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Monkeypox Virus: एमपॉक्स, जिसे पहले मंकीपॉक्स के नाम से जाना जाता था, एक वायरल बीमारी है जो समय पर पहचान और सही उपचार से ठीक हो सकती है। इस बीमारी के लक्षणों को पहचानना और उसे समय पर नियंत्रित करना बेहद जरूरी है, खासकर उन लोगों के लिए जो किसी संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आए हों। आइये जानते हैं कि कैसे पहचानें कि कोई व्यक्ति एमपॉक्स से संक्रमित है?
मंकीपॉक्स एक दुर्लभ गंभीर वायरल बीमारी है, जो मानव के शरीर में जानवरों से फैलती है। इस वायरस का संबंध चेचक से है, लेकिन यह चेचक की तुलना में कम घातक होता है। मंकीपॉक्स पहली बार 1958 में बंदरों में पाया गया था, जिसके बाद मनुष्यों में भी इसके लक्षण देखे गए।
यशोदा हॉस्पिटल की सीनियर कंसल्टेंट, डॉ।छवि गुप्ता कहती हैं कि एमपॉक्स के शुरुआती लक्षणों में बुखार, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, पीठ में दर्द और थकान शामिल हैं। इसके बाद 1-3 दिन में चेहरे पर और शरीर के अन्य हिस्सों में चकत्ते (रैशेज) बन सकते हैं। ये चकत्ते बाद में पस वाली फुंसियों का रूप ले सकते हैं, जो कुछ समय बाद सूखकर गिर जाते हैं।
एमपॉक्स के लक्षणों की पहचान करने के लिए यह जरूरी है कि अगर किसी व्यक्ति को उपरोक्त लक्षण महसूस हो रहे हैं, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें और आवश्यक जांच कराएं।
इस बीमारी के लिए तो कोई वैक्सीन नहीं बनी है लेकिन कुछ ऐसी वैक्सीन हैं जो इसकी रोकथाम में कारगर साबित हो सकती हैं।
ACAM2000: यह वैक्सीन पहले चेचक के लिए विकसित की गई थी, लेकिन अब इसे एमपॉक्स के लिए भी उपयोगी माना जा रहा है।
JYNNEOS (Imvamune/Imvanex): यह एक नई पीढ़ी का टीका है जो विशेष रूप से एमपॉक्स और चेचक के खिलाफ सुरक्षा प्रदान करता है।
मंकीपॉक्स मुख्य रूप से जानवरों से मनुष्यों में फैलता हैं। यह संक्रमित जानवरों के काटने, खरोंचने, उनके शरीर के तरल पदार्थों के संपर्क में आने से फैलता है। इसके अलावा, मंकीपॉक्स संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से भी फैल सकता है।
यशोदा हॉस्पिटल की सीनियर कंसल्टेंट, डॉ।छवि गुप्ता कहती हैं कि एमपॉक्स से बचाव के लिए लक्षणों की पहचान और टीकाकरण दोनों ही आवश्यक हैं। जिन लोगों को इस बीमारी का खतरा हो, उन्हें जल्द से जल्द टीका लगवाना चाहिए। इसके अलावा, यदि किसी को इस बीमारी के लक्षण दिखें, तो उन्हें तुरंत आइसोलेट कर देना चाहिए और चिकित्सीय सलाह लेनी चाहिए। एमपॉक्स के बढ़ते मामलों को देखते हुए यह आवश्यक है कि लोग जागरूक रहें और समय पर आवश्यक कदम उठाएं। बीमारी की पहचान और टीकाकरण से न केवल खुद को सुरक्षित रखा जा सकता है, बल्कि समाज में इसके प्रसार को भी रोका जा सकता है।