Asthma के मरीज़ कैसे चुन सकते हैं अपने लिए सही इंहेलर

जब खरीदना हो अस्थमा इंहेलर तो रखिए कुछ बातों का ध्यान।

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Written By: Editorial Team | Published : March 2, 2018 12:11 AM IST

अस्थमा इन्हेलर, जो फेफड़ों तक आवश्यक दवा पहुंचाने में मददगार और संभालने में आसान होते हैं और इनके कई प्रकार बाज़ार में उपलब्ध हैं। मरीज़ की स्थिति के अनुसार आवश्यक और सही इन्हेलर खरीदना एक मुश्किल काम हो सकता है। डॉ. बृग अशोक के. राजपूत(रिटायर्ड), एमडी (चेस्ट), डीटीसीडी, डीएनबी और वेंकटेश्वर हॉस्पिटल, द्वारका, नई दिल्ली में सीनीयर कंसल्टेंट, बता रहे हैं सांस की बीमारियों से परेशान मरीज़ों के लिए सही इन्हेलर खरीदने के फायदे और उसके इस्तेमाल की तकनीक। एयरोसोल या इंहेलेशनल थेरेपी (inhalational therapy) जो फेफड़े के तीव्र और क्रोनिक रोगों के उपचार का एक अनिवार्य हिस्सा है। उसकी प्रभावशीलता इन तीन बातों पर निर्भर करती है-

1. सही उपकरण का चयन

2. इंहेलर इस्तेमाल करने का तरीका

3. किसी विशेष स्थिति के लिए ली जानेवाली दवाइयां

इंहेलर के 3 सर्वाधिक प्रयोग किए जानेवाले प्रकार-

1. (प्रेशराइज़्ड मीटर्स डोज़ इंहेलर-pMDI)

पिछले 30 वर्षों से इंहेलर का यह प्रकार ज़्यादातर मरीज़ इस्तेमाल करते आ रहे हैं। इसमें दवा, प्रणोदक या प्रपेलन्ट (propellant- HFA (Hydro Fluoro Alkane) और आर्द्रक या सर्फैक्टन्ट (surfactant- sorbitan trioleate, lecithin or oleic acid) होती हैं जो छोटे कणों के एकत्रीकरण को रोकने के लिए और also दवा निलंबन की शारीरिक स्थिरता में सुधार करने में मदद करती हैं। वाल्व मापा हुआ होता है इसलिए हर गतिविधि के साथ एक निश्चित मात्रा में दवा वाले मिश्रण का वितरण होता है। इसीलिए इस उपकरण को मीटर्ड डोज़ इन्हेलर (Metered Dose Inhaler-MDI) कहा जाता है।

एमडीआई के प्रयोग का तरीका

1. माउथपीस (इंहेलर का वो हिस्सा जो मुंह को लगाया जाता है) से कैप हटाइए इंहेलर को 3-4 बार हिलाएं।

2. इंहेलर को सीधा पकड़ें।

3. सर को पीछे की तरफ 45 डिग्री तक घुमाएं ताकि श्वासनली और मौखिक गुहा खुल सके।

4. धीरे-धीरे सांस छोड़ते हुए फेफड़ों को खाली करें।

5. इंहेलर माउथपीस को होठों के बीच रखें और मुंह से संभालने की कोशिश करें।

6. इंहेलर को चालू करते हुए धीरे-धीरे सांस खींचें और गहरी करते जाएं ताकि इंहेलर से निकली दवा फैरिंगक्स तक पहुंचे सके।

7. मरीज़ को 5 सेकंड तक इंहेल करना चाहिए ताकि फेफड़े पूरी तरह से भर जाएं।

8. 10 सेकंड या जितनी देर तक हो सके सांस रोकें (10 तक गिनती करते हुए।)

9. धीरे से मुंह की बजाय नाक से सांस छोड़ें। ताकि ऑरो फरेंनजिल(oro-pharangial) के संचय को रोका जा सके, यह प्रक्रिया छींक को रोकने के साथ म्यूकोस (mucosa) को भी संवेदनशील बनाता है।

10. 3-5 मिनट के बाद आप दूसरी बार दवा ले सकते हैं।

11. कॉम्बिनेशन थेरेपी में 2 कश लेने के बाद मुंह और फैरिंगक्स को पानी से साफ करें।

