ठंड में सांस क्यों फूलती है? डॉक्टर बता रहे हैं इससे बचने के उपाय

breathing issues : सर्दियों में सांस फूलने की परेशानी काफी ज्यादा होती है। इसके पीछे क्या कारण हैं आइए डॉक्टर से समझते हैं और इस परेशानी से कैसे खुद को सुरक्षित रख सकते हैं?

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Written By: Kishori Mishra | Updated : February 19, 2026 10:05 AM IST

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Medically Verified By: Dr. Shachi Pandit

सर्दियां लगभग खत्म हो चुकी हैं। फिलहाल सिर्फ सुबह-शाम की ठंड बची हुई है। इस बदलते मौसम में स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देने की जरूरत होती है। क्योंकि अचानक ठंड और गर्म मौसम के कारण लोग काफी ज्यादा बीमार पड़ने लग जाते हैं। खासकर अचानक से आई बारिश की वजह से ठंड जब बढ़ जाती है, तो लोगों को काफी परेशानी होने लगती है। क्योंकि हम इस ठंड के जोखिमों से बचने के लिए पहले से तैयार नहीं रहते हैं। अचानक से मौसम में बदलाव के कारण लोगों को सांस से जुड़ी तकलीफें होने लगती हैं। ऐसे में डॉक्टर का कहना है कि ठंड के कारण देश भर के अस्पतालों में पल्मोनोलॉजिस्ट सांस लेने में दिक्कत वाले मरीज़ों से भरे रहते हैं।

अहमदाबाद के नारायणा हॉस्पिटल, के कंसल्टेंट पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. शची पंडित का कहना है कि अचानक आए मौसम में गिरावट के कारण मरीजों की स्थिति इतनी ज्यादा गंभीर हो जाती है कि उन्हें ICU में भर्ती करना पड़ जाता है। मौसम में आई अचानक से गिरावट के कारण लोगों को अस्थमा अटैक, क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिज़ीज़ (COPD) जैसी परेशानी बढ़ने का खतरा रहता है। इसके अलावा निमोनिया जैसे गंभीर सांस के इन्फेक्शन बढ़ सकते हैं। 

ठंड में क्यों होती है सांस से जुड़ी परेशानी?

डॉक्टर का कहना है कि ठंडी हवा पहले से मौजूद सांस की बीमारियों जैसे अस्थमा या फेफड़ों की पुरानी बीमारियों को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाती है। सांस लेने पर ठंड हवाएं सांस की नली को सिकोड़ सकती है, जिससे सांस लेना बहुत मुश्किल हो जाता है। इसके साथ ही एयर पॉल्यूशन और घर के अंदर एलर्जी पैदा करने वाली चीज़ों का लेवल भी बढ़ जाता है, क्योंकि लोग कम वेंटिलेशन के साथ ज़्यादा समय घर के अंदर बिताते हैं। ये सब मिलकर पहले से ही कमज़ोर फेफड़ों पर दबाव और बढ़ाते हैं।

कई मरीज़ जो आमतौर पर साल के बाकी समय में ठीक रहते हैं, उन्हें एक्यूट ब्रोंकाइटिसहो सकता है, जिससे ठंड में अचानक सांस लेने में दिक्कत और खांसी जैसे लक्षण दिखते हैं। ठंडी हवा, खराब एयर क्वालिटी और घर के अंदर के पॉल्यूटेंट के संपर्क में आने से अक्सर सांस फूलना, खांसी और सीने में जकड़न होती है।

ठंड में इन्फेक्शन हो जाते हैं एक्टिव

डॉक्टर एक और चिंता बताते हैं कि सोए हुए इन्फेक्शन फिर से एक्टिव हो जाते हैं। सर्दियों में इम्यूनिटी कम हो जाती है, और देर से मेडिकल मदद मिलने पर सांस के इन्फेक्शन तेज़ी से बढ़ जाते हैं। जो हल्की खांसी या ज़ुकाम से शुरू हो सकता है, वह निमोनिया या रेस्पिरेटरी फेलियर में बदल सकता है, खासकर बुज़ुर्ग मरीज़ों और जिन्हें पहले से फेफड़ों की कोई बीमारी है।

देर से देखभाल समस्याओं की गंभीरता का एक बड़ा कारण है। ज़्यादातर मरीज़ घर पर ही लक्षणों को मैनेज करने की कोशिश करते हैं, यह मानकर कि सर्दियों में सांस फूलना आम बात है। अक्सर मरीज़ अस्पताल तभी पहुंचते हैं जब सांस लेना बहुत मुश्किल हो जाता है, तब तक ICU केयर एक जरूरी जरूरत बन जाती है।

सांस की परेशानी से कैसे रहें दूर?

डॉक्टर का कहना है कि अगर आप कुछ बातों का ध्यान रखते हैं, तो ठंड के मौसम में सांस से जुड़ी परेशानियों से काफी हद तक दूर रहा जा सकता है। आइए जानते हैं डॉक्टर द्वारा बताए गए कुछ टिप्स-

  • अगर आप पहले से किसी तरह का इनहेलर इस्तेमाल करते हैं, तो हमेशा उसे साथ रखें।
  • हर साल इन्फ्लूएंजा और निमोनिया का टीका लगवाना बिल्कुल भी न भूलें।
  • सांस फूलने और लगातार खांसी या बुखार जैसे लक्षण दिखने पर डॉक्टर से सलाह लें।
  • बिना कारण घर के बाहर जाने से बचें।
  • धूल, धुएं और एलर्जी को कम करके और घर में अच्छा वेंटिलेशन पक्का करें।
  • घर के अंदर हवा की क्वालिटी को बेहतर बनाए रखें।

मौसम में गिरावट या बदलाव बूढ़े और जवान, दोनों के फेफड़ों की सेहत के लिए खतरा बनाती है। इसलिए डॉक्टर मरीजों से कहते हैं कि वे लक्षणों को नजरअंदाज न करें या सलाह में देरी न करें। समय पर मेडिकल देखभाल और बचाव के तरीके अपनाएं।

Highlights

  • मौसम में बदलाव के कारण सांस की परेशानी हो सकती है।
  • धुल और धुएं से सांस की परेशानी बढ़ जाती है।
  • घर के अंदर की एयर क्वालिटी को बेहतर करें।

अस्वीकरण: प्रिय पाठकों यह आर्ट‍िकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए ज‍िम्मेदारी का दावा नहीं करता है।

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