Don’t Miss Out on the Latest Updates.
Subscribe to Our Newsletter Today!
- लेटेस्ट
- डिज़ीज़
- डाइट
- फिटनेस
- ब्यूटी
- घरेलू नुस्खे
- वीडियो
- पुरुष स्वास्थ्य
- मेंटल हेल्थ
- सेक्सुअल हेल्थ
- फोटो स्टोरी
- आयुष
- पेरेंटिंग
- न्यूज
How modern pacemakers are helping patients live better: दिल हमारे शरीर का सबसे महत्वपूर्ण अंग है। यह लगातार धड़कता है और पूरे शरीर में खून पहुंचाता है। लेकिन जब दिल की धड़कन बहुत धीमी हो जाती है, तो शरीर को पर्याप्त खून और ऑक्सीजन नहीं मिल पाती। इस स्थिति को ब्रैडीकार्डिया कहा जाता है, यानी एक मिनट में 60 से कम धड़कन होना। ऐसी स्थिति में पेसमेकर मरीज के लिए जीवन रक्षक साबित हो सकता है।
चेन्नई स्थित अपोलो हॉस्पिटल के इंटर्न कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. कार्तिगेयन ए.एम. (By Dr. Karthigesan A M, Intern. Cardiologist) का कहना है कि पेसमेकर एक छोटा इलेक्ट्रॉनिक उपकरण है जो दिल की धड़कन को नियंत्रित करने में मदद करता है। जब दिल सामान्य गति से नहीं धड़कता, तो पेसमेकर छोटे-छोटे इलेक्ट्रिकल सिग्नल भेजकर धड़कन को सामान्य और स्थिर बनाए रखता है। इसे आमतौर पर छाती की त्वचा के नीचे लगाया जाता है। पारंपरिक पेसमेकर में एक छोटा बॉक्स (डिवाइस) और उससे जुड़े तार (लीड्स) होते हैं, जो दिल तक सिग्नल पहुंचाते हैं।

डॉ. कार्तिगेयन बताते हैं कि पेसमेकर दिल की धड़कन पर नजर रखता है। जब यह महसूस करता है कि दिल बहुत धीरे धड़क रहा है, तो यह हल्का इलेक्ट्रिकल सिग्नल भेजता है। इससे दिल सामान्य गति से धड़कने लगता है। यह प्रक्रिया पूरी तरह स्वचालित होती है। मरीज को आमतौर पर इसका कोई एहसास नहीं होता, लेकिन इससे उसकी सेहत और जीवन की गुणवत्ता बेहतर हो जाती है।
भारत में पेसमेकर तकनीक की शुरुआत आसान नहीं थी। शुरुआत में कई चुनौतियां थीं। इसमें शामिल हैः
लेकिन जैसे-जैसे दिल की बीमारियों के मामले बढ़े, इस तकनीक की जरूरत भी बढ़ती गई। धीरे-धीरे भारत का हेल्थकेयर सिस्टम मजबूत हुआ और आधुनिक कार्डियोलॉजी में पेसमेकर एक जरूरी हिस्सा बन गया। आज देश के कई बड़े अस्पतालों में पेसमेकर आसानी से लगाए जाते हैं।
हमारे साथ बातचीत में डॉक्टर बताते हैं कि पहले के पेसमेकर आकार में बड़े होते थे और इनमें तार (लीड्स) होते थे। इन तारों के कारण कभी-कभी संक्रमण या तकनीकी समस्या हो सकती थी। लेकिन समय के साथ तकनीक में बड़ा बदलाव आया है। दिल के मरीजों के लिए अब छोटे आकार के पेसमेकर उपब्लध हैं। इतना ही लोगों को तकलीफ से बचाया जा सके, इसके लिए MRI-compatible पेसमेकर,फिजियोलॉजिकल पेसिंग तकनीक भी मौजूद हैं।
पहले पेसमेकर लगे मरीज MRI स्कैन नहीं करवा सकते थे, क्योंकि मशीन की चुंबकीय तरंगें डिवाइस को प्रभावित कर सकती थीं। अब MRI-compatible पेसमेकर उपलब्ध हैं, जिनसे मरीज जरूरत पड़ने पर सुरक्षित तरीके से MRI करवा सकते हैं। यह एक बड़ा बदलाव है, क्योंकि कई बीमारियों के निदान में MRI जरूरी होता है।
नई पेसिंग तकनीकों में फिजियोलॉजिकल पेसिंग शामिल है। इसमें दिल की प्राकृतिक विद्युत प्रणाली के अनुसार पेसिंग की जाती है। इससे दिल अधिक प्राकृतिक तरीके से धड़कता है और लंबे समय में बेहतर परिणाम मिलते हैं।
लीडलेस पेसमेकर आधुनिक तकनीक का बड़ा उदाहरण है। यह बहुत छोटा उपकरण होता है और इसमें कोई तार नहीं होते हैं। लीडलस पेसमेकर वर्तमान समय में दिल के मरीजों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है।
यह तकनीक खासकर उन मरीजों के लिए फायदेमंद है, जिनमें पारंपरिक पेसमेकर लगाना मुश्किल होता है।