ब्रीद अक्यूटेड एमडीआई(Breath actuated MDI)- इस प्रक्रिया में मरीज के श्वसन प्रभाव को वाल्व या इनहेलर को उकसाने की आवश्यकता होती है। यह श्वसन प्रवाह को प्रतिक्रिया देता है, इसके लिए कम ट्रेनिंग की आवश्यकता पड़ती है, इसे सीखना आसान है और इसे दवा के कई फार्मूलों के साथ इस्तेमाल किया गया है। यह बैड पीएमडीआई कोऑर्डिनेशन से पीड़ित लोगों के लिए भी फायदेमंद है।

2. ड्राई पावडर इंहेलर (DPI)

• सांस द्वारा परिचालित और एक या कई दवाओं के साथ इस्तेमाल किया जाता है।

• मरीज़ की श्वास के ज़रिए दवा का प्रसार कर सकता है, उन्हें वाहक अणुओं (carrier molecules) से अलग करता है और फेफड़ों में एक अनुपात बनाता है।

• समन्वय में कोई समस्या नहीं आती लेकिन श्वास के अच्छे प्रवाह की आवश्यकता होती है।

डीपीआई के इस्तेमाल की सही तकनीक

1. उपकरण लीजिए और उसे असेम्बल कीजिए।

2. दवा लोड कीजिए।

3. अपना सर को नीचे की तरफ झुकाते हुए माउथपीस को मुंह के पास रखें।

4. सर को थोड़ा टेढ़ा करें।

5. धीरे से सांस छोड़ते हुए फेफड़ों को खाली करें।

6. माउथपीस को होठों से कसकर पकड़ें।

7. तुरंत दवा खींचे (2-3 सेकंड तक) और गहरी सांस लें (एक मिनट में 60ली से कम दवा खींचने की गति से)

8. इंहेलर हटाएं और सामान्य गति से सांस लें।

3. नेब्यलाइज़र (Nebulizers)

• अपेक्षाकृत कम प्रभावी।

• 1-5% मामलों में एयरवेज कम करने के लिए दिया जाता है।

• पर्यावरण को बहुत अधिक नुकसान, चेहरे, आंखों और श्वसन प्रणाली के ऊपरी हिस्सों पर असर।

ध्यान में रखने लायक मुख्य बातें

• एयरोसोल थेरेपी में पिछले 50 साल से सांसों में रूकावट संबंधी बीमारियों के प्रबंधन के लिए इस्तेमाल की जाती रही है और हाल के दिनों में इसमें प्रगति देखी गयी है।

• दवाइयों के विभिन्न फॉर्मूलों के साथ एयरोसोल जनरेटर्स बाज़ार में उपलब्ध हैं लेकिन कुल दवा का कुछ अंश अभी भी बच जाता है।

• विभिन्न उपकरणों के इस्तेमाल के फायदे और नुकसान हैं।

• एमडीआई (वाल्व्ड स्पेसर वाला या बिना) एक ऐसे उपकरण के तौर पर उभरा है जिसकी सलाह ज़्यादातर लोगों को दी जाती है। लेकिन इसकी देखरेख करनी पड़ती है जो सभी मरीज़ों के लिए संभव नहीं हो सकता।

• सांस के आधार पर चलने वाले उपकरणों में सांस की तेज़ गति की आवश्यकता हो सकती है और शारीरिक रुप से कमज़ोर मरीज़ों के लिए यह संभव नहीं हो सकता।

• उपकरण का चयन बतायी गयी दवाइयों और मरीज़ के क्षमता पर निर्भर करता है।

• मरीजों को चुने हुए उपकरण के बारे में अच्छी तरह से जानकारी और उसके उपयोग के साथ सहज महसूस होना जरूरी है।

• एयरोसोल दवा का प्रभावी वितरण मुख्य रूप से सही तकनीक पर निर्भर है।

• हेल्थ प्रोफेशनल्स के लिए आवश्यक, क्योंकि इससे उन्हें आधुनिक और वर्तमान स्थितियों की जानकारी और सभी डिलिवरी सिस्टम्स में कुशल बनने में मदद मिलती है।

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अनुवादक-Sadhna Tiwari

चित्रस्रोत-  Getty images.

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