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कांवड़ यात्रा में पैरों में छाले और दर्द से कैसे बचें? डॉक्टर ने बताए 5 आसान उपाय

कावड़ यात्रा के दौरान लंबे समय तक चलने के कारण कई श्रद्धालुओं को पैरों में छाले और दर्द की परेशानी होने लगती है। लेकिन डॉक्टर कहते हैं कि कुछ आसान उपायों को अपनाकर इस परेशानी से बचा जा सकता है।

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Written By: Ashu Kumar Das | Published : July 29, 2026 5:10 PM IST

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Medically Verified By: Dr. Navin Chobdar

हर साल सावन के महीने में लाखों श्रद्धालु भगवान शिव का जलाभिषेक करने के लिए कांवड़ यात्रा पर निकलते हैं। कई लोग सैकड़ों किलोमीटर तक पैदल यात्रा करते हैं। ऐसा कहा जाता है कि सावन के महीने में भगवान शिव का जलाभिषेक करने से उनकी कृपा जीवन भर भक्तों पर बरसती है। इसलिए सावन के महीने में कावड़ की यात्रा निकाली जाती है। आस्था और श्रद्धा से भरी इस यात्रा में सबसे ज्यादा दबाव पैरों पर पड़ता है। लगातार कई घंटों तक चलना, पसीना आना, गीले मोजे पहने रहना या सही जूते न पहनना जैसी छोटी-छोटी गलतियां कांवड़ियों के पैरों में छाले, सूजन और तेज दर्द की वजह बन सकती हैं। अक्सर लोग शुरुआत में पैरों में होने वाली हल्की तकलीफ को नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन यही परेशानी आगे चलकर इतनी बढ़ सकती है कि यात्रा पूरी करना मुश्किल हो जाए।

अच्छी बात यह है कि थोड़ी-सी तैयारी और सही देखभाल अपनाकर इन समस्याओं से काफी हद तक बचा जा सकता है। अगर यात्रा के दौरान पैरों का सही तरीके से ध्यान रखा जाए, तो सफर ज्यादा आरामदायक और सुरक्षित बन सकता है। कावड़ की यात्रा के दौरान पैरों में छाले और दर्द की परेशानी न हो, इसके लिए आपको क्या करना चाहिए इसकी जानकारी दे रहे हैं दिल्ली के पीएसआरआई हॉस्पिटल के पेरिफेरल वैस्कुलर और एंडोवैस्कुलर सर्जन डॉ. नवीन चोबदार।

गलत जूते के कारण पैरों के छाले हो जाते हैं। गलत जूते के कारण पैरों के छाले हो जाते हैं।

1. कावड़ यात्रा से पहले जूते सही चुनें

डॉ. नवीन चोबदार कहते हैं कि कांवड़ यात्रा में सबसे बड़ी गलती जो लोग करते हैं, वह है नए जूते पहनकर निकल जाना। नए जूते शुरुआत में भले ही अच्छे लगे, लेकिन लंबे समय तक पहनने पर वे पैरों को रगड़ते हैं और छाले बनने का खतरा बढ़ जाता है। कावड़ यात्रा के लिए हमेशा ऐसे जूते चुनें जिन्हें आपने पहले भी कई बार पहना हो और जिसमें चलने की आदत हो। जूते आरामदायक होने चाहिए, उनका तलवा मुलायम हो और पकड़ अच्छी हो, ताकि फिसलने का खतरा कम रहे। साथ ही जूतों में उंगलियों के लिए पर्याप्त जगह होनी चाहिए। डॉक्टर बताते हैं कि कावड़ यात्रा के दौरान नए और टाइट जूते पहनने से रगड़ लगने का खतरा रहता है, जिससे पैरों में छाले हो जाते हैं। अगर कोई व्यक्ति लंबे समय तक नंगे पैर या बहुत पतली चप्पल पहनकर चलता है, तो पैरों में चोट लगने, त्वचा छिलने और संक्रमण होने का खतरा भी बढ़ जाता है। इसलिए सही फुटवियर जरूर चुनें।

2. मोजों का भी रखें पूरा ध्यान

कावड़ यात्रा के दौरान जब लंबा चलने के लिए जूते और सैंडल तो सह चुन लेते हैं, लेकिन जब बातों मोजों की आती है तो उसे अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं। जबकि पैरों को सुरक्षित रखने में मोजों की भी उतनी ही अहम भूमिका होती है। कावड़ यात्रा के दौरान पैरों में छाले की समस्या न हो इसके लिए सही मौजे पहनना भी बहुत जरूरी है। डॉ. नवीन सलाह देते हैं कि कावड़ यात्रा के दौरान ऐसे मोजे पहनें जो पसीना अच्छी तरह सोख लें। अगर मोजे पसीने या बारिश की वजह से गीले हो जाएं, तो उन्हें ज्यादा देर तक पहनकर न रखें। गीले मोजों में लगातार चलने से त्वचा मुलायम हो जाती है और रगड़ चलने के छाले बन जाते है। इसलिए कावड़ यात्रा के दौरान हर 5 घंटे पर मौजे पहन लें। अगर पहले भी पैरों में छाले होने की समस्या रही है, तो यात्रा शुरू करने से पहले ही एड़ी, अंगूठे या उंगलियों के किनारों जैसी जगहों पर सॉफ्ट बैंडेज या ब्लिस्टर पैड लगाए। इससे चलने के दौरान होने वाला घर्षण कम होता है और छाले होने की संभावना घट जाती है।

