बरसात में कोविड और डेंगू-मलेरिया के लक्षणों में यूं समझें अंतर,साथ ही जानें कौन-सी बीमारी में कौन-सा टेस्ट है कराना है जरूरी

इन बीमारियों के लक्षण और कोरोना वायरस से होने वाले संक्रमण के कुछ लक्षण एक जैसे होते हैं और इसी के कारण लोगों को कई बार कोविड और डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों के लक्षणों के बीच अंतर समझने में मुश्किल होती है।

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Written By: Sadhna Tiwari | Updated : July 2, 2022 7:01 AM IST

बरसात का मौसम मच्छर-जनित बीमारियों का भी मौसम होता है क्योंकि, बारिश के दिनों में ही मच्छरों को अंडे देने और पनपने के लिए अनुकुल मौसम (mosquito breeding season) मिलता है। जब ये मच्छर किसी व्यक्ति को काट लेते हैं तो डेंगू (Dengue) मलेरिया (Malaria),  और चिकनगुनिया (Chikungunya) जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इन बीमारियों के लक्षण और कोरोना वायरस से होने वाले संक्रमण के कुछ लक्षण एक जैसे होते हैं और इसी के कारण लोगों को कई बार कोविड और डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों के लक्षणों के बीच अंतर समझने में मुश्किल होती है।  डॉ. भाविनी शाह (Dr. Bhavini Shah, head of Microbiology, Neuberg Supratech Reference Laboratories) का कहना है कि, ­­मलेरिया, डेंगू और चिकनगुनिया जैसी बीमारियों का प्रसार मच्छरों (mosquito) के जरिए होती है लेकिन, कोविड संक्रमण का प्रसार किसी जीव के कारण नहीं होता और इसीलिए,कोरोना संक्रमण के प्रसार से बचने के लिए मास्क पहनने की जरूरत पड़ती है और मानसून की बीमारियों के लिए मच्छरों से बचने की जरूरत पड़ती है।

मानसून की बीमारियों और कोविड के लक्षणों में क्या अंतर है?

डॉ.भाविनी शाह ने कहा कि, चिकनगुनिया की बीमारी के मुख्य लक्षण (Common symptoms for chikungunya) हैं बुखार (fever), जोड़ों में दर्द (joint pain), सिरदर्द (headache), रैशेज (rashes), सूजन ( mild swelling) जबककि, डेंगू के शुरूआती लक्षणों में ये समस्याएं दिखायी देती हैं

  • बुखार (fever)
  • जोड़ों का दर्द ( joint pain) और मांसपेशनियों में दर्द (Muscle pain)
  • सिरदर्द (Headache)
  • रैशेज (rashes)

वहीं, चिकगुनिया में सूजन की समस्या थोड़ी गम्भीर हो सकती है। जबकि, मलेरिया में रोजाना या एक दिन के अंतर पर रह-रहकर तेज बुखार हो सकता है।  जबकि इसके साथ तेज बदन दर्द (severe body ache), कंपकंपी और ठंड ( body chills), बहुत अधिक पसीना (sweating), डायरिया (diarrhea), दिल की धड़कन तेज होना (fast heart rate), उलझन (mental confusion) जैसे लक्षण भी दिखायी दे सकते हैं जो जॉन्डिस (jaundice) का कारण बन सकता है।

कोविड के लक्षण क्या है?

वहीं, कोरोना संक्रमण होने पर लोगों को इस तरह की जैसी समस्याए हो सकती हैं-

  • बुखार (Fever) और सूखी खांसी (dry cough)
  • त्वचा पर रैशेज (rash on the skin)
  • पैरों और हाथों की उंगलियों की रंगत बदलने (discoloration of fingers or toes)
  • दर्द  (aches and pains) और  थकान(tiredness)
  • सांस लेने से जुड़ी समस्याएं ( difficulty in breathing)
  • रुक-रुककर सांस आना (shortness of breath)
  • सिरदर्द ( headache)
  • स्वाद और सूंघने की क्षमता कम होना( loss of taste and smell)
  • डायरिया (diarrhea), गले में तकलीफ ( sore throat),
  • सीने में दर्द और दबाव (chest pain or pressure)
  • चलने-फिरने और बोलने में परेशानी (loss of speech or movement)

कोविड और मच्छर-जनित बीमारियों का निदान कैसे किया जाता है?

इन बीमारियों का डायग्नोसिस करने और इन बीमारियों के प्रबंधन के लिए विभिन्न प्रकार के टेस्ट और स्क्रिनिंग किए जाते हैं।जैसे-

  • चिकनगुनिया के लिए एलिसा एंटीबॉडी टेस्ट  (Elisa Antibody test) किया जाता है जो आईजीम एंटीबॉडी (IgM antibody) का पता लगने के 5वें या 6वें दिन किया जाता है।
  • वहीं, आईजीजी एंटीबॉडी टेस्ट (IGG antibody) 7वें दिन किया जाता है।
  • जबकि चिकनगुनिया का पता लगाने के लिए चिकनगुनिया पीसीआर टेस्ट (Chikungunya PCR) भी किया जा सकता है।

डेंगू

  • डेंगू की बीमारी के निदान के लिए डेंगू पीसीआर गोल्ड स्टैंडर्ड (Dengue PCR Gold standard ) और एनएस1 एंटीजेन  (NS1 Antigen) टेस्ट किए जाते हैं जो लक्षण दिखने के बाद 3-5 दिन के भीतर किया जाता है।
  • एलिसा एंटीबॉडी टेस्ट

मलेरिया

  • पीसीआर मलेरिया टेस्ट (PCR for malaria)
  • क्यूबीसी (Quantitative buddy coat)
  • रैपिड मलेरिया एंटीजेन टेस्ट (Rapid malaria antigen test )स्मियर स्टडी (Smear study)

वहीं कोविड-19 संक्रमण के निदान (Covid-19  diagnosis) के लिए आरटी-पीसीआर टेस्ट (RT-PCR) किया जाता है।

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