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लुई बॉडी डिमेंशिया (मनोभ्रंश) एक प्रमुख प्रकार का डिमेंशिया है जिसके बारे में जानकारी बहुत कम है। अकसर लोग इसे पहचान ही नहीं पाते। नतीजन, परिवार वाले यह नहीं जान पाते कि आगे क्या क्या होगा और उसके लिए कैसे तैयार रहा जाए। इसके लक्षणों और उपचार की स्थिति के आधार पर इसे प्रोग्रेसिव डिमेंशिया और इररिवर्सेबल डिमेंशिया भी कहा जाता है।
लुई बॉडी डिमेंशिया की खास पहचान
मस्तिष्क के कुछ न्यूरान (neuron, कोशिका/ सेल) में “लुई बॉडी” नामक असामान्य गुच्छे पाए जाते हैं। इस असामान्य संरचना के कारण ये सेल ठीक से काम नहीं करते। यह असामान्य संरचना मस्तिष्क के कई भागों में पाई जाती है। इसमें वह क्षेत्र भी मौजूद हैं जो पार्किंसन रोग से प्रभावित है। लुई बॉडी डिमेंशिया अन्य डिमेंशिया रोगों के साथ भी मौजूद हो सकता है, खासकर अल्ज़ाइमर के साथ। यह स्थिति मिश्रित डिमेंशिया की स्थिति कही जाती है।
देखभाल के लिए रहें तैयार
जानकारी की कमी
आम लोगों ने डिमेंशिया या अल्ज़ाइमर का नाम तो शायद सुना हो, पर वे लुई बॉडी डिमेंशिया के बारे में नहीं जानते। डॉक्टरों में भी लुई बॉडी डिमेंशिया के बारे में बहुत कम जानकारी और प्रैक्टिस है। सबसे पहले यह 1912 में एक पार्किंसन के रोगी में पहचाना गया।
“लुई बॉडी” संरचना से संबंधित डिमेंशिया का इलाज 1990 के दशक से शुरू हो सका है।
इसके उपचार और मापदंड पर अभी तक कोई निश्चित राय नहीं बन पाई है। अब भी चिकित्सा जगत में इस पर लगातार रिसर्च और अध्ययन जारी है। यही वजह है कि अभी तक इसका कोई सही उपचार निकाला नहीं जा सका है।
कई बार तो स्थिति ऐसी भी होती है कि लुई बॉडी डिमेंशिया वाले व्यक्ति का पार्किंसन रोग या अल्ज़ाइमर रोग का उपचार किया जाता है। यह स्थिति बहुत ही खतरनाक है। उससे भी ज्यादा खतरनाक यह है कि इसके बारे में पता तब चलता है जब बहुत देर हो चुकी होती है।
लुई बॉडी डिमेंशिया के लक्षण
चित्रस्रोत: Shutterstock.