
अंजू रावत
अंजू रावत एक अनुभवी हेल्थ, फिटनेस, रिलेशनशिप, ब्यूटी और लाइफस्टाइल लेखक हैं, जिन्हें इन विषयों पर लिखने ... Read More
Written By: Anju Rawat | Published : June 10, 2026 8:33 AM IST
Medically Verified By: Dr. Chandni Tugnait
marriage stress (AI generated)
हाल ही में सामने आए दीपिका, ट्विशा और पलक केस ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा। इन तीनों मामलों पर सोशल मीडिया पर जमकर चर्चा हुई और कई सवाल भी उठे। आरोप है कि दीपिका ने घरेलू हिंसा और दहेज प्रताड़ना से परेशान होकर घर की छत से कूदकर अपनी जान दे दी। वहीं, पलक और ट्विशा मामले में जांच और कानूनी कार्रवाई अभी जारी है। इन घटनाओं ने सिर्फ तीन परिवारों को ही नहीं, बल्कि हजारों लड़कियों के मन में शादी, सुरक्षा और भविष्य को लेकर नई चिंताएं भी पैदा कर दी हैं।
शादी...यह हर लड़की का एक ऐसा सपना है, जिसे वह बचपन से सजाती है। उसे हर वक्त नए घर की कल्पना और खूबसूरत जिंदगी की चाह की उम्मीद में बैठी रहती है। लेकिन, पिछले कुछ दिनों में दीपिका, ट्विशा और पलक जैसे मामलों ने इस सपने के साथ लड़कियों के मन में एक नया डर भी डाल दिया है। अब कई लड़कियां सिर्फ शादी की ड्रेस या वेन्यू के बारे में नहीं सोच रही हैं, वह सोच रही हैं कि उनका नया घर सच में सुरक्षित होगा या नहीं? क्या उस घर में उनकी आवाज सुनी जाएगी? क्या उनसे कोई प्यार करेगा या उन्हें हर दिन कोई-न-कोई समझौता करना पड़ेगा? लेकिन, जब से दीपिका, ट्विशा और पलक के मामले सामने आए हैं, तब से सोशल मीडिया पर ज्यादातर लड़कियां सवाल पूछ रही हैं कि क्या शादी सच में खुशियों की शुरुआत होती है या यह एक ऐसा फैसला है जो एक लड़की की पूरी जिंदगी को बदल सकती है? आखिर शादी को लेकर लड़कियों में स्ट्रेस क्यों बढ़ रहा है?
आजकल लगातार ऐसे कई मामले सामने आ रहे हैं, जिन्होंने लड़कियों के मन में शादी को लेकर असुरक्षा और चिंता बढ़ा दी है। इसके पीछे कई कारण जिम्मेदार है, जैसे-
गेटवे ऑफ हीलिंग की फाउंडर, डायरेक्टर और मनोचिकित्सक डॉ. चांदनी तुगनैत बताती हैं, "जब इस तरह की घटनाएं सामने आती हैं, तो लोग खुद को भी उसी तरह की स्थिति में कल्पना करने लगते हैं। इस स्थिति को विकैरियस एंग्जाइटी (Vicarious Anxiety) कहा जाता है। जब कोई व्यक्ति इस तरह की एंग्जाइटी से गुजरता है, तो उसे पॉजिटिव चीजों में भी तनाव महसूस होने लगता है।"
Disclaimer: अगर किसी रिश्ते में सम्मान, सुरक्षा और भरोसा नहीं है, तो चुप रहकर सब सहना समाधान नहीं है। समय पर आवाज उठाना और मदद लेना सबसे जरूरी कदम है। चुप रहकर ऐसे मामलों को बढ़ावा बिल्कुल न दें। अगर संभव हो तो अपने परिवार वालों से बात करें और स्ट्रेस में हैं तो एक बार साइकेट्रिस्ट से जरूर मिलें।