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खर्राटे लेने वालों में Hypertension का खतरा कितना ज्यादा होता है? डॉक्टर से जानें

Kharaton Aur Hypertension Mai Sambandh: क्या आप जानते हैं कि जो लोग सोते समय खर्राटे लेते हैं, उनमें हाइपरटेंशन का खतरा कितना बढ़ जाता है? आइए डॉक्टर से जानते हैं।

Written By Vidya Sharma
Updated : May 12, 2026 5:09 PM IST

हाई बीपी और खर्राटे

Kya Kharaton Se Hypertension Ka Khatra Badhta Hai: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में खर्राटे लेना एक आम समस्या माना जाता है। कई लोग इसे केवल गहरी नींद का संकेत समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन पारस हेल्थ, कानपुर के कार्डियोलॉजिस्ट कंटेस्टेंट उत्कर्ष कुमार स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार लगातार और तेज खर्राटे लेना उच्च रक्तचाप यानी Hypertension का संकेत भी हो सकता है। खासकर अगर खर्राटों के साथ सांस रुकने जैसी समस्या हो, तो यह दिल और दिमाग दोनों के लिए गंभीर खतरा बन सकती है।

डॉक्टरों के मुताबिक, जो लोग नियमित रूप से खर्राटे लेते हैं, उनमें सामान्य लोगों की तुलना में हाई ब्लड प्रेशर होने का खतरा लगभग 2 से 3 गुना तक बढ़ सकता है। इसका मुख्य कारण ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया (OSA) नाम की स्थिति है। इसमें सोते समय गले की मांसपेशियां ढीली हो जाती हैं, जिससे सांस लेने का रास्ता बार-बार बंद होता है। परिणामस्वरूप शरीर में ऑक्सीजन का स्तर कम होने लगता है और शरीर तनाव की स्थिति में पहुंच जाता है। इससे ब्लड प्रेशर बढ़ने लगता है।

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क्या कहते हैं एक्सपर्ट?

एक्सपर्ट बताते हैं कि जब रातभर शरीर को सही से ऑक्सीजन नहीं मिलती, तो हार्ट को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। इससे ब्लड वेसल्स पर दबाव बढ़ता है और लंबे समय में हाइपरटेंशन की समस्या स्थायी रूप यानी कि परमानेंट हो सकती है। यही नहीं, इनटरिटेबल स्लीप एपनिया आगे चलकर हार्ट अटैक, स्ट्रोक, अनियमित धड़कन और हार्ट फेलियर जैसी बीमारियों का जोखिम भी बढ़ा सकता है।

खर्राटे लेने वालों में हाइपरटेंशन के क्या लक्षण दिखते हैं?

डॉक्टर बताते हैं कि खर्राटे लेने वालों में कुछ सामान्य लक्षण भी देखे जाते हैं, जैसे सुबह सिरदर्द होना, दिनभर थकान महसूस होना, नींद पूरी न लगना, चिड़चिड़ापन और ध्यान केंद्रित करने में परेशानी। अगर किसी व्यक्ति को ये लक्षण दिखाई दें, तो उसे तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।

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खर्राटों और हाई BP का जोखिम कैसे बढ़ता है?

कोई भी परेशानी अचानक हो या फिर धीरे-धीरे, उसके पीछे कुछ कारण जरूर होते हैं। जैसे डॉक्टरों का कहना है कि मोटापा, धूम्रपान, शराब का सेवन, देर रात तक जागना और शारीरिक गतिविधि की कमी खर्राटों और हाई BP दोनों के जोखिम को बढ़ाते हैं। पुरुषों में यह समस्या महिलाओं की तुलना में अधिक देखी जाती है, हालांकि मेनोपॉज के बाद महिलाओं में भी इसका खतरा बढ़ जाता है।

कैसे करें बचाव

इस समस्या से बचाव के लिए डॉक्टर बताते हैं कि लाइफस्टाइल में बदलाव बेहद जरूरी है। वजन कंट्रोल करना, नियमित व्यायाम करना, सोने का सही समय तय करना और धूम्रपान-शराब से दूरी बनाना काफी मददगार साबित हो सकता है। कई मामलों में डॉक्टर स्लीप स्टडी कराने की सलाह देते हैं, जिससे यह पता लगाया जा सके कि व्यक्ति को स्लीप एपनिया है या नहीं। जरूरत पड़ने पर कंटीन्यूअस पॉजिटिव एयरवे प्रेशर (CPAP) मशीन या अन्य उपचार भी दिए जाते हैं।

डिस्क्लेमर- अगर खर्राटों को समय रहते गंभीरता से लिया जाए, तो हाई ब्लड प्रेशर और उससे जुड़ी कई गंभीर बीमारियों से बचाव संभव है। इसलिए लगातार खर्राटे आने को सामान्य आदत मानकर नजरअंदाज न करें, बल्कि इसे शरीर का एक चेतावनी संकेत समझें।