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teleconsultation
पिछले कुछ समय से हमारा देश आधुनिक तकनीकों का धड़ल्ले से प्रयोग कर रहा है जिनका हमें काफी सकारात्मक असर दिखा है। फिर चाहे वह इलेक्ट्रानिक स्क्रीनों और उपकरण हों या फिर कोई अन्य नवीनतम तकनीक, ये सभी हमें प्रगति के अवसरों की ओर ले जा रहे हैं। इन्हीं में से एक है टेलीकन्सल्टेशन। यह एक ऐसी सर्विस है जिसमें फोन पर ही डॉक्टर को अपनी बीमारी और लक्षणों के बारे में बताकर मरीज संपूर्ण इलाज और जरूरी दवाईयां प्राप्त कर लेता है। इस प्रक्रिया में डॉक्टर से बात करने से लेकर फीस जमा कराने तक, सब कुछ ऑनलाइन होता है।
अभी तक टेलीकन्सल्टेशन का प्रयोग अमेरिका, इटली और जापान जैसे बड़े बड़े देशों में होता था, लेकिन पिछले कुछ समय से खासकर कोरोनावायरस के चलते हमारे देश में भी टेलीकन्सल्टेशन का प्रयोग बढ़ गया है। आज डॉक्टर्स डे के मौके पर मैक्स हेल्थकेयर व सीनियर डायरेक्टर-इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनल मेडिसिन के ग्रुप मेडिकल डायरेक्टर डॉक्टर संदीप बुद्धीराजा व पद्म श्री सम्मानित भारतीय चिकित्सक और हृदय रोग विशेषज्ञ डॉक्टर के के अग्रवाल हमें टेलीकन्सल्टेशन के लाभ, सावधानियों और टेलीकन्सल्टेशन के दौरान एक मरीज को किन बातों का ख्याल रखना चाहिए इसके बारे में बता रहे हैं। तो आइए जानते हैं, वो अहम बातें जिसे हम सभी को टेलीकन्सल्टेशन के दौरान याद रखनी चाहिए।
प्रश्न 1. इम्युनिटी बढ़ाने के लिए कौन से विटामिंस जरूरी हैं?
उत्तर- डॉक्टर संदीप बुद्धीराजा कहते हैं कि अगर कोई व्यक्ति अच्छा लाइफस्टाइल और संतुलित डाइट लेता है तो उसे किसी तरह सप्लीमेंट या मल्टीविटामिंस की जरूरत नहीं होती है। लेकिन फिर भी इन दिनों कोरोना काल में हर व्यक्ति को अपनी इम्युनिटी को दोगुना स्ट्रॉंग करने की जरूरत है। ऐसे में अपनी डाइट में जिंक, विटामिन-बी और विटामिन-सी लेने की जरूरत है। साथ ही अगर बात करें आयुर्वेदिक और होमयोपैथी दवाओं की तो उन्हीं चीजों का सेवन करें जिनके बारे में आपको पूरी जानकारी हो। क्योंंकि आजकल लोग इम्युनिटी बढ़ाने के नाम पर कुछ भी खा रहे हैं। केवल उन्हीं चीजों का सेवन करें जिनके बारे में पूरी जानकारी हो।
प्रश्न 2. पहली टेलीकन्सलटेशन के दौरान किन बातों का ध्यान रखा जाना चाहिए?
उत्तर- डॉक्टर के के अग्रवाल कहते हैं कि पहली टेलीकन्सलटेशन कभी भी फोन पर नहीं होनी चाहिए। अगर डॉक्टर और मरीज के बीच में पहले कभी फेस-टू-फेस मीटिंग हुई है तभी फोन पर कन्सल्ट किया जाना चाहिए। इससे डॉक्टर को मरीज की मेडिकल हिस्ट्री पता होगी जिससे इलाज में मदद मिलेगी साथ ही डॉक्टर और मरीज एक दूसरे के साथ कम्फरटेबल भी फील करेंगे। लेकिन यदि पहले कभी डॉक्टर और मरीज में फेस-टू-फेस मीटिंग नहीं हुई है और वर्तमान में संभव नहीं है तो कोशिश करनी चाहिए कि पहली कन्सल्टेशन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के द्वारा हो। इससे मरीज को अपनी बता रखने में झिझक नहीं होगी।
प्रश्न 3. टेलीकन्सलटेशन के क्या लाभ हैं?
उत्तर- इस सवाल का जवाब देते हुए डॉक्टर के के अग्रवाल ने बताया कि टेलीकन्सल्टेशन का सबसे बड़ा लाभ यह है कि इस दौरान मरीज और डॉक्टर दोनों एक दूसरे की बातों को रिकॉर्ड कर सकते हैं। अगर कोई मरीज फेस-टू-फेस डॉक्टर से कन्सल्ट करता है तो उसे डॉक्टर की बात को रिकॉर्ड करने की इजाजत नहीं है। जबकि टेलीकन्सलटेशन के दौरान ऐसा किया जा सकता है। इससे डॉक्टर और मरीज के बीच में विश्वास की डोर मजबूत होती है और मरीज डॉक्टर द्वारा बताई गई हर बात को गंभीरता से फॉलो करता है।
प्रश्न 4. टेलीकन्सलटेशन के दौरान मरीज को किस तरह तैयार होना चाहिए?
उत्तर- डॉक्टर संदीप बुद्धीराजा कहते हैं कि टेलीकन्सलटेशन से पहले मरीज का अपने सभी डॉक्यूमेंट्स और रिपोट्रर्स के साथ तैयार होना बहुत जरूरी है। समय बचाने और बेहतर कम्युनिकेशन के लिए डॉक्टर के साथ कनेक्ट होने से पहले अपनी सभी मेडिकल पेपर्स साथ में रखें। क्योंकि आप डॉक्टर से फेस टू फेस नहीं मिल रहे हैं ऐसे में पेपर्स और रिपोर्ट साथ होंगी तो डॉक्टर को आपकी मेडिकल हिस्ट्री समझने में आसनी होगी।
प्रश्न 5. टेलीकन्सलटेशन के क्या नुकसान हैं?
उत्तर- जब टेलीकन्सलटेशन के लिए कोई मरीज एप या वेबसाइट के माध्यम से स्पेशलिस्ट ढूढंता है तो यह जरूरी नहीं कि उसे उसकी पसंद का डॉक्टर मिले। डॉक्टर के के अग्रवाल कहते हैं कि कुछ नामी एप्स और वेबसाइट को छोड़ दें तो कई जगह फ्रॉड डॉक्टर मिलने की भी गुंजाइश रहती है। जिसके पास न ही संबंधित बीमारी की विश्वसनीय डिग्री होती है और न ही अनुभव होता है। कई बार तो डॉक्टर की लोकेशन भारत दिखाती है, लेकिन वह दुनिया के किसी भी कोन में हो सकते हैं। साइड इफेक्ट मिलने के बाद जब मरीज फिर से उस डॉक्टर से फॉलो करने की कोशिश करता है तो डॉक्टर अनुपलब्ध दिखा सकते हैं। इसलिए टेलीकन्सलटेशन के दौरान मरीज को इन बातों का भी ध्यान रखना चाहिए।