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Bacho Mai Cancer Ka Pata Kaise Kare: भारत में हर साल लगभग 50,000–60,000 नए मामले सामने आते हैं, जो बचपन के कैंसर को एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बनाते हैं। उन्होंने समझाया कि यह बीमारी किन उम्र के बच्चों में अधिक देखने को मिलती है और बच्चों एवं किशोरों में कौन-कौन से कैंसर सबसे आम हैं, यह सभी बातें बहुत जरूरी हैं। इस जानकारी के लिए हमने सआरसीसी चिल्ड्रन हॉस्पिटल की पीडियाट्रिक ऑन्कोलॉजिस्ट सीनियर कंसल्टेंटडॉक्टर प्रीति मेहता से बातचीत की।
डॉ. प्रीति ने कहा कि कुछ लक्षण ऐसे हैं जिन्हें माता-पिता को कभी अनदेखा नहीं करना चाहिए- जैसे लगातार बुखार रहना, बिना वजह वजन घटना, शरीर में गांठ उभरना, लगातार पेट दर्द रहना या बच्चे की आंख में सफेद चमक दिखाई देना आदि। उन्होंने जोर दिया कि इन संकेतों पर समय रहते ध्यान देना बेहद जरूरी है। आइए थोड़ा विस्तार से जानते हैं, डॉक्टर ने और क्या कहा।
सितम्बर का महीना पूरी दुनिया में चाइल्डहुड कैंसर अवेयरनेस महीने के रूप में मनाया जाता है। इसका उद्देश्य समाज में कैंसर के प्रति जागरूकता बढ़ाना, समय पर पहचान को बढ़ावा देना और परिवारों को यह भरोसा दिलाना कि कैंसर से लड़ाई जीती जा सकती है। डॉ. प्रीति ने कहा ‘सही जानकारी और सतर्कता से बच्चों का इलाज आसान हो जाता है और उनकी जिंदगी बचाने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।”
ल्यूकेमिया एक प्रकार का ब्लड कैंसर है, जो आमतौर पर बोन मैरो (हड्डियों की मज्जा) से शुरू होता है। इसमें असामान्य रक्त कोशिकाएं बनती हैं जिन्हें ब्लास्ट्स या ल्यूकेमिया सेल्स कहा जाता है। ये अपरिपक्व कोशिकाएं सामान्य कार्य नहीं कर पाती हैं।
लक्षणों में बार-बार बुखार, थकान, बिना वजह वजन कम होना, चोट लगने पर अधिक खून बहना या शरीर पर नीले निशान पड़ना शामिल हैं। कुछ बच्चों को हड्डियों या जोड़ों में दर्द भी होता है। इसका पता प्रायः ब्लड टेस्ट या बोन मैरो बायोप्सी से चलता है।
हालांकि ल्यूकेमिया का सटीक कारण अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है, लेकिन माना जाता है कि यह बीमारी जेनेटिक (वंशानुगत) और पर्यावरणीय कारकों के संयोजन से उत्पन्न होती है। कुछ जोखिम कारक इसके खतरे को बढ़ा सकते हैं, जैसे कि अत्यधिक विकिरण (रेडिएशन) के संपर्क में आना, बेंज़ीन जैसे हानिकारक रसायनों का असर, पहले कीमोथेरेपी लेना, डाउन सिंड्रोम जैसी अवस्थाएँ या परिवार में पहले से ल्यूकेमिया का इतिहास होना।
ल्यूकेमिया और लिंफोमा, दोनों ही उस व्यापक श्रेणी के कैंसर में शामिल हैं जो खून, बोन मैरो और लिम्फैटिक सिस्टम को प्रभावित करते हैं।
शुरुआती लक्षण- बार-बार बुखार आना, हड्डियों या जोड़ों में दर्द, गर्दन में सूजन, लीवर या प्लीहा (spleen) के बढ़ जाने से पेट में असहजता होना और लगातार थकान बने रहना।
डायग्नोस्टिक चुनौतियां- शुरुआती लक्षण साधारण बीमारियों जैसे लगते हैं, जिससे सही पहचान में देर होती है और इलाज शुरू करने में समय लग जाता है।
जांच- बीमारी की पुष्टि के लिए ब्लड काउंट टेस्ट और बोन मैरो बायोप्सी को अहम माना जाता है।
इलाज की सफलता- विकसित देशों में ALL (एक्यूट लिम्फोब्लास्टिक ल्यूकेमिया) के मामलों में कीमोथेरेपी से 90% से अधिक बच्चों को ठीक किया जा सकता है। हालांकि, भारत में लागत और चिकित्सा सुविधाओं तक सीमित पहुंच जैसी चुनौतियों परिणामों को प्रभावित कर सकती हैं।
पुनरावृत्ति (Relapse)- जब ल्यूकेमिया दोबारा लौटता है, तो और अधिक गहन कीमोथेरेपी और आधुनिक उपचार पद्धतियों की आवश्यकता पड़ती है।
बोन मैरो ट्रांसप्लांटेशन (BMT)- कठिन परिस्थितियों में यह जीवन रक्षक उपाय साबित होता है। इसमें मिलते-जुलते (matched) डोनर से, और कई बार mismatched डोनर से भी बोन मैरो लेकर उपचार किया जा सकता है।
Disclaimer: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।
रक्त कैंसर के 3 प्रकार हैं। इसमें ल्यूकेमिया, लिम्फोमा और मायलोमा शामिल हैं।
रक्त कैंसर की वजह से आपको हड्डियों और जोड़ों में गंभीर दर्द हो सकता है।
स्टेज 4 ब्रेन कैंसर गंभीर और जानलेवा स्थिति हो सकती है। इसमें ट्यूमर मस्तिष्क के अन्य भागों में भी फैल चुका होता है।
50 साल से ऊपर और धूम्रपान या शराब का सेवन करने वाले लोगों में पेट के कैंसर का जोखिम ज्यादा रहता है।