थायराइड बढ़ गया तो प्रेग्नेंसी का सपना टूट सकता है, ये 6 लक्षण देखते ही डॉक्टर के पास भागें!

महिला फर्टिलिटी पर इसका प्रभाव बेहद महत्वपूर्ण होता है। जब यह सही तरीके से काम नहीं करती, तो यह सीधे ओव्यूलेशन प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है। इस प्रक्रिया में थायराइड हार्मोन अहम भूमिका निभाता है।

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Written By: Ashu Kumar Das | Published : February 25, 2026 7:49 PM IST

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Medically Verified By: Dr. Ila Gupta

How Thyroid Disorders Affect Ovulation and Female Fertility : आजकल कई महिलाएं गर्भधारण में कठिनाई का सामना कर रही हैं। अक्सर लोग इसका कारण केवल प्रजनन अंगों से जुड़ी समस्या मान लेते हैं, लेकिन वास्तविकता यह है कि कई मामलों में हार्मोनल असंतुलन इसकी जड़ में होता है। इन्हीं हार्मोनल कारणों में से एक महत्वपूर्ण लेकिन अक्सर अनदेखा कारण है- थायराइड ग्रंथि का असंतुलन।

प्रिस्टीन केयर फर्टिलिटी एंड आईवीएफ हॉस्पिटल की चेयरपर्सन एवं चीफ आईवीएफ कंसल्टेंट डॉ. इला गुप्ता ((Dr. Ila Gupta, Chairperson & Chief IVF Consultant, Pristyn Care Ferticity & IVF Hospital) के अनुसार, थायराइड ग्रंथि छोटी जरूर होती है, लेकिन महिला फर्टिलिटी पर इसका प्रभाव बेहद महत्वपूर्ण होता है। जब यह सही तरीके से काम नहीं करती, तो यह सीधे ओव्यूलेशन प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है।

थायराइड असंतुलन कैसे ओव्यूलेशन को प्रभावित करता है?

डॉ. इला गुप्ता बताती हैं कि थायराइड हार्मोन का स्तर बहुत कम (हाइपोथायरायडिज्म) या बहुत अधिक (हाइपोथायरायडिज्म) होने पर सबसे पहले महिलाओं का पीरियड्स साइकिल खराब होता है। जब पीरियड्स साइकिल सही न हो तो महिलाओं के गर्भाशय में अंडाणु बनने की प्रक्रिया भी धीमी हो जाती है। इससे ओव्यूलेशन प्रभावित होता है और महिलाओं को प्रेग्नेंसी कंसीव करने में दिक्कत आती है।

  1. हाइपोथायराइडिज्म (थायराइड हार्मोन की कमी)- डॉक्टर बताते हैं कि हाइपोथायराइडिज्म कि स्थिति में पीरियड्स अनियमित हो जाते हैं। कई बार हाइपोथायराइडिज्म के कारण लंबे समय तक पीरियड्स बंद हो सकते हैं। इससे शरीर में प्रोलैक्टिन हार्मोन बढ़ सकता है। प्रोलैक्टिन का बढ़ना अंडोत्सर्जन (ovulation) को रोक सकता है, जिससे गर्भधारण कठिन हो जाता है। डॉ. इला गुप्ता बताती हैं कि कई महिलाएं लगातार थकान, वजन बढ़ना या सुस्ती को सामान्य तनाव समझती हैं, जबकि ये अंडरएक्टिव थायराइड के संकेत हो सकते हैं। इस स्थिति में तुरंत डॉक्टर से मिलकर इलाज करवाना चाहिए।
  2. हाइपोथायरायडिज्म (थायराइड हार्मोन की अधिकता)- हाइपोथायरायडिज्म की स्थिति मे महिलाओं के पीरियड्स काफी हल्के हो जाते हैं। इसमें पीरियड्स बार-बार आते हैं। जिसके कारण अंडे का परिपक्व होना प्रभावित होता है और ओव्यूलेशन सही समय पर नहीं होता है। यह स्थिति भी गर्भधारण की संभावना को कम कर सकती है।

थायराइड के कारण फर्टिलिटी कैसे प्रभावित होती है?

हमारे साथ खास बातचीत के दौरान डॉ. इला कहती हैं कि थायराइड समस्याएं पीरियड्स के साइकिल को कई तरह से प्रभावित कर सकती हैं:

  1. अनियमित पीरियड्स
  2. अत्यधिक या बहुत कम ब्लीडिंग होना
  3. पीरियड का लंबे समय तक न आना

पीरियड्स के दौरान बहुत ज्यादा दर्द होना

डॉक्टर बताती हैं कि महिलाओं की फर्टिलिटी इस बात पर निर्भर करती है कि उनके पीरियड्स साइकिल कितने नॉर्मल है। अगर पीरियड साइकिल में किसी प्रकार की भी परेशानी आती है या गड़बड़ी होती है, तो अंडाणुओं के बनने और निषेचन में दिक्कत होती है। इससे प्रेग्नेंसी कंसीव करने की संभावना कम हो जाती है।

किन लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए?

डॉक्टर बताती हैं कि आप गर्भधारण की कोशिश कर रही हैं और नीचे दिए गए लक्षण अनुभव कर रही हैं, तो थायराइड जांच कराना जरूरी है:

  1. अनियमित पीरियड्स
  2. अत्यधिक थकान
  3. अचानक वजन बढ़ना या घटना
  4. मूड स्विंग्स
  5. बाल झड़ना
  6. ठंड या गर्मी सहन न होना

ये संकेत थायराइड असंतुलन की ओर इशारा कर सकते हैं।

डॉ. इला गुप्ता के अनुसार, कई महिलाएं प्रेग्नेंसी कंसीव न होने पर खुद को दोष देने लगती हैं, जबकि कभी-कभी इसका कारण केवल एक हार्मोनल असंतुलन होता है जिसे आसानी से ठीक किया जा सकता है। सही जानकारी, समय पर जांच और विशेषज्ञ की सलाह से प्रजनन स्वास्थ्य को बेहतर बनाया जा सकता है।

Highlights

  • थायराइड के कारण पीरियड्स साइकिल बिगड़ता है।
  • पीरियड्स सही न होने पर ओव्लुशन प्रभावित होता है।
  • थायराइड और पीरियड्स के बीच कनेक्नश होता है।

Disclaimer: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।

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