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Written By: akhilesh dwivedi | Published : September 22, 2018 7:03 PM IST
इस बीमारी को डैंड्रफ सेबरेरिक एक्जिमा और सेबरेरिक सोरायसिस के नाम से भी जाना जाता है।© Shutterstock
सेबरेरिक डार्माटाइटिस और डैंड्रफ
सेबरेरिक डार्माटाइटिस स्किन की गंभीर बीमारी है। डैंड्रफ जैसा दिखने वाली यह बीमारी सूजन लिए होती है। लाल चकत्ते और डैंड्रफ जैसी रूसी इसकी खास बात है। सेबरेरिक डार्माटाइटिस शरीर के किसी भी अंग में हो सकती है। ज्यादातर यह नाक, भौहों, कान और पलकों में होती है। सबसे ज्यादा यह बालों के आस-पास गर्दन में होने वाली बीमारी है।
इस बीमारी को डैंड्रफ सेबरेरिक एक्जिमा और सेबरेरिक सोरायसिस के नाम से भी जाना जाता है। बच्चों को अक्सर होने का खतरा बना रहता है। क्योंकि बालों में तेल लगे रहने की वजह से होने वाले इंफेक्शन में यह फैलता है। कभी-कभी इसे लोग डैंड्रफ समझने की भूल भी करते हैं। आपको इस बारे में जानना इसलिए जरुरी है क्योंकि आप इस गंभीर बीमारी को डैंड्रफ समझने की भूल न करें। क्योंकि यह डैंड्रफ जैसी दिखती तो है लेकिन यह बाद में बहुत दुःख देने वाली होती है।
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सेबरेरिक डार्माटाइटिस के कारण
ध्यान देने वाली बात यह है कि यह एलर्जी या हाइजीन की कमी की वजह से नहीं होती है।
नवजात शिशुओं और 30 से 60 की उम्र वालों में होने का ज्यादा खतरा होता है। ज्यादातर मामलों में यह पुरुषों को होने वाली बीमारी है। सामान्यतया यह तैलिय त्वाचा वाले इंसान को होती है।
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कब होता है ज्यादा खतरा
सेबरेरिक डार्माटाइटिस के लक्षण
अक्सर यह बालों के आस-पास होने वाली बीमारी है। दाढ़ी या मूंछ पर, सिर के बालों, भौहें इसके होने की संभावना ज्यादा होती है। तेल वाली स्किन में इसके होने का खतरा ज्यादा होता है। स्किन और बालों के साथ मिलकर एक गुच्छा सा बन जाता है। यह गुच्छा दर्द भरा भी हो सकता है। चेहरे , नाक, कान और पलकों में भी इसके फैलने का डर रहता है। स्किन लाल हो जाती है और खुजली भी होती है। इससे अजीब सा हल्का पानी या पस भी निकल सकता है।
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कैसे करें बचाव
रोजाना शैम्पू करना, एंटीफंगल क्रीम का उपयोग और साफ व ढीले सूती कपड़े पहनना चाहिए। अगर यह बीमारी हो गयी है तो घरेलू उपचार के तौर पर नारियल का तेल और सेब का सिरका फायदेमंद होता है। जरुरत इस बात की होती है कि आप इसे डैंड्रफ समझकर इग्नोंर न करें। अगर ऐसे कोई लक्षण लगें तो डॉक्टर से संपर्क करें। यह बहुत दिनों न ठीक होने वाली बीमारी है कभी-कभी यह ताउम्र ठीक नहीं होती है। इससे बचाव और सावधानियां ही बेहतर है।