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Written By: Kishori Mishra | Updated : July 10, 2020 7:31 PM IST
Overthinking is a term that is commonly used. It is not a mental illness but is often associated with various mental health conditions, including anxiety disorders, obsessive-compulsive disorder, depression, and substance and eating disorders. Dr Gautami Nagabhirava, Senior Neuropsychiatrist, Kamineni Hospitals, Hyderabad, explains that overthinking is repetitive, useless pondering. Instead, thinking, planning, and problem-solving skills are crucial for surviving and guiding decisions.
Overthinking : क्या आप बार-बार बीमार हो रहे हैं? सोते समय तनाव महसूस कर रहे हैं? रात को नींद नहीं आ रही है? हमेशा विचारों में डूबे रहते हैं? अगर आपको ये सभी लक्षण दिख रहे हैं, तो समझ जाएं कि आप ओवरथिंकिंग के शिकार हो चुके हैं। ऐसे लोग ना चाहते हुए हर छोटी-छोटी बातों को लेकर सोचने लगते हैं और उसपर विश्लेषण करते हैं। इनके लिए शांत रहना और चीजों के बारे में ना सोचना असंभव सा हो जाता है। लेकिन आपको बता दें कि ज्यादा और लगातार सोचने से ना सिर्फ आप मानसिक रूप से बीमार होते हैं, बल्कि शारीरिक रूप से भी बीमार (Overthinking) होने लगते हैं।
जब आप किसी चीज को लेकर बहुत ही परेशान होते हैं, तो आपके शरीर में कोर्टिसोल हार्मोन की बढ़ने लगता है, जिससे सेहत पर बुरा असर पड़ता है। चलिए जानते हैं अधिक सोचने से सेहत पर कैसे असर पड़ता है।
आपने कभी इस बात पर ध्यान दिया है कि स्ट्रेस लेने पर आप अक्सर बीमार पड़ जाते हैं? ऐसा इसलिए होता कि क्योंकि स्ट्रेस के कारण शरीर में कोर्टिसोल रिलीज होने लगता है, जिसके कारण प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर हो जाती है। इम्युनिटी कमजोर होने के कारण हम बहुत ही जल्दी बीमार होने लगते हैं और आसानी से बीमारियों की (Overthinking) चपेट में आ जाते हैं।
दिमाग में हमेशा नकारात्मक विचार होने की वजह से हमारे शरीर के हार्मोन का संतुलन बिगड़ सकता है। नकारात्मक विचारों के कारण हमारे शरीर में रिलीज होने वाले हैप्पी हार्मोन्स भी प्रभावित होते हैं, इसके कारण हमारा मूड खराब हो जाता है। निराशाजनक बातों और उदासी पर अधिक फोकस करने से हार्मोंस तेजी से प्रभावित होते हैं। यह अवसाद का कारण बन सकता है।
ज्यादा सोचने और अधिक चिंता करने से हृदय संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं। इसके कारण चक्कर आना, सीने में जलन जैसी परेशानी होती है। इसके अलावा हाइपरटेंशन, हाइपरटेंशन जैसी क्रोनिक स्वास्थ्य समस्याएं भी हो सकती हैं।
ज्यादा सोचने से स्ट्रेस होना बहुत ही आम बात है, लेकिन इसके कारण आपका पाचन तंत्र भी प्रभावित होता है। तनाव की वजह से गैस्ट्रोइंटेस्टिनल समस्याएं जैसे सूजन, इरिटेबल बोवेल सिंड्रोम, बोवेल डिजीज, गैस्ट्रिक स्राव, गैस और कब्ज जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
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