
विद्या शर्मा
विद्या शर्मा को डिजिटल मीडिया में लगभग 3 साल का अनुभव है। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता ... Read More
Written By: Vidya Sharma | Published : May 12, 2026 8:30 AM IST
Medically Verified By: Dr. Malini Saba
प्रेग्नेंसी और मेंटल हेल्थ
प्रेग्नेंसी सिर्फ शरीर में होने वाला बदलाव नहीं है, बल्कि यह एक महिला की भावनाओं, सोच और मानसिक स्थिति को भी गहराई से प्रभावित करती है। इस दौरान हार्मोनल बदलाव, भविष्य की चिंता, शारीरिक थकान, रिश्तों में बदलाव और नई जिम्मेदारियों का एहसास कई बार तनाव, डर, मूड स्विंग्स या अकेलेपन की भावना पैदा कर सकता है। इसलिए गर्भावस्था में शारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी बेहद जरूरी है।
साइकोलॉजिस्ट और महिला एवं मानवाधिकारों की समर्थक डॉ. मालिनी सबा बताता हैं कि प्रेग्नेंसी में हर समय खुश महसूस करना जरूरी नहीं है। कई महिलाएं इस दौरान चिंता, डर, चिड़चिड़ापन या उदासी महसूस करती हैं। अपनी भावनाओं को स्वीकार करें और उन्हें दबाने की कोशिश न करें। अपने पार्टनर, परिवार या किसी भरोसेमंद व्यक्ति से खुलकर बात करें। भावनाएं साझा करने से मन हल्का होता है और मानसिक तनाव कम होता है। आइए हम इसे थोड़ा विस्तार से और अन्य बिंदुओं के साथ जानते हैं।
नींद की कमी मानसिक स्वास्थ्य पर सीधा असर डालती है। प्रेग्नेंसी में शरीर को अधिक आराम की जरूरत होती है। नियमित नींद लेने की कोशिश करें और खुद पर जरूरत से ज्यादा काम का दबाव न डालें। अगर मन बेचैन रहता हो, तो सोने से पहले हल्का संगीत, मेडिटेशन या गहरी सांस लेने की तकनीक मदद कर सकती है।
हर महिला की प्रेग्नेंसी अलग होती है। सोशल मीडिया या दूसरों के अनुभव देखकर खुद को जज करना तनाव बढ़ा सकता है। अपने शरीर और अपनी यात्रा को स्वीकार करें। यह जरूरी नहीं कि हर किसी का अनुभव एक जैसा हो।
संतुलित भोजन, हल्की एक्सरसाइज, योग या वॉक मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद करते हैं। डॉक्टर की सलाह के अनुसार प्रेग्नेंसी योग या ब्रीदिंग एक्सरसाइज करने से तनाव कम हो सकता है और मन शांत रहता है।
कई महिलाएं प्रेग्नेंसी के दौरान खुद से बहुत ज्यादा उम्मीदें रखने लगती हैं। याद रखें, अच्छी मां बनने के लिए परफेक्ट होना जरूरी नहीं है। खुद के प्रति दयालु रहें और अपनी सीमाओं को समझें।
अगर लगातार उदासी, घबराहट, डर, रोने का मन, नींद की समस्या या किसी काम में रुचि कम होने जैसी समस्याएं लंबे समय तक बनी रहें, तो मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ या डॉक्टर से सलाह लेने में हिचकिचाएं नहीं। समय पर मदद लेना कमजोरी नहीं, बल्कि जागरूकता की निशानी है।
प्रेग्नेंसी के दौरान सिर्फ बच्चे के बारे में नहीं, बल्कि खुद के बारे में भी सोचें। किताब पढ़ना, पसंदीदा संगीत सुनना, प्रकृति में समय बिताना, पेंटिंग या कोई हॉबी अपनाना मानसिक शांति देने में मदद कर सकता है।
डिस्क्लेमर- एक स्वस्थ और खुशहाल प्रेग्नेंसी के लिए मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखना उतना ही जरूरी है जितना शारीरिक स्वास्थ्य का। खुद को समझना, आराम देना, भावनाओं को स्वीकार करना और जरूरत पड़ने पर मदद लेना इस सफर को ज्यादा सकारात्मक और संतुलित बना सकता है। क्योंकि जब मां मानसिक रूप से स्वस्थ होती है, तो उसका असर बच्चे पर भी सकारात्मक रूप से पड़ता है।