
मुकेश शर्मा
मुकेश शर्मा दिल्ली यूनिर्विसिटी से जर्नलिज्म डिग्री होल्डर हैं और पिछले 8 साल से Health Journalism से जुड़े हुए ... Read More
Written By: Mukesh Sharma | Updated : April 29, 2026 5:53 PM IST
Medically Verified By: Dr. Rohit Kumar Sharma
how do you know you are suffering from heatstroke (this image was generated by chatgpt)
मई, जून और जुलाई के महीने में चलने वाली तेज गर्म हवाएं सिर्फ गर्म हवाएं नहीं होती है, बल्कि जानलेवा भी हो सकती हैं। इस स्थिति को मेडिकल भाषा में हीट स्ट्रोक (Heatstroke) कहा जाता है, जिसे आम बोलचाल की भाषा में लू लगना। गर्म हवाएं यानी “लू” गर्मियों के महीनों में खासतौर पर दोपहर के समय चलती हैं, जिनसे बचकर रहना बहुत जरूरी है। क्योंकि इन हवाओं के संपर्क में आने जानलेवा हो सकता है और इसके कारण ऑर्गन फेलियर जैसी कंडीशन भी आ सकती है। लेकिन लू लगने के लक्षण क्या हैं? कैसे पता चलेगा कि आप लू की चपेट में आ गए हैं। हर व्यक्ति के लिए यह जानना जरूरी है, ताकि स्थिति को गंभीर होने से पहले ही आप डॉक्टर से मदद ले सकें।
heat stroke expert advice (This Image Was Generated by ChatGPT)
जब बहुत गर्म हवाओं और मौसम का तापमान बहुत ज्यादा बढ़ जाने के कारण शरीर का तापमान भी इतना ज्यादा बढ़ जाता है कि शरीर खुद को ठंडा रखने में असमर्थ हो जाता है, तो इस स्थिति को लू लगना यानी हीट स्ट्रोक कहा जाता है। हमारे शरीर के अंदर शरीर के तापमान को सही बनाए रखने के लिए एक खास मैकेनिज्म होता है और जब शरीर का तापमान बढ़ने लगता है तो पसीने के जरिए तापमान को कंट्रोल किया जाता है। लेकिन बहुत ज्यादा गर्मी के कारण जब शरीर में पानी की कमी हो जाती है तो यह मैकेनिज्म भी काम नहीं कर पाता है और तापमान नियंत्रण से बाहर चला जाता है।
heat stroke symptoms (This Image was Generated by ChatGPT)
इसके बाद जो स्थिति पैदा होती है, उसे लू लगना यानी हीट स्ट्रोक कहा जाता है। यह भी जानना जरूरी है कि लू अचानक नहीं लगती, बल्कि इसके कुछ शुरुआती संकेत होते हैं जिन्हें समय रहते पहचानना बेहद जरूरी है। इन लक्षणों में आमतौर पर निम्न शामिल हो सकते हैं -
अगर बहुत ज्यादा गर्मी के कारण या फिर अगर आप बाहर धूप से आए हैं और आपको इनमें से कोई भी लक्षण महसूस हो रहा है, तो इन्हें नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। क्योंकि इन लक्षणों को इग्नोर करने से स्थिति बहुत स्थिति और तेजी से बिगड़ने लगती है और जानलेवा भी साबित हो सकती है।
ऐसा हीं है कि कुछ खास लोगों को ही लू लगती है, ज्यादा गर्मी के संपर्क में रहने वाले और सेहत का ध्यान रखने वाले किसी भी व्यक्ति को लू लग सकती है। लेकिन ऐसा कहा जा सकता है कि कुछ लोग गर्म तापमान से अन्य लोगों की तुलना में ज्यादा संवेदनशील हो सकते हैं। इनमें प्रमुख रूप से छोटे बच्चे और बुजुर्ग सबसे अधिक जोखिम में रहते हैं, क्योंकि उनका शरीर तापमान को नियंत्रित करने में उतना सक्षम नहीं होता।
(और पढ़ें - लू लगने से बचना क्यों जरूरी है?)
इसके अलावा, बाहर धूप में लंबे समय तक काम करने वाले मजदूर या कर्मचारी, शरीर में पानी की कमी यानी डिहाइड्रेशन से जूझ रहे लोग, हाई ब्लड प्रेशर या दिल की बीमारियों से पीड़ित मरीज और वे लोग जो रोजाना लंबे समय तक तेज धूप में रहते हैं, उनमें लू लगने का खतरा काफी ज्यादा होता है।
What to do in heatstroke (This Image was Generated by Chatgpt)
अब आप समझ गए होंगे कि लू लगना कोई गर्मी लगने जैसी स्थिति नहीं है, बल्कि यह एक मेडिकल इमरजेंसी भी हो सकती है। डॉ. रोहित शर्मा ने बताया कि लू लगने पर तुरंत सही कदम उठाना बेहद जरूरी है। अगर आपको या आपके आसपास किसी व्यक्ति में लू के लक्षण दिखें, तो बिना देरी किए इन निर्देशों का पालन करें
साथ ही इस बात का ध्यान भी रखना है कि अगर मरीज की हालत ज्यादा गंभीर है, तो उसे जल्द से जल्द डॉक्टर के पास ले जाना जरूरी है। ताकि डॉक्टर स्थिति को अपने हिसाब से हैंडल कर सकें।
(और पढ़ें - लू लगने पर क्या खाएं?)
हीटस्ट्रोस से खुद को सुरक्षित रखने का सबसे प्रभावी तरीका यही है कि आप अपने शरीर को जितना हो सके लू यानी गर्म हवाओं व गर्म तापमान के संपर्क में न आने दें और शरीर में पानी व अन्य पोषक तत्वों की कमी न होने दें। कुछ साधारण लेकिन जरूरी बातों का ध्यान रखकर ऐसा किया जा सकता है -
आपको इस बात का ध्यान भी रखना है कि धूप से लौटने के तुरंत बाद ठंडा पानी न पीएं शरीर को पहले सामान्य तापमान में आने दें। लू एक गंभीर लेकिन पूरी तरह से बचाव योग्य स्थिति है, इसलिए इसके शुरुआती लक्षणों को पहचानकर समय पर कदम उठाना जरूरी है और गर्मी के मौसम में थोड़ी सावधानी अपनाकर आप खुद को और अपने परिवार को सुरक्षित रख सकते हैं।
डिसक्लेमर: इस लेख का मुख्य उद्देश्य लोगों को हीट स्ट्रोक से जुड़ी जानकारी पहुंचाना है और इस लेख में दी गई किसी भी जानकारी का इस्तेमाल हीट स्ट्रोक या किसी भी बीमारी के इलाज के रूप में नहीं किया जाना चाहिए। अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।
सबसे पहले मरीज को छाया में लेकर जाएं, पानी पिलाएं, उसके कपड़े ढीले करके गीले कपड़े के साथ उसके शरीर को ठंडा करने की कोशिश करें।
अत्यधिक प्यास या निर्जलीकरण गहरे रंग का मूत्र सामान्य से अधिक चिड़चिड़ा शरीर का तापमान बढ़ना या 105°F (40.5°C) से अधिक तेज बुखार होना।
हीटस्ट्रोक एक गंभीर बीमारी है जिसमें किसी व्यक्ति का तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से अधिक हो जाता है, जो अत्यधिक गर्मी के संपर्क में आने या ज़ोरदार शारीरिक व्यायाम के परिणामस्वरूप होता है। ऐंठन, दौरे या कोमा। पसीना आ सकता है और त्वचा देखने में ठंडी लग सकती है।