
विद्या शर्मा
विद्या शर्मा को डिजिटल मीडिया में लगभग 3 साल का अनुभव है। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता ... Read More
Written By: Vidya Sharma | Updated : November 12, 2025 7:58 PM IST
Medically Verified By: Dr Sandeep Kadian
Pneumonia Or Cold Mai Kya Antar Hai: मौसम में अचानक बदलाव के कारण इन दिनों ज्यादातर लोग सांस से जुड़ी दिक्कतों का सामना कर रहे हैं। कई लोगों को साधारण सर्दी-जुकाम हो रहा है, वहीं निमोनिया के मामलों में भी तेजी से बढ़ोतरी देखी जा रही है। परेशानी यह है कि लोग सर्दी-खांसी और निमोनिया के बीच अंतर नहीं कर पाते और चुपचाप तकलीफ सहते रहते हैं। कई बार लोग निमोनिया को सामान्य सर्दी समझकर इलाज में देर कर देते हैं। सर्दियां भले ही सुहावनी लगती हों, लेकिन यह मौसम फेफड़ों के लिए चुनौती भरा हो सकता है। सर्दी-खांसी और निमोनिया जैसी दिक्कतें इसी मौसम में ज्यादा देखने को मिलती हैं।
लोग अक्सर इन दोनों के बीच का अंतर नहीं समझ पाते और सोचते हैं कि लक्षण अपने आप ठीक हो जाएंगे। लेकिन लापरवाही से सेहत बिगड़ सकती है, इसलिए शरीर के संकेतों को हल्के में न लें। लोग अपने लक्षणों पर ध्यान दें और सही जांच करा पाएं, इसलिए पूरी जानकारी के लिए हमने एम्स हॉस्पिटल, डोंबिवली ईस्ट के पलमोनोलॉजिस्ट डॉक्टर संदीप काडियन से बात की। आज हम आपको इस लेख में डॉक्टर द्वारा बताए सर्दी और निमोनिया के बीच अंतर के बारे में बताने वाले हैं।
हालांकि दोनों ही सांस संबंधी बीमारियां हैं, लेकिन इनकी गंभीरता, कारण और इलाज अलग होते हैं। सर्दी आमतौर पर एक हल्का वायरल इंफेक्शन होता है जो ऊपरी श्वसन तंत्र (नाक और गले) को प्रभावित करता है। वहीं निमोनिया फेफड़ों का गंभीर संक्रमण है, जिसमें फेफड़ों की वायु थैलियों (एयर सैक्स) में सूजन और तरल भराव हो जाता है। जहां सर्दी कुछ दिनों में खुद ठीक हो जाती है, वहीं निमोनिया के लिए समय पर इलाज जरूरी है।
साधारण सर्दी-खांसी होने के कई कारणहैं जैसे - सर्दी ज्यादातर राइनोवायरस या कोरोना वायरस जैसे वायरस से होती है, जो खांसने, छींकने या संक्रमित सतह को छूने से फैलते हैं। अगर सर्दी का ध्यान न रखा जाए, तो साइनस इंफेक्शन, कान का इंफेक्शन, या अस्थमा के लक्षण बढ़ना जैसी दिक्कतें हो सकती हैं।

सर्दी-खांसी का कोई खास इलाज नहीं होता, लेकिन कुछ उपाय राहत दे सकते हैं-
निमोनिया बैक्टीरिया (जैसे Streptococcus pneumoniae), वायरस या फंगस से हो सकता है। यह अक्सर सर्दी या फ्लू के बाद होता है, जब शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है। अगर इलाज में देर हो जाए तो श्वसन विफलता (Respiratory failure), सेप्सिस, या फेफड़ों में पानी भरना (Pleural effusion) जैसी गंभीर स्थिति बन सकती है। कमजोर रोग-प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों, बुजुर्गों और बच्चों के लिए यह जानलेवा हो सकता है।

निमोनिया को कभी भी साधारण सर्दी समझने की गलती न करें। जहां सर्दी 3–4 दिनों में ठीक हो जाती है, वहीं निमोनिया फेफड़ों में सूजन और तरल भराव पैदा करता है, जिससे शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती और सांस लेने में दिक्कत होती है। अगर इसे अनदेखा किया गया, तो यह फेफड़ों को नुकसान पहुंचा सकता है खासकर बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर प्रतिरक्षा वाले लोगों में। इसलिए समय पर इलाज करवाना जरूरी है ताकि रोगी जल्दी और पूरी तरह ठीक हो सके।
Disclaimer: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।
निमोनिया से बचाव के लिए टीकाकरण बहुत जरूरी है।
खांसी, बुखार, सीने में दर्द ,मांसपेशियों में दर्द आदि निमोनिया के लक्षण हो सकते हैं।
यह आमतौर पर जीवाणु संक्रमण के कारण होता है।
बैक्टीरियल निमोनिया के लक्षणों में 1 से 2 सप्ताह में सुधार हो सकता है, लेकिन पूरी तरह ठीक होने में 4 से 6 सप्ताह तक लग सकते हैं।