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Medically Verified By: डॉ. सामंत
World Mental Health Day 2024 : ऑब्सेसिव-कंपल्सिव डिसऑर्डर (OCD) एक गंभीर मानसिक स्वास्थ्य स्थिति है, जिसमें व्यक्ति जरूरत से ज्यादा किसी चीज को लेकर चिंता करने लगता है। इस मानसिक समस्या से जूझ रहे व्यक्तियों को एक ही जैसे अनचाहे ख्याल बार- बार सताते हैं और वे एक ही काम को बार-बार दोहराना चाहता है। इस तरह के व्यक्तियों को सनक वाले ख्याल आते हैं और वे अपने व्यवहार पर कंट्रोल भी नहीं कर पाते हैं। वे खुद को रोक नहीं पाते हैं और न ही किसी चीज को लेकर बेफिक्र हो पाते हैं। सिंपल सी भाषा में समझें, तो ओसीडी दिमाग में एक ही ख्याल पर अटक जाना होता है।
उदाहरण के लिए सफाई करने के बाद भी मन में यही ख्याल रहना की चीजें अच्छे से साफ नहीं हुई हैं, गैस बंद करने के बाद भी ख्याल करना ही गैस बंद किया है या नहीं, इत्यादि। कुछ लोगों में ओसीडी सामान्य होता है, तो समय के साथ ठीक हो जाता है। वहीं, कुछ लोगों में यह दिन-ब-दिन बढ़ता जाता है। डॉ. सामंत, नोएडा के साइमेट क्लीनिक के मनोवैत्रानिक कंसल्टेंट का कहना है कि OCD को तब डायग्नोज किया जाता है, जब व्यक्ति के दैनिक जीवन का पैटर्न, रिश्तों और कामकाज में महत्वपूर्ण रूप से हस्तक्षेप हो।
डॉ. सामंत का कहना है कि OCD की गंभीरता हल्के से लेकर गंभीर हो सकती है। गंभीर मामलों में व्यक्ति अपने ख्यालों और जुनून कंट्रोल करने में घंटों समय बिता देता है, जिसकी वजह से अन्य काम, शिक्षा और सामाजिक जीवन पर नकारात्मक रूप से प्रभाव पड़ सकता है। बता दें कि OCD को अक्सर चिंता विकारों से जोड़ा जाता है और इस स्थिति वाले लोग अक्सर डर या संदेह की तीव्र भावनाओं से जूझते हैं।
ओसीडी का इलाज आमतौर पर संज्ञानात्मक व्यवहार थेरेपी (सीबीटी), विशेष रूप से एक्सपोजर और रिस्पॉन्स प्रिवेंशन (ईआरपी) और चुनिंदा सेरोटोनिन रीअपटेक इनहिबिटर (एसएसआरआई) जैसी दवाओं के जरिए किया जाता है।
डॉक्टर का कहना है कि OCD से जूझ रहे मरीजों को ठीक होने में उसकी स्थिति और उपचार के प्रति प्रतिक्रिया के आधार पर निर्भर करती है। ऐसे में OCD से जूझ रहे व्यक्तियों के ठीक होने का समय अलग-अलग हो सकता है। जहां कुछ लोगों को ओसीडी से ठीक होने में कुछ महीनों के अंदर का ही समय लगता है। वहीं, कुछ लोगों को इस दिमागी बीमारी से ठीक होने में सालों का समय लग सकता है। वहीं, यह बीमारी दोबारा न हो जाए और लंबे समय तक इलाज को सफल बनाए रखने के लिए डॉक्टर नियमित रूप से चेकअप कराने की सलाह देते हैं।
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