
मुकेश शर्मा
मुकेश शर्मा दिल्ली यूनिर्विसिटी से जर्नलिज्म डिग्री होल्डर हैं और पिछले 8 साल से Health Journalism से जुड़े हुए ... Read More
Written By: Mukesh Sharma | Published : May 27, 2026 8:18 PM IST
Medically Verified By: Dr. Kapil Gupta
emergency care tips (Image Credit: Chatgpt)
हेल्थ इमरजेंसी कभी भी और किसी को भी हो सकती है और यह कोई चेतावनी देकर नहीं आती बल्कि कहीं भी कभी भी हो सकती है और फर्क नहीं पड़ता आप घर पर आराम कर रहे हैं, सड़क पर चल रहे हैं या फिर किसी सार्वजनिक स्थान पर हैं। हार्ट अटैक, स्ट्रोक, दुर्घटना, सांस लेने में अचानक दिक्कत, हीट स्ट्रोक या अचानक बेहोश होकर गिरने जैसी मेडिकल इमरजेंसी में पहले कुछ मिनट बहुत महत्वपूर्ण होते हैं। मेडिकल इमरजेंसी के वक्त आसपास खड़े लोग मेडिकल केयर पहुंचने तक मरीज की मदद कर सकते हैं। दुर्घटना, हार्ट अटैक, स्ट्रोक एवं अन्य जानलेवा स्थितियों के दौरान मरीज को जीवित रखना बहुत जरूरी होता है और खासतौर पर जब तक एंबुलेंस या अन्य मेडिकल प्रोफेशनल हेल्प नहीं आती तब तक यह आसपास लोगों की जिम्मेदारी बनती है कि जरूरतमंद व्यक्ति को जीवित रखने के लिए जो जरूरी और उचित है वह किया जाए। कई बार इमरजेंसी इसलिए गंभीर हो जाती है क्योंकि लोग घबरा जाते हैं, वो लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं या मदद लेने में देर कर देते हैं। इसलिए लक्षणों को तुरंत पहचानना जरूरी होता है क्योंकि तुरंत कार्रवाई से जान बचने की संभावना काफी बढ़ जाती है। डॉ. कपिल गुप्ता, एचओडी एवं कंसल्टेंट इमरजेंसी मेडिसिन, मणिपाल हॉस्पिटल, द्वारका, नई दिल्ली ने इस बारे में कई महत्वपूर्ण जानकारियां दी हैं।
मेडिकल इमरजेंसी एक बेहद क्रिटिकल कंडीशन होती है और इसलिए हर किसी को इस बारे में जरूरी जानकारी होनी चाहिए जैसे कि लक्षणों की सही पहचान करना। मेडिकल इमरजेंसी के कुछ लक्षण जिन्हें इग्नोर नहीं करना चाहिए जैसे -
अगर इस तरह के लक्षण महसूस हो रहे हैं, तो यह गंभीर और एक इमरजेंसी हेल्थ कंडीशन को का संकेत है, जिसकी पहचान हर किसी को होनी चाहिए। ताकि समय पर मरीज का इलाज शुरू करके उसकी जान बचाई जा सके।
इमरजेंसी के दौरान किसी व्यक्ति की जान कैसे बचाई जाती है आदि का पता लगाने के लिए कुछ खास बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है -
तुरंत मेडिकल इमरजेंसी को कॉल करें- इमरजेंसी के समय कभी भी निर्णय लेने में देर ना करें। सीने में अचानक दर्द, सांस लेने में तकलीफ, बहुत अधिक ब्लीडिंग होने, दौरा पड़ने या बेहोशी आने पर तुरंत डॉक्टर को कॉल करें।
सीपीआर सीखें - कार्डियेक अरेस्ट पड़ने पर कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (CPR) देकर मेडिकल सपोर्ट आने तक मरीज को जीवित रखा जा सकता है। सीपीआर के बेसिक जानकारी से कई जानें बच सकती हैं।
स्ट्रोक के लक्षणों को तुरंत पहचान - स्ट्रोक के लक्षणों को तुरंत पहचानना बहुत जरूरी होता है। इसके लिए ‘फास्ट’ (FAST) शब्द याद रखें।
ब्लीडिंग को रोकें - तेजी से बहते खून को हथेली से दबाकर बंद करें, इससे मेडिकल सहायता पहुँचने तक ज्यादा खून नहीं बहेगा।
हार्ट अटैक के असामान्य लक्षणों नजरंदाज न करें - जरूरी नहीं कि हार्ट अटैक पड़ने पर हमेशा ही सीने में तेज दर्द महसूस हो। जबड़े में दर्द, मितली, पसीना आना, चक्कर आना और कलाईयों या पीठ में दर्द महसूस होना भी हार्ट अटैक का लक्षण हो सकता है।
इमरजेंसी के वक्त धैर्य बनाकर रखें - घबराहट से निर्णय लेने में देर हो सकती है। इसलिए इमरजेंसी के वक्त शांत रहें। मरीज को आरामदायक स्थिति में रखें और इमरजेंसी के निर्देशों का सतर्कता से पालन करें।
इमरजेंसी के समय ‘‘गोल्डन आवर’’ का बहुत अधिक महत्व हो जाता है। यह गंभीर चोट या मेडिकल इमरजेंसी शुरू होने के बाद पहले एक घंटे का समय होता है। इस समय में तुरंत इलाज मिल जाए, तो मुश्किलें कम करने और इलाज के नतीजों को बेहतर बनाने में काफी मदद मिलती है।
हार्ट अटैक, स्ट्रोक, गंभीर चोट, दम घुटने, जहर निगलने और हीट स्ट्रोक जैसी गंभीर स्थितियों में इलाज तुरंत शुरू होना बहुत जरूरी होता है। अगर हार्ट अटैक पड़ने पर इलाज में देर की जाएगी, तो हार्ट की मांसपेशियां क्षतिग्रस्त हो सकती हैं। अगर स्ट्रोक के मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिलेगा, तो मस्तिष्क के महत्वपूर्ण हिस्से प्रभावित हो सकते हैं। इसी प्रकार, गंभीर चोट के मरीजों का तुरंत इलाज शुरू नहीं किया गया, तो उनकी हालत बहुत बिगड़ सकती है।
मेडिकल इमरजेंसी कभी भी और कहीं भी हो सकती है। इस स्थिति में जटिलताओं को रोकने और जान बचाने में शुरुआती लक्षणों को पहचानना, बेसिक फर्स्ट एड स्किल्स को जानना और तुरंत कार्रवाई करना बहुत महत्वपूर्ण होता है। आम लोग भी तुरंत कार्रवाई और फर्स्ट एड की मदद से मेडिकल सहायता पहुंचने तक मरीज को जीवित रख सकते हैं।
डिसक्लेमर: इस लेख का उद्देश्य केवल इमरजेंसी कंडीशन से जुड़ी सही जानकारी देना है और इसमें दी गई किसी भी जानकारी का इस्तेमाल किसी भी बीमारी के इलाज के रूप में नहीं किया जाना चाहिए। इसके लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।