ऑक्सीजन की कमी में और तेजी से बढ़ती हैं कैंसर कोशिकाएं, ऑन्कोलॉजिस्ट ने बताया क्या है कनेक्शन

Cancer Treatment: ऑक्सीजन कैंसर के बढ़ने और कैंसर का इलाज करने दोनों में ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं, इस लेख में ऑन्कोलॉजिस्ट कुछ जरूरी जानकारी इस बारे में दे रहे हैं।

ऑक्सीजन की कमी में और तेजी से बढ़ती हैं कैंसर कोशिकाएं, ऑन्कोलॉजिस्ट ने बताया क्या है कनेक्शन
VerifiedVERIFIED By: Dr. Tejinder Kataria

Written by Mukesh Sharma |Published : January 20, 2026 6:37 PM IST

Important of Oxygen in Cancer Treatment: ऑक्सीजन हमारे शरीर के लिए कितनी जरूरी है, यह आपको भी अच्छे से पता है और यह बताने के लिए आपको कोई मेडिकल एक्सपर्ट होने की जरूरत नहीं है। हमारे शरीर को की कोशिकाओं को एनर्जी बनाने के लिए और शरीर के एक-एक हिस्से को स्वस्थ रखने के लिए लगातार ऑक्सीजन की जरूरत पड़ती है। लेकिन इसका फायदा कैंसर कोशिकाएं भी उठा लेती हैं, क्योंकि कैंसर कोशिकाएं अपने आसपास की ऑक्सीजन को अपने अनुसार ढाल लेती हैं, जिसे मेडिकल भाषा में “ऑक्सीजन इफेक्ट” (Oxygen Effect) कहा जाता है। कैंसर कोशिकाओं के इस खास प्रभाव को समझना जरूरी है क्योंकि इसी पर निर्भर करता है कि कैंसर कैसे बढ़ेगा और इलाज का उस पर कितना असर होगा। डॉ. तेजिंदर कटारिया, चेयरपर्सन, रेडिएशन ऑन्कोलॉजी, मेदांता गुरुग्राम ने इस बारे में कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां दी, जिनके बारे में हम आपको इस लेख में बताने वाले हैं।

कम ऑक्सीजन में भी जीवित रहती हैं कैंसर कोशिकाएं

कैंसर के बढ़ने का एक सबसे बड़े कारणों में से एक यह है कि जहां ऑक्सीजन की कमी होने पर स्वस्थ कोशिकाएं मरने लगती हैं, वहीं कैंसर कोशिकाएं लो ऑक्सीजन लेवल में भी न सिर्फ जीवित रहने की क्षमता रखती हैं, बल्कि तेजी से बढ़ने की हिम्मत भी रखती हैं। शरीर में ऑक्सीजन कमी कमी को हाइपोक्सिया (Hypoxia) कहा जाता है और यही कारण है कि इसमें ट्यूमर के तेजी से बढ़ने का खतरा और ज्यादा बढ़ जाता है। सरल शब्दों में कहें तो जहां ट्यूमर विकसित होता है, वहां ऑक्सीजन की कमी होने लगती है और जहां ऑक्सीजन की कमी के कारण उस हिस्से की स्वस्थ कोशिकाएं नष्ट होने लगती हैं, वहीं कैंसर कोशिकाएं और तेजी से बढ़ने लगती हैं।

इलाज पर पड़ता है असर

अब आप यह भी समझ गए होंगे कि कैंसर के मरीज के लिए ऑक्सीजन की पर्याप्त मात्रा बेहद जरूरी है और जब कैंसर के इलाज की बात करें तो खासकर रेडिएशन थेरेपी पर कम ऑक्सीजन यानी हाइपोक्सिया का गंभीर प्रभाव पड़ता है। सरल शब्दों में कहें तो अगर मरीज के शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन मिल रही है और कैंसर से प्रभावित हिस्से के आसपास भी पर्याप्त ऑक्सीजन मिल रही है, तो रेडिएशन थेरेपी अच्छे से काम करत पाती है। वहीं इसके विपरीत स्थिति में इतना रेडिएशन थेरेपी इतने प्रभावी रूप से काम नहीं कर पाती है। इसकी तरह से कीमोथेरेपी दवाएं भी कैंसर के उस हिस्से पर इतने प्रभावी रूप से काम नहीं कर पाती हैं, जहां पर ऑक्सीजन की कमी है।

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क्या है इसका समाधान?

लेकिन आज के समय की मॉडर्न साइंस ने अब इसका इलाज भी ढूंढ लिया है, अब एडवांस इमेजिंग तकनीक के माध्यम से ट्यूमर के आसपास के उन हिस्सों की विशेष रूपसे पहचान कर ली जाती है, जहां ऑक्सीजन लेवल कम है यानी जिन्हें पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन नहीं मिल पा रहा है।

अब एसबीआरटी (SBRT) और आईजी-आईएमआरटी (IG-IMRT) जैसी खास तरह की मशीनों का इस्तेमाल रेडिएश ऑन्कोलॉजी में किया जाता है। इस खास तकनीक की मदद से डॉक्टर ट्रीटमेंट के दौरान ट्यूमर के उन हिस्सों तक स्ट्रॉन्ग डोज पहुंचा पाते हैं, जहां पर ऑक्सीजन कम है और इलाज प्रभावी रूप से काम नहीं कर पा रहा है।

इतना ही नहीं अब वैज्ञानिक ऐसी खास तरीके की दवाओं पर भी काम कर रहे हैं, जो खासतौर पर कम ऑक्सीजन वाली कैंसर कोशिकाओं को ही निशाना बनाती हैं या ट्यूमर तक ऑक्सीजन की सप्लाई बढ़ाती हैं।

इन खास तकनीकों की मदद से मरीज के जल्दी ठीक होने की संभावना काफी बढ़ जाती है, क्योंकि इलाज प्रभावी तरीके से जरूरी हिस्सों तक भी पहुंच पाता है और इससे फिर से कैंसर होने का खतरा भी काफी हद तक कम हो जाता है।

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अस्वीकरण: प्रिय पाठकों यह आर्ट‍िकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।