता है, तब कई लोगों में उदासी के लक्षण दिखाई देने लगते हैं। इसे मौसमी अवसाद या सीज़नल डिप्रेशन कहा जाता है। धूप की कमी से मस्तिष्क में मौजूद रसायनों का संतुलन बिगड़ जाता है, जिससे मूड बार-बार बदलता है, ऊर्जा घटती है और नींद में भी बाधा आती है। कई बार व्यक्ति बिना किसी कारण के थका-थका और निराश महसूस करता है।
ऐसे समय में दिन की रोशनी में कुछ समय बिताना, संतुलित आहार लेना और नियमित रूप से शारीरिक रूप से सक्रिय रहना काफी मददगार साबित हो सकता है। यह समझना जरूरी है कि धूप की कमी और मानसिक उदासी के बीच एक सीधा संबंध होता है। जब इस संबंध को पहचाना जाए, तो मानसून से जुड़ी मनोदशा को समझना और संभालना दोनों आसान हो जाता है।
जहां मानसून कई लोगों के लिए तनाव या उदासी लेकर आता है, वहीं इसके कुछ शांत करने वाले और मन को भाने वाले पहलू भी हैं, जो बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर सकारात्मक असर डाल सकते हैं-
मानसून ब्लूज़ यानी बारिश में होने वाली उदासी कोई भ्रम नहीं, एक हकीकत है। लेकिन कुछ छोटे-छोटे कदमों से आप अपने बच्चे को इस मौसम से बेहतर ढंग से उबरने में मदद कर सकते हैं-
मानसून का मौसम सिर्फ भीगने या बंद कमरे में बैठे रहने का नहीं है। यह बच्चों को प्रकृति को महसूस करने, उसकी आवाज़ों को सुनने और हर बूंद में खुशी ढूंढने का मौसम भी हो सकता है। उन्हें सिखाएं कि बारिश सिर्फ भीगने का नहीं, मुस्कुराने का भी मौसम है।
मन अशांत या परेशान होने के कई कारण हो सकते हैं, जिनमें तनाव, चिंता, अवसाद, हार्मोनल असंतुलन, और जीवनशैली से संबंधित कारक शामिल हैं।
मानसिक स्वास्थ्य को ठीक करने के लिए, नियमित रूप से व्यायाम करना, पर्याप्त नींद लेना, तनाव का प्रबंधन करना, सामाजिक संबंध बनाए रखना, और जरूरत पड़ने पर पेशेवर मदद लेना महत्वपूर्ण है।
मौसम में परिवर्तन शरीर पर शारीरिक प्रभाव डाल सकता है, जिसमें हार्मोन के स्तर में परिवर्तन , नींद में खलल और मस्तिष्क रसायन पर प्रभाव शामिल है - ये सभी खराब मानसिक स्वास्थ्य में योगदान कर सकते हैं।