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103°F बुखार होने पर बच्चों को पड़ सकता है मिर्गी का दौरा, न्यूरोलॉजिस्ट से जानिए बच्चों को मिर्गी के दौरे से कैसे बचाएं

Febrile Seizure In Children: अत्यधिक बुखार के कारण कुछ बच्चों को झटके या मिर्गी के दौरे पड़ सकते हैं, जिसे मेडिकल भाषा में फेब्राइल सीज़र कहा जाता है। आइए, जानते हैं इसके बारे में विस्तार से -

103°F बुखार होने पर बच्चों को पड़ सकता है मिर्गी का दौरा, न्यूरोलॉजिस्ट से जानिए बच्चों को मिर्गी के दौरे से कैसे बचाएं
VerifiedVERIFIED By: Dr Kadam Nagpal

Written by priya mishra |Published : March 26, 2025 6:06 PM IST

Febrile Seizure In Hindi: बच्चों में बुखार आना एक सामान्य बात है, लेकिन कई बार यह बुखार खतरनाक हो सकता है, खासकर जब यह 102° F या 103°F या उससे अधिक हो जाता है। अगर गाइडलाइंस के अनुसार चलें तो 102°F या उससे अधिक तापमान पर फेब्राइल सीज़र की परिभाषा दी जाती है। अत्यधिक बुखार के कारण कुछ बच्चों को झटके या मिर्गी के दौरे पड़ सकते हैं, जिसे मेडिकल भाषा में फेब्राइल सीज़र कहा जाता है। यह स्थिति माता-पिता के लिए काफी डरावनी हो सकती है, लेकिन सही जानकारी और देखभाल से इससे बचा जा सकता है। हर साल 26 मार्च को मिर्गी जागरूकता दिवस (Epilepsy Awareness Day) मनाया जाता है। आज इस मौके पर नई दिल्ली स्थित सालुब्रितास मेडिकल सेंटर के प्रमुख-न्यूरोइम्यूनोलॉजी और वरिष्ठ न्यूरोलॉजिस्ट डॉ कदम नागपाल से जानते हैं कि बच्चों को बुखार के कारण मिर्गी के दौरे क्यों पड़ते हैं, इसके लक्षण क्या हैं और इससे कैसे बचा जा सकता है?

फेब्राइल सीज़र क्या है? – What Is Febrile Seizure In Hindi

फेब्राइल सीज़र या बुखार के कारण होने वाले दौरे आमतौर पर 6 महीने से 5 साल की उम्र के बच्चों में देखे जाते हैं। यह एक प्रकार का मस्तिष्कीय अस्थायी असंतुलन होता है, जो शरीर के तापमान में अचानक वृद्धि के कारण होता है। यह दौरा कुछ सेकंड से लेकर कुछ मिनट तक रह सकता है, और इसमें बच्चे को अनियंत्रित झटके आने लगते हैं। अधिकांश मामलों में, ये दौरे हानिरहित होते हैं और बच्चे के मस्तिष्क पर कोई स्थायी प्रभाव नहीं डालते। हालांकि, माता-पिता के लिए यह जानना जरूरी है कि यह दौरा क्यों होता है और इससे बचाव के लिए क्या किया जा सकता है।

बच्चों में बुखार के कारण मिर्गी का दौरा क्यों पड़ता है?

फेब्राइल सीज़र का मुख्य कारण तेजी से बढ़ता हुआ बुखार है। जब बच्चे का शरीर संक्रमण से लड़ता है, तो उसका तापमान अचानक बहुत ज्यादा बढ़ सकता है। यह तेज तापमान मस्तिष्क की विद्युत गतिविधि को प्रभावित करता है और झटके आने लगते हैं। इसके कुछ सामान्य कारण निम्नलिखित हैं:

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वायरल संक्रमण: फ्लू, सर्दी-खांसी, या अन्य वायरस के कारण बच्चों में तेज बुखार हो सकता है।

