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विश्व एड्स दिवस 2017: क्या HIV के विषाणु शरीर में होते हुए भी व्यक्ति स्वस्थ रह सकते हैं ?

जानें डॉ. वी. सैम प्रसाद से इस सवाल का जवाब!

विश्व एड्स दिवस 2017: क्या HIV के विषाणु शरीर में होते हुए भी व्यक्ति स्वस्थ रह सकते हैं ?

Written by Editorial Team |Updated : December 4, 2017 9:53 AM IST

*1 दिसंबर को विश्व एड्स दिवस के रूप में मनाया जाता है।

एड्स और एचआईवी दो सबसे ज़्यादा डरावनेवाले शब्द  बन गए हैं। क्योंकि एड्स को जानलेवा बीमारी कहा जाता है।  यानि  एक स्वस्थ दिखनेवाली व्यक्ति को भी अगर एचआईवी पॉजिटिव पाया जाता है, तो लोग उसकी ज़िंदगी को लेकर डर से जाते हैं। ऐसा माना जाता है कि जिसे एड्स हो गया उसका बचना मुश्किल है। तो क्या सचमुच एड्स होने पर सचमुच मरीज़ की मौत हो जाती है? एचआईवी को एड्स में तब्दील होने में कितना समय लगता है और क्या एचआईवी (HIV) के विषाणु शरीर में निष्क्रिय रह सकते हैं ? यह एक ऐसा सवाल है जो ज्यादातर लोग पूछते हैं। जैसा कि एचआईवी संक्रमण होने से पहले भी ह्यूमन इम्यूनोडिफीसिअन्सी वायरस (एचआईवी) के विषाणु शरीर में निष्क्रिय रह सकते हैं, और अगर किसी व्यक्ति को इंफेक्शन हो जाता है, तो क्या स्थिति धीरे-धीरे गंभीर होगी या वह व्यक्ति जल्द ही मर जाएगा? एड्स हेल्थकेयर फाउंडेशन के कंट्री प्रोग्राम डायरेक्टर डॉ. वी. सैम प्रसाद कहते हैं कि वास्तव में, एचआईवी संक्रमण को पूर्ण विकसित एड्स या इम्यून डेफिशिएंसी सिंड्रोम (immune deficiency syndrome) में बदलने की कुछ खास वजहें हैं।

आप एक बात का खास ख्याल रखें कि कि आप चाहे किसी और इंफेक्शन या बीमारी से पीड़ित हों या नहीं, एचआईवी संक्रमण को एड्स में बदलने में एक जैसा ही वक़्त लगता है। भारत में, आमतौर पर इसमें  8-10 वर्ष का समय लगता है, जब एचआईवी संक्रमण का इलाज ना किया जाए और वह एड्स में तब्दील हो जाता है। इसमें एचआईवी-पॉजिटिव रोगी भी शामिल हैं, जो विभिन्न इंफेक्शन्स से भी पीड़ित होते हैं। एचआईवी इंफेक्शन से पीड़ित व्यक्ति एड्स का मरीज़ तभी बनता है जब उसे 2-3 इंफेक्शन्स और हों, उसका सीडी4 काउंट(CD4 count) कम हो और वायरल लोड बहुत अधिक हो।

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ऐसे व्यक्ति जो एचआईवी इंफेक्शन से पीड़ित हों और ऐसे हेपेटाइटिस, टीबी जैसे इंफेक्शन्स के साथ एचआईवी से भी, उन दोनों में एचआईवी इंफेक्शन को एड्स में बदलने में समान समय लगता है। एचआईवी संक्रमण को पूर्ण विकसित एड्स में बदलने से रोकने के लिए सबसे पहला काम इसकी जांच करना है और यही सबसे अच्छा तरीका भी है। भारत में, एचआईवी का पता लगने में अक्सर बहुत देर हो जाती और कई बार लोग जांच कराने तब पहुंचते हैं जब सीडी4 काउंट (लगभग 150 या 120 सेल्स/ मिमी3) बहुत कम हो जाता है। सीडी4काउंट का कटऑफ या सीमारेखा 350 सेल्स/मिमी3 को कहा जा सकता है, जिसका अर्थ है कि 350 सेल्स/मिमी3 से कम सीडी4काउंटवाले एचआईवी पॉजिटिव व्यक्ति को दवाएं शुरू करनी चाहिए।  फिलहाल स्थिति ऐसी है कि व्यक्ति की जांच की जाती है, और समस्या का पता लगते ही (सीडी4 काउंट के बावजूद) इलाज शुरु कर दिया जाता है। जल्द से जल्द समस्या का पता लगने और जल्द उपचार शुरु करना ही सबसे अच्छा तरीका है।

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अनुवादक: Sadhana Tiwari.

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चित्रस्रोत:Shutterstock Images.

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