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क्या आपका पार्टनर मैन्यूपुलेटिव है और विक्टिम कार्ड खेलता है? एक्सपर्ट से जानें ऐसा होने पर क्या करें

क्या आपका पार्टनर भी गलतियां करने के बाद लास्ट में सॉरी कह देता है? या आपको ऐसा महसूस करवाता है कि उसका ऐसा कुछ करने का इरादा नहीं था, लेकिन आपके बिहेविरयर ने उन्हें मजबूर कर दिया! अगर हां तो इस लेख में बताई बातें समझना बहुत जरूरी हैं।

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Written By: Vidya Sharma | Updated : June 29, 2026 10:58 AM IST

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Medically Verified By: Dr. Malini Saba

हर रिश्ते में मतभेद और गलतफहमियां होना नॉर्मल है। लेकिन समस्या तब शुरू होती है जब एक व्यक्ति हर स्थिति में खुद को पीड़ित साबित करने की कोशिश करता है, भले ही गलती उसकी ही क्यों न हो। इस व्यवहार को आम भाषा में विक्टिम कार्ड खेलना कहा जाता है। साइकोलॉजिस्ट और महिला एवं मानवाधिकारों की समर्थक डॉक्टर मालिनी सबा बताती हैं कि कुछ लोग जिम्मेदारी लेने से बचने, सहानुभूति पाने या अपने व्यवहार को सही ठहराने के लिए बार-बार खुद को पीड़ित के रूप में दिखाते हैं।

समय के साथ यह रिश्ता इमोशनली थका देने वाला और असंतुलित बन सकता है। ऐसे में कुछ महिलाओं या पुरुषों को समझ नहीं आता है कि उन्हें मैन्यूपुलेट किया जा रहा है या उनके साथ पार्टनर विक्टिम कार्ड खेल रहा है। ऐसे में आप साइकोलॉजिस्ट की बताई इन 5 बातों को ध्यान में रखें और देखें कि क्या आपके साथ भी ऐसा हो रहा है या नहीं।

हर विवाद में खुद को पीड़ित बताना

अगर किसी भी बहस या समस्या के दौरान आपका पार्टनर अपनी भूमिका स्वीकार करने के बजाय हमेशा यह साबित करने की कोशिश करता है कि उसके साथ अन्याय हुआ है, तो यह एक संकेत हो सकता है। वह अक्सर बातचीत को इस दिशा में मोड़ देता है कि आखिर में आपको ही दोषी महसूस होने लगे।

गलती स्वीकार करने से बचना

हर इंसान से गलतियां होती हैं, लेकिन एक स्वस्थ रिश्ते में लोग अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करना सीखते हैं। अगर आपका पार्टनर हर बार बहाना बनाता है, परिस्थितियों या दूसरे लोगों को दोष देता है और कभी अपनी गलती नहीं मानता, तो यह मैन्यूपुलेटिव व्यवहार का हिस्सा हो सकता है।

आपको गिल्ट महसूस कराना

ऐसे लोग अक्सर कहते हैं,जैसे- "मैंने तुम्हारे लिए इतना कुछ किया।", "तुम्हें मेरी परवाह ही नहीं है", "सब लोग मुझे गलत समझते हैं।" इन बातों का उद्देश्य कई बार समस्या का समाधान नहीं बल्कि सामने वाले को अपराधबोध महसूस कराना होता है।

भावनाओं का इस्तेमाल नियंत्रण के लिए करना

कभी-कभी व्यक्ति रोने, अत्यधिक दुखी दिखने या भावनात्मक रूप से टूटने का प्रदर्शन करके बातचीत की दिशा बदल देता है। इससे मूल मुद्दा पीछे छूट जाता है और पूरा ध्यान उसकी भावनाओं पर केंद्रित हो जाता है।

हमेशा खुद को गलत समझा गया व्यक्ति बताना

अगर कोई व्यक्ति लगातार यह दावा करता है कि परिवार, दोस्त, सहकर्मी और अब उसका पार्टनर भी उसे नहीं समझता, तो यह एक पैटर्न हो सकता है जिस पर ध्यान देने की जरूरत है।

ऐसा व्यवहार रिश्ते को कैसे प्रभावित करता है?

जब एक व्यक्ति लगातार विक्टिम कार्ड खेलता है, तो दूसरा पार्टनर धीरे-धीरे भावनात्मक रूप से थकने लगता है। ऐसे में आत्मविश्वास कम हो सकता है और लगातार अपराधबोध महसूस हो सकता है। अपनी भावनाएं व्यक्त करने में डर लग सकता है, रिश्ते में बराबरी की भावना खत्म हो सकती है और समय के साथ यह स्थिति भावनात्मक तनाव और असंतोष को बढ़ा सकती है।

अगर आपका पार्टनर ऐसा कर रहा है तो क्या करें?

  1. तथ्यों पर ध्यान दें- बातचीत के दौरान भावनाओं के बजाय वास्तविक घटनाओं और तथ्यों पर ध्यान केंद्रित करें।
  2. स्पष्ट सीमाएं तय करें- अगर आपको बार-बार दोषी ठहराया जा रहा है या भावनात्मक दबाव डाला जा रहा है, तो अपनी सीमाएं स्पष्ट रूप से बताना जरूरी है।
  3. हर बार अपराधबोध महसूस न करें- किसी की भावनाओं के प्रति संवेदनशील होना और हर समस्या की जिम्मेदारी अपने ऊपर लेना, दोनों अलग बातें हैं।
  4. खुलकर बातचीत करें- शांत और सम्मानजनक तरीके से बताएं कि आपको कौन-सा व्यवहार परेशान कर रहा है और उसका रिश्ते पर क्या प्रभाव पड़ रहा है।
  5. जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ की मदद लें- अगर रिश्ते में लगातार भावनात्मक हेरफेर, तनाव या असंतुलन बना हुआ है, तो रिलेशनशिप काउंसलर या मनोवैज्ञानिक की मदद लेना उपयोगी हो सकता है।

हेल्दी रिश्ते की पहचान क्या है?

एक हेल्दी रिश्ता वह होता है जहां दोनों लोग अपनी भावनाओं को व्यक्त कर सकें, गलतियां स्वीकार कर सकें और समस्याओं का समाधान मिलकर खोजें। रिश्ते में सहानुभूति जरूरी है, लेकिन जिम्मेदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। 

डिस्क्लेमर: अगर कोई व्यक्ति हर सिचुएशन में खुद को विक्टिम और दूसरे को दोषी साबित करने की कोशिश करता है, तो यह सिर्फ एक पर्सनल हैबिट नहीं बल्कि रिश्ते की गुणवत्ता को प्रभावित करने वाला व्यवहार बन सकता है। याद रखें, एक मजबूत रिश्ता एक दूसरे पर आरोप लगाने से नहीं बल्कि ईमानदारी, जवाबदेही और आपसी सम्मान पर टिकता है।