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लुई बॉडी डिमेंशिया के बारे में कितना जानते हैं आप ?

अब भी बहुत कम है लुई बॉडी डिमेंशिया के बारे में लोगों को जानकारी, ये हैं उसके लक्षण।

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Written By: Yogita Yadav | Updated : July 26, 2018 6:49 PM IST

लुई बॉडी डिमेंशिया (मनोभ्रंश) एक प्रमुख प्रकार का डिमेंशिया है जिसके बारे में जानकारी बहुत कम है। अकसर लोग इसे पहचान ही नहीं पाते। नतीजन, परिवार वाले यह नहीं जान पाते कि आगे क्या क्या होगा और उसके लिए कैसे तैयार रहा जाए। इसके लक्षणों और उपचार की स्थिति के आधार पर इसे प्रोग्रेसिव डिमेंशिया और इररिवर्सेबल डिमेंशिया भी कहा जाता है।

लुई बॉडी डिमेंशिया की खास पहचान

मस्तिष्क के कुछ न्यूरान (neuron, कोशिका/ सेल) में “लुई बॉडी” नामक असामान्य गुच्छे पाए जाते हैं।  इस असामान्य संरचना के कारण ये सेल ठीक से काम नहीं करते। यह असामान्य संरचना मस्तिष्क के कई भागों में पाई जाती है। इसमें वह क्षेत्र भी मौजूद हैं जो पार्किंसन रोग से प्रभावित है। लुई बॉडी डिमेंशिया अन्य डिमेंशिया रोगों के साथ भी मौजूद हो सकता है, खासकर अल्ज़ाइमर के साथ। यह स्थिति  मिश्रित डिमेंशिया की स्थिति कही जाती है।

देखभाल के लिए रहें तैयार

  • लुई बॉडी डिमेंशिया में हुई मस्तिष्क की हानि को दवाओं के माध्‍यम से रिकवर नहीं किया जा सकता। अर्थात  व्यक्ति का मस्तिष्क फिर से सामान्य नहीं हो सकता।
  • मेमोरी और ब्रेन में समय के साथ लगातार कमी आती जाती है। इसके प्रोग्रेसिव डिमेंशिया भी कहा जाता है।
  • अंतिम चरण तक पहुंचते हुए लुई बॉडी डिमेंशिया या प्रोग्रेसिव डिमेंशिया से पीडि़त व्‍यक्ति को अपने सभी कार्यों के लिए दूसरों पर निर्भर होना पड़ता है।

जानकारी की कमी

आम लोगों ने डिमेंशिया या अल्ज़ाइमर का नाम तो शायद सुना हो, पर वे लुई बॉडी डिमेंशिया के बारे में नहीं जानते। डॉक्टरों में भी लुई बॉडी डिमेंशिया के बारे में बहुत कम जानकारी और प्रैक्टिस है। सबसे पहले यह 1912 में एक पार्किंसन के रोगी में पहचाना गया।

“लुई बॉडी” संरचना से संबंधित डिमेंशिया का इलाज 1990 के दशक से शुरू हो सका है।

इसके उपचार और मापदंड पर अभी तक कोई निश्चित राय नहीं बन पाई है। अब भी चिकित्‍सा जगत में इस पर लगातार रिसर्च और अध्‍ययन जारी है। यही वजह है कि अभी तक इसका कोई सही उपचार निकाला नहीं जा सका है।

कई बार तो स्थिति ऐसी भी होती है कि लुई बॉडी डिमेंशिया वाले व्यक्ति का पार्किंसन रोग या अल्ज़ाइमर रोग का उपचार किया जाता है। यह स्थिति बहुत ही खतरनाक है। उससे भी ज्‍यादा खतरनाक यह है कि इसके बारे में पता तब चलता है जब बहुत देर हो चुकी होती है।

लुई बॉडी डिमेंशिया के लक्षण

  • सोच-विचार संबंधी क्षमता कम होती चली जाती है और हर रोज इसके पैटर्न में बदलाव होता है।
  • विभ्रम, खास तौर से दृष्टि विभ्रम होता है। ऐसी चीजें दिखाई देती हैं, जो असल में होती ही नहीं हैं।
  • सुनने के बारे में भी यही स्थ्‍िाति रहती है। ऐसी चीजें सुनाई देती हैं, जो वास्‍तव में कही ही नहीं गई, या जो हैं ही नहीं। इस तरह के करीब 80% रोगियों में पाए जाते हैं।
  • पार्किन्सन रोग के लक्षण भी इसमें नजर आते हैं। जैसे कंपन, जकड़न, पैर घसीटना, धीमापन और गति में बदलाव, झुक कर चलना, बारीक काम में दिक्कत (जैसे कि लिखना, सुई पिरोना), चेहरे पर भाव की कमी नजर आने लगती है। व्‍यक्ति यह तय नहीं कर पाता कि कब उसे खुश होना है या कब दुखी होना है।
  • नींद से जुड़ा विकार भी इसका एक प्रमुख लक्षण है। इस रोग से ग्रस्‍त व्‍यक्ति न केवल सपने देखता है बल्कि उन सपनों पर नींद में ही अमल भी करने लगता है। जैसे कि सोते-सोते जोर से हँसना, चिल्लाना, हाथ-पैर मारना, बिस्तर से गिर जाना।
  • याददाश्त की समस्या, प्रॉब्लम सुलझाने में दिक्कत, तर्क करने में दिक्कत, निर्णय ठीक से न ले पाना, दूरीका अंदाज़ा न लगा पाना, वस्तुओं को पहचान न पाना, समय और जगह की पहचान न रहना आदि भी लुई बॉडी डिमेंशिया के ही लक्षण हैं। परंतु याददाश्‍त की समस्‍या अल्‍जाइमर के मरीज जितनी नहीं होती।

चित्रस्रोत: Shutterstock.