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बोन डेंसिटी को कैसे बढ़ाएं? जानें किन तरीकों से बढ़ती उम्र में भी मजबूत रहेंगी हड्डियां

Bone Density Kaise Thik Kare: हमे लगता है कि हमारी हड्डियां ठीक है, लेकिन वह धीरे-धीरे अपनी डेंसिटी खो रही होती है। आइए डॉक्टर से जानें आप अपनी हड्डियों के घनत्व को कैसे बढ़ा सकते हैं।

बोन डेंसिटी को कैसे बढ़ाएं? जानें किन तरीकों से बढ़ती उम्र में भी मजबूत रहेंगी हड्डियां

Written by Dr Aashish Chaudhry |Updated : February 23, 2026 3:47 PM IST

Bone Density Badhane Ke Liye Kya Kare: हम अक्सर अपनी हड्डियों के बारे में तब सोचते हैं जब दर्द शुरू होता है या किसी जांच में ‘बोन डेंसिटी कम’ आने की बात सामने आती है। लेकिन सच्चाई यह है कि हड्डियों की सेहत पर ध्यान देना 30–35 वर्ष की उम्र के बाद और भी जरूरी हो जाता है। बढ़ती उम्र के साथ शरीर में कैल्शियम का स्तर कम होने लगता है और खासकर महिलाओं में मेनोपॉज के बाद बोन डेंसिटी तेजी से गिर सकती है। मैं मानता हूं कि अगर समय रहते सावधानी न बरती जाए तो ऑस्टियोपोरोसिस और फ्रैक्चर का खतरा बढ़ जाता है।

बोन डेंसिटी क्या है?

बोन डेंसिटी यानी हड्डियों में मौजूद मिनरल्स, खासकर कैल्शियम और फास्फोरस की मात्रा। जब यह घनत्व कम हो जाता है तो हड्डियां कमजोर और भुरभुरी होने लगती हैं। कई बार शुरुआती चरण में कोई लक्षण दिखाई नहीं देते, इसलिए नियमित जांच और सही जीवन शैली बेहद महत्वपूर्ण है।

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वेट-बेयरिंग एक्सरसाइज अपनाएं

केवल चलना ही नहीं, बल्कि ऐसी एक्सरसाइज जो शरीर का वजन हड्डियों पर डाले जैसे तेज चाल से चलना, सीढ़ियां चढ़ना, हल्का जॉगिंग, योग और स्ट्रेंथ ट्रेनिंग, हड्डियों को मजबूत बनाती हैं। सप्ताह में कम से कम 4–5 दिन, 30 मिनट की नियमित शारीरिक गतिविधि से बोन डेंसिटी में सुधार देखा जा सकता है।

कैल्शियम और विटामिन D है आधार

हड्डियों की मजबूती के लिए कैल्शियम सबसे जरूरी तत्व है। दूध, दही, पनीर, हरी पत्तेदार सब्जियां, तिल, सोया और बादाम अच्छे स्रोत हैं। 40 वर्ष के बाद प्रतिदिन पर्याप्त कैल्शियम लेना अनिवार्य हो जाता है। इसके साथ ही विटामिन D जरूरी है, क्योंकि यह कैल्शियम के अवशोषण में मदद करता है। रोज सुबह 15–20 मिनट धूप में बैठना लाभकारी है। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह से सप्लीमेंट भी लिया जा सकता है।

प्रोटीन की सही मात्रा

प्रोटीन केवल मांसपेशियों के लिए ही नहीं, हड्डियों के लिए भी जरूरी है। दालें, राजमा, चना, अंडा, मछली और दूध से मिलने वाला प्रोटीन हड्डियों की मरम्मत और मजबूती में मदद करता है। बहुत अधिक या बहुत कम प्रोटीन दोनों ही नुकसानदायक हो सकते हैं, इसलिए संतुलन जरूरी है।

धूम्रपान और अत्यधिक शराब से बचें

सिगरेट और अधिक शराब का सेवन बोन लॉस को तेज करता है। ये शरीर में कैल्शियम के अवशोषण को कम करते हैं और हड्डियों को कमजोर बनाते हैं। स्वस्थ हड्डियों के लिए इन आदतों से दूरी बनाना जरूरी है।

नियमित जांच कराएं

50 वर्ष की उम्र के बाद या यदि परिवार में ऑस्टियोपोरोसिस का इतिहास हो, तो DEXA स्कैन जैसी बोन डेंसिटी जांच करवाना चाहिए। शुरुआती पहचान से इलाज आसान हो जाता है और फ्रैक्चर का खतरा कम किया जा सकता है।

हार्मोनल बदलाव पर ध्यान दें

महिलाओं में मेनोपॉज के बाद एस्ट्रोजन हार्मोन कम हो जाता है, जिससे हड्डियां तेजी से कमजोर हो सकती हैं। ऐसे में स्त्री रोग विशेषज्ञ और ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ की सलाह लेना आवश्यक है। जरूरत पड़ने पर दवाओं या हार्मोन थेरेपी की सलाह दी जा सकती है।

संतुलित जीवन शैली है कुंजी

पर्याप्त नींद, तनाव नियंत्रण और संतुलित आहार भी हड्डियों की सेहत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। मोटापा भी जोड़ों और हड्डियों पर अतिरिक्त दबाव डालता है, इसलिए स्वस्थ वजन बनाए रखना जरूरी है। हड्डियां हमारे शरीर की नींव हैं। यदि हम समय रहते सही खानपान, नियमित व्यायाम और जांच को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बना लें, तो बढ़ती उम्र में भी हड्डियां मजबूत रह सकती हैं। याद रखें, ऑस्टियोपोरोसिस ‘साइलेंट डिजीज’ है, इसलिए जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव है। सही जानकारी और समय पर कदम उठाकर हम लंबे समय तक सक्रिय और स्वतंत्र जीवन जी सकते हैं।

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Disclaimer: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।

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