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Medically Verified By: Dr. Anupam Das
How to Know if You Have Heart Valve Problems: हमारा दिल शरीर के सबसे जरूरी अंगों के रूप में से एक होता है और यह एक तरह से दिल के इंजन की तरह काम करता है, जो ऑक्सीजन युक्त खून पूरे शरीर में पहंचाता है। जिससे हमारे शरीर की एक-एक कोशिका को जीवित रहने के लिए ऑक्सीजन व अन्य जरूरी पोषक तत्व मिलते हैं। हमारा हार्ट जिसे हम शरीर का इंजन भी कहते हैं, उसकी संरचना किसी जटिल मशीन से कम नहीं होती है। हार्ट में भी चार वाल्व होते हैं, जिन्हें माइट्रल वाल्व, ट्राइकप्सिड वाल्व, एओर्टिक वाल्व और पल्मोनरी वाल्व के नाम से जाना जाता है। जब इन वाल्व में से कोई भी पूरी तरह नहीं खुलता (स्टेनोसिस), सही से बंद नहीं होता (प्रोलैप्स) या लीक करता है, तब इस स्थिति को हार्ट वाल्व डिजीज कहा जाता है। वाल्व लीक होने से जुड़ी कुछ स्थितियों के रिगर्जिटेशन भी कहा जाता है। यह समस्या शुरुआती दौर में अक्सर बिना लक्षण के रहती है, लेकिन जैसे-जैसे बढ़ती है, यह दिल पर अतिरिक्त दबाव डालती है और जीवन के लिए गंभीर खतरा बन सकती है।
जितना हमारे शरीर के लिए वाल्व जरूरी है, उतना ही ज्यादा हमारे दिल के लिए ये वाल्व जरूरी होते हैं। इसलिए इन वाल्व के बारे में जानना जरूरी होता है। डॉक्टर अनुपम दास ने बताया कि दिल के वाल्व एक तरह के “गेट” की तरह होते हैं, जो ब्लड को केवल एक दिशा में बहने देते हैं। जब इनमें खराबी आती है, तो ब्लड फ्लो गड़बड़ा जाता है, और दिल को सामान्य से ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है, वाल्व रोग तीन तरह से हो सकता है
स्टेनोसिस (Stenosis): वाल्व संकुचित हो जाता है, जिसका मतलब है कि वाल्व के अंदर का रास्ता कम हो गया है। इससे ब्ल फ्लो कम हो जाता है और इसका सीधा प्रभाव हार्ट पर पड़ता है।
प्रोलैप्स (Prolapse): वाल्व के फ्लैप ढीले हो जाते हैं और ठीक से बंद नहीं होते। ऐसी समस्याओं को हार्ट वाल्व प्रोलैप्स कहा जाता है।
रिगर्जिटेशन (Regurgitation): वाल्व से ब्लड उल्टी दिशा में लीक करता है। इसके कारण ब्लड आगे की तरफ पंप करते समय भी कुछ ब्लड पीछे की तरफ लीक हो जाते हैं।
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हार्ट वाल्व डिजीज होने के भी कई अलग-अलग कारण हो सकते हैं, जिनमें से कुछ प्रमुख के बारे में हम आपको बताने वाले हैं।
जन्मजात दोष: जन्म से ही वाल्व की संरचना में समस्या। यह हार्ट वाल्व डिजीज के का सबसे प्रमुख कारण माना गया है।
रूमेटिक फीवर: बचपन का यह बुखार वर्षों बाद वाल्व को नुकसान पहुंचा सकता है। इससे हार्ट वाल्व के अलावा हार्ट के अन्य हिस्सों में भी दिक्कत आने लगती है।
बढ़ती उम्र: उम्र के साथ वाल्व में कैल्शियम जमा होना और इस स्थिति में वाल्व सख्त हो जाते हैं। वाल्व के अंदर कैल्शियम जमने के कारण वाल्व अंदर से संकुचित होने लगते है और उनका लचीलापन कम हो जाता है।
संक्रमण (एंडोकार्डाइटिस): कुछ तरह के इन्फेक्शन भी हैं, जो हार्ट वाल्व समेत शरीर के कई हिस्सों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। कुछ प्रकार के बैक्टीरिया व फंगी हार्ट को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
हार्ट अटैक या सर्जरी के बाद: कुछ स्थितियां हैं, जिनके कार हार्ट ठीक से काम नहीं कर पाता है, उदाहरण के लिए हार्ट अटैक के बाद हार्ट वाल्व का कमजोर पड़ जाना। इसके अलावा सर्जरी के बाद हार्ट वाल्व का कमजोर पड़ जाना।
ब्लड प्रेशर व हार्ट डिजीज: लंबे समय तक हाई बीपी दिल पर दबाव डालता है। हाई बीपी के मरीज जिनका लंबे समय से ब्लड प्रेशर कंट्रोल में नहीं है, उनकी हार्ट वाल्व में क्षति होने का खतरा हो सकता है।
