
विद्या शर्मा
विद्या शर्मा को डिजिटल मीडिया में लगभग 3 साल का अनुभव है। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता ... Read More
Written By: Vidya Sharma | Published : May 22, 2026 2:21 PM IST
Medically Verified By: Dr. Saraswati Kushwah
Image Credit- ChatGPT
Fever Or Heat Stroke Mai Kya Antar Hai: गर्मियों का मौसम शुरू होते ही हमारी कई तरह की बीमारियां होनी भी शुरू हो जाती है। खासकर बुखार, लेकिन इसी मौसम में हीट स्ट्रोक भी बहुत ही ज्यादा होता है। ऐसे में लोग कंफ्यूज हो जाते हैं कि आखिर उनका शरीर बुखार से तप रहा है या फिर हीट स्ट्रोक से। गर्मी के मौसम में तेज बुखार, कमजोरी और शरीर का तापमान बढ़ना बुहत ही आम बात है। लेकिन कई लोग बुखार लू लगने पर होने वाली तपन को एक ही समस्या समझ लेते हैं।
पारस हेल्थ, कानपुर के इंटरनल मेडीसिन कंसल्टेंट डॉक्टर सरस्वती कुशवाह बताती हैं कि यह दोनों पूरी तरह अलग स्थितियां हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि अगर सही समय पर हीट स्ट्रोक की पहचान न की जाए तो यह गंभीर और जानलेवा भी बन सकता है।’ ऐसे में यह समझना जरूरी है कि इन दोनों में फर्क कैसे पहचाना जाए। इसलिए आज हम आपको इस लेख में फीवर और हीट स्ट्रोक के बीच के अंदर को बताने वाले हैं, ताकी आप इन्हें पहचान पाएं।
डॉक्टर बताते हैं कि फीवर आमतौर पर शरीर में किसी इंफेक्शन के कारण होता है। वायरल, बैक्टीरियल इंफेक्शन, फ्लू या अन्य बीमारियों के दौरान शरीर का टैम्प्रेचर बढ़ जाता है। वैसे तो यह हमारी बॉडी की नेचुरल प्रतिक्रिया होती है, जिससे वह इंफेक्शन से लड़ने की कोशिश करता है। इस दौरान अक्सर व्यक्ति को-
अगर किसी व्यक्ति को बुखार है तो उसे आराम करने और पानी पीने से राहत मिल सकती है और दवाइयां खाकर भी इसे कंट्रोल किया जा सकता है।
वहीं दूसरी ओर हीट स्ट्रोक के बारे में डॉक्टर बताते हैं कि यह गर्मी की वजह से होने वाली एक गंभीर स्थिति है। जब कोई व्यक्ति लंबे समय तक तेज धूप, गर्म वातावरण या अत्यधिक तापमान में रहता है, तो शरीर अपनी नेचुरल कूलिंग सिस्टम यानी पसीने के जरिए तापमान कंट्रोल नहीं कर पाता। ऐसे में बॉडी का टेम्परेचर तेजी से बढ़कर 104°F या उससे अधिक हो सकता है। इसे मेडिकल इमरजेंसी माना जाता है।
डॉक्टर बताते हैं कि हीट स्ट्रोक में सबसे बड़ा फर्क यह होता है कि इसमें व्यक्ति को ठंड नहीं लगती, बल्कि शरीर असामान्य रूप से गर्म महसूस होता है। कई मामलों में पसीना आना भी बंद हो जाता है और स्किन रेड और डाई हो जाती है। मरीज को चक्कर आना, उल्टी, तेज सिरदर्द, सांस फूलना, दिल की धड़कन तेज होना और मानसिक भ्रम जैसी समस्याएं होती हैं। स्थिति ज्यादा बिगड़ जाए तो व्यक्ति बेहोश भी हो सकता है। ऐसे में धूप या गर्मी में लंबे समय तक नहीं रहना चाहिए।
फीवर और हीट स्ट्रोक के बीच एक और महत्वपूर्ण अंतर यह है कि बुखार में शरीर का तापमान खुद बढ़ाता है ताकि इंफेक्शन से लड़ने की हिम्मत मिले। वहीं हीट स्ट्रोक में बाहर की गर्मी के कारण शरीर का तापमान बिगड़ जाता है। बुखर में मरीज को पसीना आता है और दवा लेने के बाद राहत मिल जाती है, लेकिन हीट स्ट्रोक में तुरंत शरीर को ठंडा करना जरूरी होता है।
ऐसी स्थिति आने पर डॉक्टर व्यक्ति को किसी ठंडी या छायादार जगह पर ले जाने की सलाह देते हैं। साथ ही शरीर पर ठंडे पानी की पट्टियां लगाने की हिदायत दी जाती है ताकि गर्मी को कम किया जा सके। इसके अलावा अपने बैग में एक पाउच ओआरएस या इलेक्ट्रॉल रखें और पिएं। साथ ही साथ तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है, क्योंकि इलाज में देरी खतरनाक साबित हो सकती है।
डिस्क्लेमर: गर्मियों में सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव है। ऐसे में आप तेज धूप में निकलने से बचें, पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं और हल्के कपड़े पहनें। सही जानकारी और समय पर पहचान से ही फीवर और हीट स्ट्रोक जैसी स्थितियों से सुरक्षित रहा जा सकता है।