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एच1एन1 और डेंगू में क्या अंतर है?
बारिश के इस मौसम में बुखार होने पर अक्सर लोगों को समझ नहीं आता कि यह वायरल बीमारी है या डेंगू जैसी मच्छर से फैलने वाली बीमारी भी हो सकती है। आजकल वैसे भी वायरल फीवर के बहुत से केस आ रहे हैं। इनमें से कुछ मामले डेंगू के हैं, जबकि कुछ H1N1 के भी हो सकते हैं। दोनों में बुखार होने के कारण लोग इनके बीच अंतर नहीं कर पाते हैं। लेकिन ये दोनों अलग-अलग वायरस से होने वाली बीमारियां हैं और इनके फैलने का तरीका भी अलग है।
सिर्फ बुखार देखकर बीमारी का पता लगाना सही नहीं है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, H1N1 एक इन्फ्लूएंजा ए वायरस है। आज से लगभग 17 साल पहले, यानी 2009 में इससे महामारी फैली थी और बाद में यह सीजनल इन्फ्लुएंजा वायरस के रूप में सर्कुलेट करता रहा। वहीं, डेंगू वायरस से होने वाली बीमारी है, जो संक्रमित मच्छर के काटने से फैलती है। इसमें बुखार के साथ-साथ कई अन्य लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं। आइए हम आपको इन दोनों के बीच के अंतर को बताते हैं, साथ ही जानें कि किस बुखार में तुरंत अस्पताल जाना चाहिए।
वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन के अनुसार H1N1एक इन्फ्लूएंजा ए वायरस है। जेनेटिक एनालिसिस से पता चला था कि इस वायरस में इंसानों, पक्षियों और सूअरों में पाए जाने वाले इन्फ्लुएंजा वायरस के जीन के मिश्रण से जुड़े हिस्से थे।
वहीं, डेंगू (DENV) वायरस से होने वाली बीमारी है। यह संक्रमित मच्छर के काटने से फैलती है। बता दें कि डेंगू मुख्य रूप से एडीज मच्छर के जरिए फैलता है। इसलिए अगर आपको बुखार हो जाए तो उसे मच्छर के काटने से न जोड़ें। किस कारण से बुखार आया है, उस बीमारी का पता लगाने के लिए डॉक्टर के पास जरूर जाएं।
WHO के अनुसार, डेंगू होने पर लोगों में तेज बुखार, तेज सिरदर्द, आंखों के पीछे दर्द, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द, मतली, उल्टी, सूजी हुई ग्लैंड्स और त्वचा पर रैश हो सकते हैं। ये लक्षण आमतौर पर संक्रमण के 4–10 दिन बाद दिखाई दे सकते हैं और 2–7 दिन तक रह सकते हैं। तो समझें कि अगर आपको बुखार के साथ आंखों के पीछे दर्द, मांसपेशियों और जोड़ों में तेज दर्द या त्वचा पर रैश जैसे लक्षण दिखाई दे रहे हैं, तो डेंगू की संभावना को नजरअंदाज न करें।
वहीं H1N1 में आमतौर पर ये लक्षण देखे जा सकते हैं- अचानक बुखार आना, खांसी, खासकर सूखी खांसी, गले में खराश, नाक बहना या नाक बंद होना, सिरदर्द, मांसपेशियों और शरीर में दर्द, बहुत ज्यादा थकान और कमजोरी, कुछ लोगों में ठंड लगना और कंपकंपी भी हो सकती है।
डेंगू में एक महत्वपूर्ण बात यह है कि गंभीर बीमारी के वार्निंग साइन कई बार बुखार कम होने के बाद दिखाई देते हैं। WHO के अनुसार, गंभीर डेंगू के चेतावनी संकेत कई बार बुखार कम होने के बाद दिखाई देते हैं। इसमें तेज पेट दर्द, लगातार उल्टी, तेजी से सांस लेना, नाक या मसूड़ों से खून आना, उल्टी या मल में खून, बहुत ज्यादा कमजोरी, बेचैनी, ज्यादा प्यास या त्वचा का पीला और ठंडा पड़ना गंभीर डेंगू के संकेत हो सकते हैं। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए।
सिर्फ लक्षण देखकर H1N1 और डेंगू की पक्की पहचान करना मुश्किल है। दोनों में बुखार, कमजोरी और शरीर में दर्द जैसे लक्षण हो सकते हैं। इसलिए जरूरी है कि बुखार होने पर डॉक्टर से जांच और जरूरी टेस्ट जरूर करवाएं।
WHO के अनुसार, H1N1 (2009) वायरस अब मौसमी इन्फ्लुएंजा वायरस के रूप में सर्कुलेट करता है और मौसमी फ्लू वैक्सीन में शामिल है। साथ ही बीमार व्यक्ति से करीबी संपर्क से बचें, खांसते या छींकते समय मुंह-नाक ढकें, बाहर से आने के बाद और खाना खाने से पहले साबुन-पानी से हाथ अच्छी तरह धोएं, बीमार होने पर घर पर आराम करें, भीड़भाड़ वाली जगहों पर सावधानी रखें और तेज बुखार, खांसी, सांस लेने में परेशानी या हालत बिगड़ने जैसे लक्षणों को नजरअंदाज न करें।
डब्लूएचओ के अनुसार डेंगू से बचाव का मुख्य तरीका मच्छरों के काटने से बचना और उनकी ब्रीडिंग साइट को खत्म करना होता है। इसके अलावा शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनें, मॉस्किटो रिप्लीकेंट का इस्तेमाल करें और खिड़कियों और दरवाजों पर जाली लगाएं। घर में पानी जमा होने वाली जगहों को भी साफ करना बहुत जरूरी है।
डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। इसमें दी गई जानकारी WHO के उपलब्ध स्रोतों पर आधारित है और यह किसी चिकित्सीय जांच, निदान या उपचार का विकल्प नहीं है। अगर आपको बुखार लगातार बना हुआ है, शरीर में अत्यधिक कमजोरी महसूस हो रही है या ऊपर बताए गए गंभीर लक्षण दिखाई दे रहे हैं, तो इसे अनदेखा न करें और तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।