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शुरुआत में हार्ट वाल्व डिजीज के लक्षण बहुत हल्के या न के बराबर होते हैं। कई बार यह समस्या केवल रूटीन चेकअप या इकोकार्डियोग्राम में सामने आती है। लेकिन समय के साथ, जब वाल्व की खराबी ज्यादा हो जाती है, तो लक्षण स्पष्ट दिखने लगते हैं।
अत्यधिक थकान और कमजोरी: रोजमर्रा के काम में भी थक जाना।
सांस लेने में दिक्कत: खासकर सीढ़ियां चढ़ते समय या हल्की एक्सरसाइज पर।
दिल की धड़कन का असामान्य होना: धड़कन तेज होना, रुकना या पलटने जैसा महसूस होना।
पैर, टखनों या पेट में सूजन: शरीर में फ्लूइड रिटेंशन के कारण।
चक्कर आना या बेहोश होना: मस्तिष्क तक पर्याप्त ब्लड न पहुंचने पर।
सीने में दर्द या दबाव: विशेषकर मेहनत करने के दौरान।
अचानक वजन बढ़ना: शरीर में पानी जमा होने से।
यदि आपके साथ इनमें से कोई स्थिति हो, तो तुरंत विशेषज्ञ से जांच करवाएं:
1. सीने का एक्स-रे (Chest X-ray): दिल के आकार और फेफड़ों में पानी की मौजूदगी की जांच और वाल्व रोग के अप्रत्यक्ष संकेत देता है।
2. इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम (ECG): दिल की धड़कन और इलेक्ट्रिकल पैटर्न रिकॉर्ड करता है। अनियमित धड़कन का पता लगाता है।
3. इकोकार्डियोग्राम (Echocardiogram): अल्ट्रासाउंड तकनीक से वाल्व और ब्लड फ्लो का स्पष्ट चित्र। यह टेस्ट सबसे विश्वसनीय माना जाता है।
4. स्ट्रेस इकोकार्डियोग्राम: ट्रेडमिल या दवा से दिल पर दबाव डालकर पंपिंग क्षमता और वाल्व की कार्यक्षमता देखी जाती है।
5. कार्डियक एंजियोग्राफी: एक कैथेटर के जरिए डाई इंजेक्ट कर ब्लड फ्लो और वाल्व की स्थिति की एक्स-रे इमेजिंग। तब किया जाता है जब अन्य टेस्ट पर्याप्त जानकारी न दें या सर्जरी प्लान हो।
बीमारी की प्रगति को धीमा या रोक सकते हैं। आप जटिलताओं जैसे हार्ट फेल्योर और स्ट्रोक से बचा सकते हैं। सही समय पर सर्जरी या रिपेयर का फैसला हो सकता है और जीवन की गुणवत्ता बेहतर बनी रहती है
दवाइयां: ब्लड प्रेशर कंट्रोल करने, फ्लूइड कम करने और धड़कन सामान्य करने के लिए।
वाल्व रिपेयर (Valve Repair): खराब वाल्व को सर्जरी द्वारा ठीक करना, ताकि वह फिर से सामान्य तरीके से काम करे।
वाल्व रिप्लेसमेंट (Valve Replacement): गंभीर स्थिति में नया वाल्व लगाना (मैकेनिकल या बायोलॉजिकल)।
मिनिमली इनवेसिव प्रक्रियाएं: छोटे चीरे से होने वाली आधुनिक तकनीक, जिससे रिकवरी तेजी से होती है।
रेगुलर हेल्थ चेकअप कराएं, खासकर अगर फैमिली हिस्ट्री हो।
ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल में रखें।
संतुलित आहार लें, नमक और ट्रांस फैट सीमित करें।
धूम्रपान और अत्यधिक शराब से दूरी बनाएं।
दांत और मसूड़ों की सफाई रखें, ताकि बैक्टीरिया से वाल्व को नुकसान न हो।
हल्का व्यायाम और एक्टिव लाइफस्टाइल अपनाएं।
हार्ट वाल्व डिजीज एक गंभीर लेकिन पहचानने योग्य स्थिति है। शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज करने से यह समस्या आगे चलकर जानलेवा हो सकती है। इसलिए अगर आपको सांस लेने में कठिनाई, थकान, सूजन, सीने में दर्द या दिल की धड़कन में बदलाव जैसे लक्षण महसूस हों, तो तुरंत डॉक्टर से मिलें। याद रखें, दिल की सेहत आपका सबसे बड़ा निवेश है। समय पर जांच, सही इलाज और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर आप न सिर्फ हार्ट वाल्व डिजीज को कंट्रोल कर सकते हैं, बल्कि लंबे समय तक स्वस्थ जीवन जी सकते हैं।
हमारे हृदय में कुल 4 वाल्व होते हैं, जिनमें माइट्रव वाल्व, ट्राईकस्पिड वाल्व, एओर्टिव वाल्व और पल्मोनरी वाल्व
यह एक ऐसी स्थति है, जिसमें हार्ट की वाल्व किसी कारण से ठीक से काम करना बंद कर देती है।
सीने में दर्द होना, जी मिचलाना, शरीर के बाएं तरफ दर्द होना आदि हार्ट अटैक के कुछ शुरुआती लक्षण हो सकते हैं।
हृदय से होने वाली कोई भी बीमारी जैसे हार्ट अटैक, हार्ट का रुक जाना (हार्ट फेलियर) और धमनियों से जुड़ी बीमारी आदि