बैक्टीरियल संक्रमण: कान का संक्रमण, गले का संक्रमण, या निमोनिया जैसी बीमारियां भी तेज बुखार का कारण बन सकती हैं।

टीकाकरण: कुछ बच्चों में टीकाकरण (जैसे MMR वैक्सीन) के बाद हल्का बुखार आ सकता है, जिससे फेब्राइल सीज़र का खतरा बढ़ सकता है।

अनुवांशिक कारण: यदि परिवार में किसी को बचपन में फेब्राइल सीज़र हुआ है, तो बच्चे को भी इसका जोखिम हो सकता है।

फेब्राइल सीज़र के लक्षण – Symptoms Of Febrile Seizure In Hindi

माता-पिता को यह पहचानना जरूरी है कि बच्चे को मिर्गी का दौरा पड़ रहा है या नहीं। ये दौरे आम तौर पर 6 महीने से 6 साल के बच्चों में होते हैं और इनके कुछ मुख्य लक्षण हैं, बुखार, मांसपेशियों में झटके, बेहोशी और आंखें ऊपर की ओर मुड़ जाना, शरीर कठोर हो जाना, मुंह से झाग आना, सांस लेने में कठिनाई, दौरे के बाद कमजोरी महसूस होना। अधिकांश फेब्राइल सीज़र 1-2 मिनट तक चलते हैं, लेकिन कुछ मामलों में यह 10-15 मिनट तक भी चल सकते हैं।

क्या यह मिर्गी का संकेत है?

जिन बच्चों में फेब्राइल सीज़र होते हैं, उनमें से कुछ प्रतिशत बच्चों के आगे चलकर एपिलेप्सी में परिवर्तित होने की संभावना होती है। इसी कारण, जैसे ही फेब्राइल सीज़र वाले बच्चों को बुखार चढ़ना शुरू होता है, तो कुछ मामलों में कम मात्रा में एंटी-सीज़र मेडिसिन दी जाती है, ताकि अगर कभी भी बुखार हो, तो तुरंत पेरासिटामोल देकर बुखार कम किया जा सके। अगर बुखार फिर भी न उतरे, तो कम से कम एंटी-सीज़र मेडिसिन दी जाए, ताकि यह दौरे में परिवर्तित न हो। हालांकि, यदि बच्चे को बार-बार या अत्यधिक लंबे दौरे पड़ रहे हैं, तो डॉक्टर से परामर्श लेना जरूरी है।

बच्चों को मिर्गी के दौरे से कैसे बचाएं?

बच्चों में मिर्गी के दौरे आना एक गंभीर स्थिति हो सकती है, लेकिन सही देखभाल और सावधानी बरतकर इसे रोका जा सकता है। अगर आपका बच्चा मिर्गी से पीड़ित है या उसे बुखार के कारण झटके आने का खतरा है, तो कुछ उपाय अपनाकर इस स्थिति से बचा जा सकता है।

बुखार को नियंत्रित करें: बुखार मिर्गी के दौरे का एक प्रमुख कारण होता है। इसलिए, यदि बच्चे को बुखार हो, तो उसे बढ़ने से रोकना बेहद जरूरी है। पेरासिटामोल या इबुप्रोफेन जैसी दवाएं डॉक्टर की सलाह से दी जा सकती हैं। इसके अलावा, बच्चे को हल्के कपड़े पहनाएं और ठंडे गीले कपड़े से शरीर को पोंछें ताकि शरीर का तापमान जल्दी कम हो सके।

नियमित रूप से दवाएं दें: अगर बच्चे को पहले भी मिर्गी के दौरे पड़े हैं, तो डॉक्टर द्वारा सुझाई गई एंटी-एपिलेप्टिक दवाएं (AEDs) नियमित रूप से दें। दवाओं को समय पर न लेने से दौरे का खतरा बढ़ सकता है। किसी भी दवा को बंद करने या बदलने से पहले डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

