गर्दन का दर्द कहीं सर्वाइकल तो नहीं, जानें कैसे करें पहचान

जब बीमारी बड़ी हो जाती है तो यही दर्द भयंकर हो जाता है। इसे सर्वाइकल डिजेनरेटिव डिस्क भी कहा जाता है।

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Written By: akhilesh dwivedi | Updated : September 21, 2018 7:58 PM IST

गर्दन में होने वाले दर्द को आप भी करते हैं इग्नोर ? जब कभी आप छुककर कर रहे होते हैं काम तो गर्दन में आ जाती है अकड़न ? जी कुछ ऐसे ही लक्षण है सर्वाइकल के जो अक्सर लोगों द्वारा इग्नोर किया जाता है। जब बीमारी बड़ी हो जाती है तो यही दर्द भयंकर हो जाता है। इसे सर्वाइकल डिजेनरेटिव डिस्क भी कहा जाता है। बढ़ती उम्र और कमजोरी की वजह से यह बीमारी ज्यादा होती है। महिलाओं में प्रेगनेंसी और हार्मोनल बदलाव की वजह से भी सर्वाइकल होने की संभावना ज्यादा होती है। उठने-बैठने के गलत तरीकों की वजह से भी यह बीमारी होती है। अगर आपको भी कुछ इस तरह का गर्दन में दर्द होता है तो आप इसकी तुरंत जांच करा लें। आइए जानते हैं सर्वाइकल के लक्षण, कारण और इलाज।

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क्या है लक्षण

  • गर्दन में हमेशा खिंचाव रहना।
  • गर्दन छुकाने और हिलाने में दर्द होना।
  • शरीर के अंगों में जकड़न महसूस होना।
  • कुछ मामलों में चक्कर और उल्टिया आना।
  • सिर में पीछे की ओर दर्द का होना और भारीपन रहना।
  •  कंधों में दर्द और जकड़न रहना।
  • हाथों में सुन्नपन होना या झनझनाहट लगना।
  • सर्वाइकल की बीमारी अगर बढ़ रही है तो चक्कर और उल्टियां भी हो सकती है।

कारण

सर्वाइकल डिजेनरेटिव डिस्क रोग का कारण गर्दन की डी-जेनरेशन वाली नसों पर दबाव पड़ना है। ये दबाव आमतौर पर ज्यादा काम करने, भारी बोझ उठाने, हड्डियों के कमजोर होने, लगातार काम करने, सिर झुकाकर काम करने, सिर झुकाकर लगातार पढ़ने और गर्दन पर किसी चोट के कारण हो सकता है।

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इलाज

इस दर्द को ठीक करने के लिए कैस्टर ऑयल थेरैपी या हॉट एंड कोल्ड थेरैपी बेहतर है। इन थैरेपीज से गर्दन की मांसपेशियों व टिशूज को लचीला बनाया जाता है जिससे डिसार्डर टिशूज का एलाइनमेंट किया जाता है। इस थैरेपी को एक या दो बार करने से डिस्क के नर्व पर पड़ने वाला दबाव कम हो जाता है और गर्दन में पहले की तरह लचीलापन आ जाता है। इसके अलावा हल्की एक्सरसाइज करने से दर्द कम होने लगता है।

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