हार्ट पेशेंट के लिए एक्सरसाइज करना कितना सुरक्षित है?

Kya Heart Patient Exercise Kar Sakta Hai: कुछ हार्ट पेशेंट हल्की-फुल्की एक्सरसाइज करने से भी कतराते हैं तो कुछ अपनी फिटनेस को बेहतर बनाना चाहते हैं। लेकिन क्या हार्ट पेशेंट को एक्सरसाइज करनी चाहिए? आइए जानते हैं।

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Written By: Dr Samir Kubba | Published : May 7, 2026 6:34 PM IST

Heart Patient Exercise Kaise Kare: हार्ट डिजीज से ग्रस्त व्यक्ति अक्सर फिजिकल एक्टिविटी से दूर भागते हैं, लेकिन सही तरीके और मात्रा में एक्सरसाइज करना स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है। लेकिन समस्या तब पैदा होती है जब व्यायाम बहुत ही ज्यादा किया जाए। मैंने ऐसे कई लोग देखें हैं दिल से जुड़ी समस्याओं की वजह से पूरी तरह से ही दौड़-भाग या एक्स्ट्रा फिजिकल एक्टिविटी करना छोड़ देते हैं।

उनके मन में कुछ हो जाने का डर लगा रहता है। हर किसी तक सही जानकारी पहुंचे यानी कि हृदय रोगियों के लिए कितना व्यायाम सुरक्षित है? क्यों ज्यादा व्यायाम हानिकारक साबित हो सकता है? कौन से व्यायाम चुनने चाहिए? और इसके घरेलू विकल्प क्या हैं आदि-आदि। 

पहले जानें हार्ट पेशेंट को ज्यादा एक्सरसाइज क्यों नहीं करनी चाहिए?

हार्ट पेशेंट का दिल पहले से ही कमजोर होता है और इसी स्थिति में वह काम करता है। एनजाइना, हार्ट अटैक या हार्ट फेलियर जैसी स्थितियों में दिल की मांसपेशियां पर्याप्त ऑक्सीजन पाने में कठिनाई महसूस करती हैं। जब एक्सरसाइज तेजी से या लंबे समय तक हो तो हार्ट पर ज्यादा दबाव पड़ता है। हार्ट रेट अचानक बढ़ जाती है, ब्लड प्रेशर इंबैलेंस हो जाता है और ऑक्सीजन की मांग बढ़ जाती है। इससे एरिथमिया, चक्कर आना या यहां तक कि हार्ट अटैक का खतरा भी बढ़ सकता है।

हफ्ते में 150 मिनट की मॉडरेट इंटेंसिटी की एक्सरसाइज काफी मानी जाती है, लेकिन इसे धीरे-धीरे बढ़ाना चाहिए। अगर कोई व्यक्ति पहले से इनएक्टिव है, तो एकदम से लंबी दौड़ न लगाएं। इसलिए, अपने दिल को बोझ न दें। हम हमेशा ECG या स्ट्रेस टेस्ट करवाने के बाद ही एक्सरसाइज लिमिट तय करते हैं।

हार्ट पेशेंट के लिए कौन सी एक्सरसाइज सेफ होती हैं?

देखें सेफेस्ट एक्सरसाइज वह होती हैं जो हार्ट स्पीड गति को धीरे-धीरे बढ़ाती हैं और जोड़ों पर कम दबाव डालती हैं। पहली इम्पोर्टेंस एरोबिक व्यायाम को दी जाती है, लेकिन मॉडरेट इंटेंसिटी यानी कि स्पीड को न ज्यादा तेज और न ज्यादा धीमे रखें। टॉक टेस्ट का उपयोग करें- व्यायाम के दौरान सामान्य बातचीत संभव होनी चाहिए। आप इन एक्सरसाइज को कर सकते हैं-

हार्ट पेशेंट के लिए एक्सरसाइज Image credit- ChatGPT

स्ट्रेंथ ट्रेनिंग कैसे करें?