पर्याप्त नींद जरूरी है: नींद की कमी भी मिर्गी के दौरे को ट्रिगर कर सकती है। इसलिए, सुनिश्चित करें कि बच्चा रोजाना पर्याप्त नींद ले रहा है। छोटे बच्चों को दिन में भी आराम करने की जरूरत होती है, इसलिए उनकी दिनचर्या को व्यवस्थित करें ताकि वे तनावमुक्त और शांत महसूस करें।

संतुलित आहार दें: बच्चे को पोषण से भरपूर आहार दें, जिसमें हेल्दी फैट्स, प्रोटीन, और विटामिन शामिल हों। कुछ मामलों में, केटोजेनिक डाइट (कम कार्बोहाइड्रेट और हाई फैट वाली डाइट) मिर्गी को नियंत्रित करने में मदद कर सकती है। हालांकि, इसे अपनाने से पहले डॉक्टर से परामर्श लेना जरूरी है।

बच्चे को हाइड्रेट रखें: शरीर में पानी की कमी मस्तिष्क की कार्यप्रणाली को प्रभावित कर सकती है और दौरे का कारण बन सकती है। इसलिए, बच्चे को दिनभर में पर्याप्त पानी, नारियल पानी, और ताजे फलों का रस दें ताकि उसका शरीर हाइड्रेटेड बना रहे।

बच्चे को अधिक रोशनी और तेज आवाज से बचाएं: कुछ बच्चों में मिर्गी तेज रोशनी (फ्लैशिंग लाइट्स) या जोरदार आवाजों से ट्रिगर हो सकती है। अगर आपके बच्चे को इस प्रकार की संवेदनशीलता है, तो उसे अधिक रोशनी और तेज आवाज वाले माहौल से दूर रखें।

मानसिक तनाव को कम करें: बच्चे पर पढ़ाई या अन्य गतिविधियों का अत्यधिक दबाव न डालें। तनाव और चिंता भी मिर्गी के दौरे को ट्रिगर कर सकते हैं। इसलिए, उन्हें खेलने, हंसने, और मन को शांत रखने वाली गतिविधियों में शामिल करें।

संक्रमण और बीमारियों से बचाव करें: वायरल और बैक्टीरियल संक्रमण बुखार का कारण बन सकते हैं, जिससे दौरे पड़ने की संभावना बढ़ जाती है। इसलिए, बच्चों को साफ-सफाई की आदतें सिखाएं, समय-समय पर हाथ धोने के लिए प्रेरित करें और उन्हें संक्रमण से बचाने के लिए आवश्यक टीकाकरण करवाएं।

बच्चे को दौरा पड़ने पर क्या करें?

यदि बच्चे को बुखार के दौरान दौरा पड़ता है, तो माता-पिता को घबराने की जरूरत नहीं है। नीचे दिए गए स्टेप्स को फॉलो करें:

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  • बच्चे को सपाट जमीन पर लिटाएं।
  • सिर को एक तरफ मोड़ें ताकि लार बाहर निकल सके।
  • मुंह में कुछ भी न डालें, इससे दम घुट सकता है।
  • दौरे की समयावधि नोट करें।
  • यदि दौरा 5 मिनट से अधिक चले, तुरंत डॉक्टर को बुलाएं।
  • बच्चे को दौरे के बाद आराम करने दें।

कब डॉक्टर के पास जाएं?

  • यदि दौरा 5 मिनट से ज्यादा चले।
  • यदि बच्चा दौरे के बाद सांस लेने में दिक्कत महसूस करे।
  • यदि बच्चा पूरी तरह होश में न लौटे।
  • यदि एक दिन में एक से अधिक बार दौरे पड़ें।
  • यदि बच्चे को पहली बार फेब्राइल सीज़र हुआ हो।

Disclaimer: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसल‍िए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए ज‍िम्मेदारी का दावा नहीं करता है।