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Smartwatch Se Heart Rate Kaise Dekhe: तेजी से दौड़ती इस दुनिया में ऐसी कई नई-नई तकनीकें आ गई हैं, जो मेडिकल लाइफ को और भी बेहतर बनाने का काम कर रही हैं। इन्हीं तकनीकों में से एक है स्मार्ट वॉच, जिसका इस्तेमाल न सिर्फ समय देखने के लिए किया जाता है, बल्कि उसमें आप बीपी, हार्ट रेट, पल्स, स्टैप और न जाने कितनी जानकारी का पता लगा सकते हैं। इस वर्ल्ड हार्ट डे पर हम आपको बताएंगे कि कैसे आप स्मार्ट वॉच के जरिए अपने दिल की देखभाल कर सकते हैं।
आप तक इस विषय पर पूरी जानकारी पहुंचाने के लिए धर्मशिला नारायणा हॉस्पिटल के कार्डियोलॉजिस्ट डॉक्टर समीर कुब्बा से बात ही। उनके जाना कि स्मार्ट वॉच से हार्ट हेल्थ केयर कैसे कर सकते हैं। उन्होंने जवाब देते हुए कहा कि ‘स्मार्ट वॉच ने हार्ट हेल्थ की बेहतर देखभाल करने में एक प्रभावशाली भूमिका निभाई है। ये उपकरण न सिर्फ समय बताने वाले साधन हैं बल्कि हृदय से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जानकारियों की निगरानी कर स्वास्थ्य को नियंत्रित करने में मददगार साबित हो रहे हैं।’ आइए हम विस्तार से जानते हैं डॉक्टर ने क्या-क्या जानकारियां दीं।
स्मार्ट वॉच में लगे हार्ट रेट सेंसर फोटो प्लेथिस्मोग्राफी तकनीक का उपयोग करते हैं, जो कलाई की नली से रक्त प्रवाह में होने वाले परिवर्तन के आधार पर हर मिनट की हृदय गति मापते हैं। इससे दिल की सामान्य और असामान्य धड़कनों का पता चलता है। अनियमित धड़कन या अन्य असामान्यताओं पर स्मार्ट वॉच अलर्ट देती है, जिससे समय रहते चिकित्सीय सलाह ली जा सकती है।
कुछ उन्नत स्मार्टवॉच ईसीजीरिकॉर्डिंग की सुविधा देती हैं, जो दिल की विद्युत सक्रियता को मापती है। यह फीचर एट्रियल फाइब्रिलेशन जैसी अनियमितताओं का शीघ्र पता लगाने में मदद करता है। ऐसे अनियमित हार्ट बीट जो गंभीर हृदय रोग के संकेत हो सकते हैं, स्मार्ट वॉच के माध्यम से पहले ही जाना जा सकता है।
स्मार्टवॉच SpO2 सेंसर से रक्त में ऑक्सीजन स्तर की मात्रा मापती हैं, जो फेफड़ों और हृदय के स्वास्थ्य का संकेत होती है। यह फीचर सांस की विभिन्न समस्याओंसे ग्रस्त लोगों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है और हृदय रोग के जोखिम को कम करने में सहायक होता है।
स्मार्टवॉच शारीरिक गतिविधियों जैसे चलने के कदम, खर्च कैलोरी, व्यायाम की अवधि आदि को ट्रैक करती है। नियमित व्यायाम और सक्रिय जीवन शैली हृदय स्वास्थ्य के लिए जरूरी होते हैं। स्मार्टवॉच के दैनिक डेटा से व्यक्ति अपनी गतिविधि पर नियंत्रण रख सकता है और स्वास्थ्य लक्ष्यों को पूरा कर सकता है।
अच्छी नींद हृदय स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है। स्मार्टवॉच नींद की अवधि और गुणवत्ता की निगरानी करता है, जिससे नींद में खलल की समस्याएंआसानी से पहचानी जा सकती हैं। अच्छी नींद तनाव एवं रक्तचाप को नियंत्रित करती है, जो हृदय रोग से बचाव में मददगार हैं।
स्मार्टवॉच हृदयाघात या गंभीर कार्डियक स्थितियों का निदान नहीं कर सकतीं, लेकिन वे प्रारंभिक लक्षणों की पहचान कर सावधानी अपनाने में सहायक हैं। किसी भी असामान्यता, जैसे सीने में दर्द, सांस फूलना या बार-बार बेहोशी की स्थिति में तुरंत चिकित्सा सहायता लेना आवश्यक है। सेंसर की सीमित सटीकता को ध्यान में रखते हुए इनके डेटा पर पूरी तरह निर्भर न रहना ही बेहतर है।
स्मार्टवॉच से प्राप्त स्वास्थ्य डेटा डॉक्टरों को रोगी की हृदय स्वास्थ्य की वास्तविक स्थिति समझने और बेहतर इलाज की योजना बनाने में मदद करता है। इससे उपचार अधिक प्रभावी और व्यक्तिगत बन पाता है।
स्मार्टवॉच आज हृदय स्वास्थ्य की बेहतर देखभाल के लिए एक महत्वपूर्ण उपकरण बन चुकी हैं। हार्ट रेट, ईसीजी, ब्लड ऑक्सीजन, नींद और फिटनेस ट्रैकिंग जैसी खूबियां दिल की सुरक्षा को बढ़ावा देती हैं। इन्हें नियमित और सही तरीके से उपयोग में लाकर हृदय रोगों के जोखिम को कम किया जा सकता है। हालांकि, किसी भी स्वास्थ्य समस्या पर डॉक्टर से परामर्श करना आवश्यक है। स्मार्टवॉच तकनीक को अपनी जीवनशैली में शामिल कर हृदय की चुस्त-दुरुस्ती सुनिश्चित की जा सकती है।
इस प्रकार हृदय विशेषज्ञों के अनुसार स्मार्ट वॉच के उचित उपयोग से हृदय की बेहतर देखभाल संभव होती है और यह स्वस्थ जीवन की दिशा में एक सशक्त कदम है।
Disclaimer: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।
75 वर्ष की उम्र के बाद, हार्ट डिजिज रोग के मरीजों में महिलाओं की संख्या अधिक होती है।
हार्ट पेशेंट को नियमित रूप से 30-35 मिनट की वॉक जरूर करना चाहिए। इससे हृदय स्वास्थ्य में सुधार होता है।
हार्ट पेशेंट को हेल्दी लाइफस्टाइल को फॉलो करना चाहिए। हेल्दी डाइट लें और रेगुलर एक्सरसाइज जरूर करें। हार्ट की रेगुलर चेकअप जरूर कराएं।
हृदय से होने वाली कोई भी बीमारी जैसे हार्ट अटैक, हार्ट का रुक जाना (हार्ट फेलियर) और धमनियों से जुड़ी बीमारी आदि