स्ट्रेंथ ट्रेनिंग में हल्के वजन वाले व्यायाम शामिल करें, जैसे डंबल से बाइसेप कर्ल, लेकिन सांस रोककर न उठाएं। हर व्यायाम से पहले 5 मिनट वार्म-अप और बाद में कूल-डाउन होने का समय भी रखें। हार्ट रेट 50-70% अधिकतम तक सीमित रखें। अगर छाती में दर्द, सांस फूलना या थकान हो, तुरंत रुक जाएं।

घर पर कौन से व्यायाम अपनाए जा सकते हैं?

देखें घर पर किए जाने वाले व्यायाम आसान और सुरक्षित होते हैं, खास कर पीरियड्स या बाहर न जाने के समय। आप इनसे शुरू कर सकते हैं- 

सीटेड लेग लिफ्ट्स- कुर्सी पर बैठकर पैर सीधे उठाएं। ऐसा 10-15 बार दोहराएं और 2 सेट। यह हार्ट रेट को कंट्रोल रखता है।

वॉल पुश-अप्स- दीवार के सामने खड़े होकर हाथों से धकेलें। यह फर्श पुश-अप से बेहतर, क्योंकि इसमें बोझ कम फील होता है।

आर्म सर्कल्स- खड़े होकर बाजुओं को गोल-गोल घुमाएं। 20 सर्कल आगे-पीछे करें।

चेयर एक्सरसाइज- चेयर पर बैठकर घुटनों को छाती की ओर लाएं या पैरों को साइकिल की तरह घुमाएं।

ब्रीदिंग एक्सरसाइज- अनुलोम-विलोम या डीप ब्रीथ लें। ऐसा रोज 10 मिनट तक करें।

इन व्यायामों को 10-15 मिनट के सेशन में बांटे। आप टीवी देखते हुए या गाने सुनते हुए एक्सरसाइज कर सकते हैं। कुछ ऐप डाउनलोड कर सकते हैं जो ट्रैकिंग में हेल्पफुल हो सकते हैं। हाइड्रेशन बनाए रखें और खाने के तुरंत बाद व्यायाम न करें।

एक्सरसाइज प्लान कैसे बनाएं?

  • आप एक व्यक्ति के हिसाब से अपने प्रोग्राम तैयार करें।
  • यानी कि पहले दो हफ्ते सिर्फ 10-15 मिनट चलना या ब्रीदिंग एक्सरसाइज 3-3 दिन करें। 
  • तीसरे-चौथे हफ्ते में साइकिलिंग और योग जोड़ें, 20 मिनट चार दिन। 
  • पांचवें हफ्ते से मिक्स एक्सरसाइज 30 मिनट तक करें और फिर इसे बढ़ाएं। हर चार सप्ताह में सक्सेस रेट देखें। 

दवाओं के असर पर भी ध्यान रखें क्योंकि बीटा ब्लॉकर्स हार्ट रेट को कम कर सकते हैं। महिलाओं और बुजुर्गों में थकान जल्दी आ सकती है, इसलिए सतर्क रहें।

नियमित व्यायाम से कोलेस्ट्रॉल नियंत्रित होता है, वजन घटता है और हार्ट मजबूत बनता है। लेकिन सुरक्षित सीमा लांघना घातक सिद्ध हो सकता है। हृदय रोगी स्वयं निर्णय न लें- कार्डियोलॉजिस्ट से परामर्श अनिवार्य। जीवनशैली में बदलाव लाकर स्वस्थ जीवन जिएं।

डिस्क्लेमर- हार्ट पेशेंट्स को अपने दिल का ख्याल रखना चाहिए, क्योंकि अगर वह थोड़ी भी सांस फूलने वाली गतिविधि करते हैं यह स्थिति को और बिगाड़ सकता है। दिल से जुड़ी बीमारी होने के बाद भी अगर आप अपनी फिटनेस पर ध्यान देना चाहते हैं तो अपने या किसी अन्य अच्छे कार्डियोलॉजिस्ट से परामर्श लें।

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