कावड़ यात्रा के दौरान आराम से चलना चाहिए।

3. चलते समय जल्दबाजी न करें

कई लोग यात्रा जल्दी पूरी करने के लिए शुरुआत में बहुत तेज चलने लगते हैं। इससे शरीर और पैरों पर जरूरत से ज्यादा दबाव पड़ता है। बेहतर होगा कि पूरे सफर के दौरान अपनी चाल एक समान रखें। बीच-बीच में कुछ मिनट का आराम जरूर करें। आराम करते समय जूते और मोजे उतार दें, ताकि पैरों को हवा मिल सके। इससे पसीना सूखने में मदद मिलती है और त्वचा को आराम मिलता है। कावड़ यात्रा के दौरान घंटों तक चलने से पैरों में सूजन महसूस हो रही हो, तो कुछ देर के लिए पैरों को किसी ऊंची जगह पर रखकर आराम करें। इससे सूजन कम करने में मदद मिल सकती है।

4. बीच- बीच में स्ट्रेचिंग करने की कोशिश करें

कावड़ यात्रा के दौरान लंबे समय तक चलने से पैरो में भारीपन महसूस होने लगता है। इसलिए लंबी दूरी तक पैदल चलने से पहले और यात्रा पूरी करने के बाद कुछ मिनट स्ट्रेचिंग करना फायदेमंद हो सकता है। डॉक्टर बताते हैं कि कावड़ यात्रा के दौरान बीच- बीच में स्ट्रेचिंग करने से पिंडलियों, टखनों और तलवों का तनाव कम होने लगता है। इससे लंबे समय तक चलने के कारण होने वाली पैरों की सूजन धीरे- धीरे घटने लगती है।

5. पैरों की सफाई है जरूरी

कावड़ यात्रा के दौरान लोग इतना ज्यादा जोश और पूरे दिन दौड़ने के बाद थकान में आ जाते हैं कि रात को सीधे सो जाते हैं। लेकिन आपको यह बात समझनी होगी कि पूरे दिन चलने के बाद पैरों की सफाई करना बहुत जरूरी होता है। रोजाना पैरों को साफ पानी से धोएं और अच्छी तरह सुखाएं। खासतौर पर उंगलियों के बीच की जगह को सूखा रखना बेहद जरूरी है, क्योंकि वहां नमी रहने से फंगल संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।

सफाई के बाद पैरों को ध्यान से देखें। अगर कहीं लाल निशान दिखाई दे रहे हैं तो त्वचा छिल रही हो या छोटा-सा छाला भी बन रहा हो, तो उसे नजरअंदाज न करें।

पैरों के छालों को ठीक करने के लिए दवा लगानी चाहिए।

कावड़ यात्रा के दौरान चलने से छाला हो जाए तो क्या करें?

डॉ. नवीन कहते हैं कि यात्रा के दौरान अगर पैरों में छाला बन जाए, तो सबसे पहले घबराएं नहीं।

  1. सबसे बड़ी गलती जो लोग करते हैं, वह है छाले को सुई से फोड़ देना या उसकी ऊपरी त्वचा को हटा देना। ऐसा करने से संक्रमण का खतरा कई गुना बढ़ सकता है। इसलिए पैरों के छाले या घाव को फोड़ने की कोशिश बिल्कुल न करें।
  2. छाले होने के बाद उसे सूखे कपड़े या कॉटन से सूखाने की कोशिश करें। बाद में उस पर स्टेराइल ड्रेसिंग लगाएं। इससे घाव सुरक्षित रहेगा और जल्दी ठीक होने में मदद मिलेगी।

डॉक्टर कहते हैं- कावड़ यात्रा आस्था, विश्वास और भक्ति का प्रतीक है। लेकिन इस यात्रा को सुरक्षित और आरामदायक बनाने के लिए पैरों की देखभाल भी उतनी ही जरूरी है। सही जूते पहनना, साफ और सूखे मोजे इस्तेमाल करना, समय-समय पर आराम करना, शरीर में पानी की कमी न होने देना और पैरों की रोजाना जांच करना जैसी छोटी-छोटी बातें कांवड़ियों के पैरों में होने वाले छाले और सूजन से बचने में मदद कर सकती है।

Disclaimer: यह लेख सामान्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। अगर आप कावड़ यात्रा पर जा रहे हैं तो पहले डॉक्टर से मेडिकल टेस्ट करवाएं और किसी भी प्रकार की परेशानी होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।